GST 2.0: छोटे कारोबारियों से लेकर निर्यातकों तक को राहत, रजिस्ट्रेशन, रिफंड और ITC के नियम होंगे आसान
GST परिषद की 57वीं बैठक में GST 2.0 को आसान बनाने के लिए कई बडे बदलाव किए गए हैं. छोटे कारोबारियों के लिए साल में एक बार रिटर्न और तिमाही कर पेमेंट की सुविधा को मंजूरी दी गई है. रिफंड की प्रक्रिया तेज होगी और 90 फीसदी रिफंड सिस्टम के जरिए मंजूर किया जाएगा. सही खरीदार के ITC पर समिति बनाई जाएगी.

GST परिषद की 57वीं बैठक में GST सिस्टम को आसान बनाने के लिए कई बडे़ बदलावों पर फैसला लिया गया है. इस बैठक में GST की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. अब ध्यान कर सिस्टम को रोजमर्रा में आसान बनाने पर दिया गया है. रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड और इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा. छोटे कारोबारियों के लिए साल में एक बार रिटर्न दाखिल करने और हर तिमाही टैक्स जमा करने की सुविधा को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है. निर्यातकों और ऑनलाइन मंचों के जरिए कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए भी नियम आसान किए जाएंगे.
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया होगी आसान
GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जाएगा. फिलहाल कम रिस्क वाले आवेदकों को तीन वर्किंग डे के अंदर बिना अधिकारी की भागीदारी के रजिस्ट्रेशन दिया जा रहा है. यह सुविधा उन कारोबारियों के लिए है जिनका रजिस्ट्रेशन कारोबारियों को की जाने वाली सप्लाई पर मासिक कर 2.5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं है.
अभी 61 फीसदी रजिस्ट्रेशन इसी ऑटोमेटिक सिस्टम के जरिए हो रहे हैं. आवेदन पत्र में अब कारोबारी को केवल वही जानकारी भरनी होगी जो उसके लिए जरूरी है. डाक्यूमेंट को भी उनके इस्तेमाल के हिसाब से जोड़ा जाएगा. बिजनेस नाम, निदेशक या पार्टनर और अतिरिक्त कारोबार स्थल के पते में बदलाव जैसे मामलों को भी अपने आप स्वीकार किया जाएगा.
रिफंड की प्रक्रिया होगी तेज
GST रिफंड की प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया गया है. रिफंड के आवेदन की स्वीकृति की डेडलाइन 15 दिन से घटाकर 10 दिन की जाएगी. अगर 10 दिन में स्वीकृति या कमी संबंधी सूचना जारी नहीं होती है तो आवेदन को स्वीकृत माना जाएगा. रिस्क के आकलन के आधार पर 90 फीसदी रिफंड राशि को सिस्टम के जरिए ही मंजूर किया जाएगा.
स्वीकृति के बाद आदेश जारी करने की समय सीमा भी मौजूदा सात कार्य दिवस से घटाकर तीन कार्य दिवस की जाएगी. नकद खाते में जमा अतिरिक्त राशि का रिफंड पूरी तरह ऑटोमेटिक होगा और इसमें अधिकारी की जरूरत नहीं होगी.
साल में एक बार रिटर्न
छोटे कारोबारियों के लिए एक वैकल्पिक सिस्टम को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है. इसके तहत 5 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाला ऐसा टैक्सपेयर्स जो केवल ग्राहकों को माल या सेवा देता है, साल में एक बार रिटर्न दाखिल कर सकेगा और हर तिमाही कर जमा करेगा. औसतन 1.05 करोड सक्रिय टैक्सपेयर्सओं में से 16.85 लाख ऐसे टैक्सपेयर्स हैं जो केवल इस तरह की आपूर्ति करते हैं.
इनमें 16.66 लाख यानी 99 फीसदी का कारोबार 5 करोड रुपये से कम है. इन सभी की कर देनदारी GST के तहत बताई गई कुल कर देनदारी के 1 फीसदी से भी कम है. इस सिस्टम का विस्तृत ढांचा और जरूरी बदलाव अगली परिषद की बैठक में लाए जाएंगे.
सही खरीदार के ITC पर फैसला
सही खरीदार को इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC का लाभ मिले, इसके लिए अधिकारियों की एक समिति बनाई जाएगी. इसमें ऐसे खरीदार के मामले पर विचार होगा जिसके पास सही चालान है, उसे माल मिल चुका है और उसने सप्लायर को पूरा पेमेंट कर दिया है. समिति तीन महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करेगी. इसके बाद अगली GST परिषद की बैठक में इस मामले को रखा जाएगा. इसका उद्देश्य ऐसे खरीदारों को राहत देने के तरीके पर विचार करना है जिन्होंने अपनी तरफ से सभी जरूरी शर्तें पूरी की हैं.
निर्यातकों को भी मिलेगा फायदा
सर्विस एक्सपोर्ट से जुडे़ नियमों में भी बदलाव किया गया है. अगर कोई भारतीय कंपनी अपने विदेशी ग्राहक को अपनी ही विदेशी शाखा के जरिए सर्विस देती है तो उसे निर्यात का लाभ मिलेगा. इसके रास्ते में आने वाली मौजूदा कानूनी शर्त को हटाया जा रहा है. इसके अलावा विदेशी ग्राहक के गुड्स पर देश में टेस्टिंग, रिपेयर, सर्टिफिकेशन, रिसर्च और प्रोसेसिंग जैसे सर्विस भी सर्विस एक्सपोर्ट मानी जाएंगी, भले ही माल देश से बाहर न जाए.
कॉन्ट्रैक्ट ऑन मैन्युफैक्चरिंग और प्रोसेसिंग के लिए भी भारत को दूसरे कंपटीटर देशों के बराबर कर सिस्टम देने की बात कही गई है. एक्सपोर्ट पेमेंट कब प्राप्त माना जाएगा, यह भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के आधार पर तय होगा.
GST की दरों में कोई बदलाव नहीं
57वीं GST परिषद की बैठक में किसी भी GST दर में बदलाव नहीं किया गया है. दरों से जुडे मामलों की समीक्षा अब साल में एक बार होने वाली विशेष बैठक में की जाएगी. इस बैठक में पिछले साल की दरों में बदलाव के बाद बची विसंगतियों और अस्पष्टताओं (Inconsistencies and ambiguities) को दूर करने पर ध्यान दिया गया है.
यानी इस बार GST की दरें नहीं बदली गई हैं, बल्कि GST 2.0 को आसान बनाने के लिए प्रक्रिया में बदलाव किए गए हैं. रजिस्ट्रेशन से लेकर रिफंड, ITC, ऑनलाइन कारोबार और निर्यात तक इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य कारोबारियों के लिए टैक्स सिस्टम को आसान बनाना है.