Heineken बीयर कंपनी को सता रहा डर, वजन घटाने वाली दवाओं से घट सकती है बिक्री

वजन घटाने वाली Ozempic और Wegovy जैसी दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल से बीयर कारोबार पर असर पड़ने की आशंका है. Heineken ने ब्रिटेन के पब और बार को छोटी सर्विंग और कम अल्कोहल वाले विकल्प बढ़ाने की सलाह दी है. अमेरिका के आंकड़ों में GLP-1 दवाएं लेने वाले परिवारों का बीयर पर खर्च दो साल बाद करीब 13.5% कम पाया गया.

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वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएं अब सिर्फ हेल्थ और फार्मा इंडस्ट्री ही नहीं, बल्कि बीयर कारोबार के लिए भी चिंता का विषय बन रही हैं. दुनिया की प्रमुख बीयर कंपनियों में शामिल Heineken को आशंका है कि Ozempic और Wegovy जैसी दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल से लोगों की शराब पीने की इच्छा और खपत कम हो सकती है. कंपनी ने ब्रिटेन के पब और बार संचालकों को ग्राहकों की बदलती आदतों के हिसाब से अपने कारोबार में बदलाव करने की सलाह दी है.

GLP-1 दवाओं से क्यों बढ़ी बीयर कंपनियों की चिंता?

GLP-1 ऐसी दवाओं का एक समूह है, जिनका इस्तेमाल टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे के इलाज में किया जाता है. Ozempic और Wegovy इसी समूह की चर्चित दवाएं हैं. ये दवाएं भूख और खाने की इच्छा को कम करने में मदद कर सकती हैं. कुछ लोगों में इनके इस्तेमाल के दौरान शराब पीने की इच्छा भी घटती देखी गई है.

बीयर कंपनियों के लिए चिंता की बात यह है कि अगर ग्राहक कम शराब पीते हैं या पहले के मुकाबले कम मात्रा में बीयर खरीदते हैं, तो इससे बिक्री और कारोबार पर असर पड़ सकता है.

पब और बार को क्या सलाह दे रही है कंपनी?

कंपनी ने ब्रिटेन के पब और बार संचालकों को ग्राहकों की बदलती पसंद के मुताबिक अपने मेन्यू और सर्विंग के तरीके में बदलाव करने का सुझाव दिया है. इसमें आधे पिंट वाली छोटी सर्विंग, कम अल्कोहल वाले पेय और बिना अल्कोहल वाले विकल्पों को बढ़ावा देना शामिल है.

इसके अलावा, ग्राहकों को छोटे स्नैक्स के साथ ड्रिंक परोसने की सलाह भी दी गई है. मकसद यह है कि ग्राहक कम मात्रा में पेय लेने के बावजूद पब और बार में आएं और वहां खर्च करना जारी रखें.

कंपनी का मानना है कि बदलती उपभोक्ता आदतों को समझना जरूरी है. वह साल 2027 तक GLP-1 दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों के व्यवहार पर नजर रखेगी.

अमेरिका में बीयर पर खर्च 13.5% घटा

अमेरिका में किए गए बाजार विश्लेषण से भी शराब की खपत में बदलाव के संकेत मिले हैं. रिसर्च फर्म Circana के आंकड़ों के मुताबिक, GLP-1 दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों वाले परिवारों ने दो साल के उपचार के बाद उन परिवारों की तुलना में शराब पर हर महीने करीब 7% कम खर्च किया, जिनमें इन दवाओं का इस्तेमाल करने वाला कोई सदस्य नहीं था.

बीयर पर खर्च में यह गिरावट करीब 13.5% रही. हालांकि, खर्च में कमी का मतलब यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति ने शराब पीना बंद कर दिया हो. यह आंकड़े परिवारों के खर्च में बदलाव दिखाते हैं.

क्या पूरी शराब इंडस्ट्री पर पड़ेगा असर?

वजन घटाने वाली दवाओं का संभावित असर बीयर और शराब उद्योग के लिए एक नई चुनौती है. हालांकि, सभी कंपनियां इस खतरे को एक जैसी नजर से नहीं देख रही हैं. कुछ कंपनियों का मानना है कि अभी उपलब्ध आंकड़ों से यह तय करना मुश्किल है कि इन दवाओं का व्यापक स्तर पर शराब की बिक्री पर कितना असर पड़ेगा.

विशेषज्ञों के अनुसार, इन दवाओं का दिमाग में भूख और इनाम से जुड़े तंत्र पर असर शराब की इच्छा को भी प्रभावित कर सकता है. इस विषय पर अभी और शोध की जरूरत है.

कंपनियों के लिए बदलती पसंद को समझना जरूरी

बीयर कारोबार के सामने अब चुनौती सिर्फ कीमत और प्रतिस्पर्धा की नहीं है. ग्राहक कम मात्रा में पीना चाहते हैं या कम अल्कोहल वाले विकल्प चुनते हैं, तो कंपनियों को भी अपने उत्पादों और बिक्री की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है.

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि वजन घटाने वाली दवाएं वैश्विक बीयर बाजार को कितना प्रभावित करेंगी. लेकिन शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि स्वास्थ्य से जुड़े नए रुझान पेय पदार्थों की कंपनियों के लिए कारोबार का अहम मुद्दा बनते जा रहे हैं.

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