शिफ्टिंग में डैमेज हुआ AC-फ्रिज, महिला ने मांगा ₹7.75 लाख का मुआवजा; अब कंपनियों पर आया बड़ा फैसला

दिल्ली से नागालैंड सामान भेजने वाली महिला के 93 में से 23 आइटम गायब हो गए और कई सामान टूटे मिले. कंज्यूमर कमीशन ने पैकर्स एंड मूवर्स को 3 लाख और Urban Company को 50,000 रुपये देने का आदेश दिया.

डैमेज सामान

Highlights

  • महिला ने सामान शिफ्ट कराने के लिए 1.15 लाख रुपये दिए, लेकिन 93 में से 23 आइटम नहीं मिले और कई सामान टूटे हुए पहुंचे.
  • आयोग ने पैकर्स एंड मूवर्स को 3 लाख रुपये और Urban Company को 50,000 रुपये देने का निर्देश दिया.
  • सामान भेजने से पहले लिखित एग्रीमेंट, हस्ताक्षर वाली इन्वेंट्री, लॉरी रसीद की तस्वीरें जरूर सुरक्षित रखें.

घर का सामान एक शहर से दूसरे शहर भेजने के लिए लोग अक्सर पैकर्स एंड मूवर्स की मदद लेते हैं. लेकिन अगर सामान तय समय पर न पहुंचे, कई चीजें गायब हो जाएं और कुछ टूट जाएं, तो परेशानी बढ़ जाती है. ऐसा ही मामला दिल्ली से नागालैंड जाने वाली एक महिला के साथ हुआ. महिला ने घर का सामान शिफ्ट कराने के लिए 1.15 लाख रुपये दिए, लेकिन उसे पूरा सामान नहीं मिला. कई चीजें टूटी हुई भी पहुंचीं. इसके बाद महिला ने कंज्यूमर कमीशन का दरवाजा खटखटाया.

ET Wealth की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मामले में पैकर्स एंड मूवर्स को खराब सेवा देने का जिम्मेदार माना.

क्या है पूरा मामला?

सितंबर 2020 में Longchar नाम की महिला ने दिल्ली से नागालैंड के दीमापुर तक अपना घरेलू सामान पहुंचाने के लिए Urban Company के जरिए पैकर्स एंड मूवर्स की सेवा बुक की थी. सामान में घरेलू उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, फर्नीचर, फिटिंग्स और उनकी कार शामिल थी. महिला के मुताबिक, सामान लोड करते समय कंपनी ने परिवहन के दौरान किसी भी सामान के नुकसान या टूट-फूट की जिम्मेदारी लेने की बात कही थी. कंपनी ने दो हफ्ते के भीतर सामान पहुंचाने का भरोसा भी दिया था.

हालांकि, सामान तय समय पर नहीं पहुंचा. महिला को अपनी कार 23 अक्टूबर 2020 को मिली, जबकि घर का बाकी सामान 19 नवंबर 2020 को पहुंचा यानी उसे सामान के लिए करीब एक महीने तक इंतजार करना पड़ा.

93 में से सिर्फ 70 सामान मिले

महिला को सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब सामान की गिनती करने पर पता चला कि कुल 93 आइटम में से सिर्फ 70 ही पहुंचे थे. इस तरह उसके 23 आइटम गायब थे. इसके अलावा, महिला ने आरोप लगाया कि उसका एयर कंडीशनर (AC) टूटकर पहुंचा था और उसकी मरम्मत संभव नहीं थी. LED TV भी खराब हालत में मिला. सामान खोलने पर क्रॉकरी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बिजली से जुड़े कई सामान टूटे हुए मिले.

महिला के मुताबिक, जब उसने पैकर्स एंड मूवर्स से इसकी शिकायत की, तो कंपनी ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय दूसरों पर जिम्मेदारी डाल दी. काफी मशक्कत के बाद कंपनी ने खराब AC के लिए 25,000 रुपये देने पर सहमति जताई. साथ ही, बाकी सामान के नुकसान की भरपाई करने का भरोसा दिया. महिला को बताया गया कि बचे हुए 23 आइटम कूरियर से भेज दिए जाएंगे, लेकिन उसके मुताबिक वे सामान आज तक नहीं पहुंचे.

महिला ने 7.75 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की

पूरा सामान नहीं मिलने और कई चीजें खराब होने के बाद महिला ने दक्षिण दिल्ली जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई. उसने कुल 7.75 लाख रुपये की राहत मांगी थी. इसमें 1.15 लाख रुपये की रकम वापस करने, 4 लाख रुपये मुआवजे, आर्थिक नुकसान के लिए 1.50 लाख रुपये, मानसिक तनाव और परेशानी के लिए 50,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 60,000 रुपये की मांग शामिल थी.

Urban Company ने क्या दलील दी?

मामले में पैकर्स एंड मूवर्स और Urban Company को नोटिस जारी किए गए थे. हालांकि, पैकर्स एंड मूवर्स की ओर से कोई पेश नहीं हुआ. Urban Company ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि वह घर से जुड़ी सेवाओं के लिए एक ऐसा ऑनलाइन मंच उपलब्ध कराती है, जहां स्वतंत्र थर्ड पार्टी सेवा प्रदाता ग्राहकों को सेवाएं देते हैं. कंपनी ने दलील दी कि उसे किसी रकम का पेमेंट करने या उसकी भरपाई करने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए.

लेकिन आयोग ने महिला की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों पर गौर किया. इनमें Urban Company की वेबसाइट पर संबंधित पैकर्स एंड मूवर्स की 4.45 की सर्विस रेटिंग भी शामिल थी. आयोग ने माना कि महिला ने इस रेटिंग को देखकर सेवा चुनने का फैसला किया हो सकता है. आयोग ने Urban Company की इस दलील को स्वीकार नहीं किया कि वह सिर्फ एक ऑनलाइन मध्यस्थ है और इसलिए उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती. आयोग के मुताबिक, इस मामले में प्लेटफॉर्म को अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता.

कंज्यूमर कमीशन ने क्या फैसला सुनाया?

आयोग ने पाया कि महिला को AC और LED TV खराब हालत में मिले थे और उसके कई घरेलू सामान गायब थे. इसे सेवा में गंभीर कमी मानते हुए आयोग ने मुआवजे का आदेश दिया.

आयोग के निर्देश के मुताबिक:

  • पैकर्स एंड मूवर्स को 3 लाख रुपये देने होंगे. यह रकम खराब सेवा, टूटे और गायब घरेलू सामान के लिए मुआवजे के तौर पर दी जानी है.
  • Urban Company को 50,000 रुपये देने होंगे. यह रकम मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और मुकदमे के खर्च के लिए है.
  • दोनों कंपनियों को आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर संबंधित रकम का भुगतान करना होगा.

यहां ध्यान देने वाली बात है कि आयोग ने महिला की ओर से मांगे गए पूरे 7.75 लाख रुपये देने का आदेश नहीं दिया. आदेश में पैकर्स एंड मूवर्स के लिए 3 लाख रुपये और Urban Company के लिए 50,000 रुपये का भुगतान तय किया गया.

महिला को केस जीतने में किन दस्तावेजों से मदद मिली?

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में सामान की सूची यानी इन्वेंट्री अहम सबूत बनी. सामान लोड करते समय पैकर्स एंड मूवर्स ने अपने लेटरहेड पर 93 आइटम की सूची तैयार की थी. उसमें सामान की स्थिति भी अच्छी दर्ज की गई थी. इस दस्तावेज से यह साबित करने में मदद मिली कि कंपनी को कितने सामान सौंपे गए थे और लोड करते समय उनकी हालत कैसी थी. इसके बाद कंपनी को 23 गायब आइटम और टूटे सामान के बारे में जवाब देना था.

इसके अलावा, बुकिंग का कन्फर्मेशन, 115000 रुपये के पेमेंट का सबूत और सामान की तस्वीरों ने भी महिला के दावे को मजबूत किया. रिपोर्ट में Accord Juris के मैनेजिंग पार्टनर Alay Razvi के हवाले से बताया गया कि Urban Company की वेबसाइट पर दी गई 4.45 की सर्विस रेटिंग ने भी गलत या भ्रामक प्रस्तुति के आधार पर अनुचित व्यापार व्यवहार से जुड़ी आयोग की टिप्पणी में भूमिका निभाई.

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