क्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की नौकरियों पर AI का ज्यादा खतरा? रिसर्च में हुआ खुलासा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से महिलाओं की नौकरियों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ रही है. ILO की रिसर्च के मुताबिक, उच्च आय वाले देशों में करीब हर 10 में से एक कामकाजी महिला ऐसे पेशे में है, जहां AI का जोखिम सबसे ज्यादा है. जानें किन कामों पर खतरा है और क्या नई नौकरियां इस नुकसान की भरपाई कर पाएंगी.

नौकरियों पर एआई का प्रभाव Image Credit: AI

Highlights

  • ILO की रिसर्च के मुताबिक, उच्च आय वाले देशों में करीब हर 10 में से एक कामकाजी महिला ऐसे पेशे में है, जहां AI का जोखिम सबसे ज्यादा है.
  • अमेरिका में ऑटोमेटेड टेलीफोन सिस्टम आने के बाद करीब 75,000 ऑपरेटर नौकरियां खत्म हुई थीं.
  • AI से कुछ नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन नई नौकरियां और तकनीकी कौशल कुछ कर्मचारियों के लिए अवसर भी पैदा कर सकते हैं.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से क्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की नौकरियों पर ज्यादा खतरा है? इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) की मार्च में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, हाई इनकम वाले देशों में करीब हर 10 में से एक कामकाजी महिला ऐसे पेशे में है, जहां AI का असर पड़ने का जोखिम सबसे ज्यादा है. महिलाओं की बड़ी संख्या प्रशासनिक, क्लेरिकल और रोजमर्रा के ऑफिस के कामों से जुड़ी है, जिन्हें AI के जरिए ऑटोमेट किया जा सकता है.

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी महिलाओं की नौकरियां खत्म हो जाएंगी. हालांकि, यहां से जरूर संकेत मिलता है कि तकनीकी बदलाव का असर आने वाले समय में देखने को मिल सकता है. कुछ लोगों के लिए AI नए अवसर पैदा कर सकता है, जबकि दूसरे कर्मचारियों को अपनी नौकरी, वेतन और करियर की सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है.

AI से महिलाओं की नौकरियों पर ज्यादा खतरा क्यों?

रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं की बड़ी संख्या प्रशासनिक काम-काज, रिकॉर्ड रखने, डेटा प्रोसेसिंग और रोजमर्रा के ऑफिस कार्यों से जुड़ी है. AI इन कामों को तेजी से करने में सक्षम हो रहा है. ऐसे में इन सेक्टर्स में काम करने वाले कर्मचारियों पर ऑटोमेशन का दबाव बढ़ सकता है.

रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि, AI का इस्तेमाल नियमित कामों, आंकड़ों और पैटर्न की पहचान के लिए हो रहा है. ये ऐसे काम हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं काम करती हैं. सचिव और क्लेरिकल कर्मचारियों में अब भी करीब 90 फीसदी महिलाएं हैं. नौकरियों पर खतरा सिर्फ कर्मचारियों की छंटनी तक सीमित नहीं है. तकनीक के कारण किसी पेशे में काम कम होने पर कर्मचारियों को कम वेतन वाली नौकरी स्वीकार करनी पड़ सकती है या उन्हें रोजगार बाजार से बाहर होना पड़ सकता है.

टेलीफोन ऑपरेटर की नौकरियों से क्या सीख मिलती है?

AI के संभावित असर को समझने के लिए टेलीफोन ऑपरेटरों का उदाहरण अहम है. अमेरिका में 1940 के दशक में टेलीफोन ऑपरेटरों में करीब 95 फीसदी महिलाएं थीं. इस काम के लिए ट्रेनिंग, तेजी और सटीकता की जरूरत होती थी. उस समय महिलाओं के लिए यह अपेक्षाकृत अच्छी कमाई वाला पेशा था.

बाद में ऑटोमेटेड टेलीफोन स्विचिंग सिस्टम आने से ऑपरेटरों की जरूरत कम होने लगी. इस तकनीकी बदलाव के कारण पहले से काम कर रहे कई ऑपरेटरों की नौकरियां और करियर खत्म हो गए. करीब 75,000 ऑपरेटर नौकरियां खत्म हो गईं. कई अनुभवी कर्मचारियों को कम वेतन वाले कामों में जाना पड़ा या उन्होंने काम करना छोड़ दिया. हालांकि, कम उम्र की महिलाओं के लिए नए क्षेत्रों में रोजगार तलाशना अपेक्षाकृत आसान रहा.

क्या AI नई नौकरियां पैदा करके नुकसान की भरपाई कर पाएगा?

AI के भविष्य को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे पैदा होने वाली नई नौकरियां उन कर्मचारियों को रोजगार दे पाएंगी, जिनकी मौजूदा नौकरियां ऑटोमेशन से प्रभावित होंगी. इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि नई नौकरियों में वेतन और करियर की संभावनाएं पहले जैसी हों.

तकनीकी बदलाव का असर सभी कर्मचारियों पर एक जैसा नहीं पड़ता. जिन लोगों के पास ज्यादा शिक्षा है और जो नई तकनीक का इस्तेमाल करना जानते हैं, उन्हें इससे फायदा मिल सकता है. दूसरी ओर, नियमित और आसानी से ऑटोमेट होने वाले कामों पर निर्भर कर्मचारियों के लिए जोखिम बढ़ सकता है. महिलाओं की उच्च शिक्षा और मैनेजर जैसे पदों पर बढ़ती भागीदारी उन्हें कुछ हद तक सुरक्षा दे सकती है. लेकिन AI अब अधिक जटिल पेशेवर कामों में भी इस्तेमाल होने लगा है. इससे प्रभावित होने वाले पेशों का दायरा बढ़ सकता है.

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