कनॉट प्लेस में आंदोलन से कारोबार पर संकट! 3 हफ्ते से ठप बिक्री, व्यापारी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली के कनॉट प्लेस में पिछले तीन हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शनों के कारण कारोबार और रोजी-रोटी प्रभावित होने की चिंता व्यापारियों ने जताई है. नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन ने प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. एसोसिएशन ने राजनीतिक दलों और प्रदर्शनकारियों से कनॉट प्लेस के बजाय किसी दूसरी जगह प्रदर्शन करने की अपील की है.
Highlights
- दिल्ली के कनॉट प्लेस में विरोध प्रदर्शनों को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है.
- बिक्री और रोजी-रोटी पर असर का हवाला देते हुए नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
- कारोबारियों की मांग है कि प्रदर्शन के लिए कोई दूसरी जगह चुनी जाए.
कनॉट प्लेस में आज शाम 5 बजे प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है. न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने राजनीतिक दलों और आंदोलनकारियों से अपील की है कि वे प्रदर्शन कनॉट प्लेस से दूर करें. संगठन का कहना है कि बीते तीन हफ्तों के प्रदर्शनों से बिक्री पर असर पड़ा है और लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हुई है. व्यापारियों के इस संगठन ने आज शाम 5 बजे के प्रस्तावित मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है. उसने प्रदर्शनों और पाबंदियों का कारोबार पर पड़ रहे असर को देखते हुए राहत मांगी है.
इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने व्यापारियों की आशंकाओं पर सफाई दी है. उन्होंने कहा कि कारोबार को नुकसान शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से नहीं, बल्कि तब होता है जब सरकार पूरा शहर बंद कर देती है.
कनॉट प्लेस के कारोबारियों को किस बात की चिंता?
नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन ने गुरुवार को राजनीतिक दलों और प्रदर्शन करने वाले समूहों से अपील की थी कि वे कनॉट प्लेस के बजाय किसी दूसरे स्थान पर प्रदर्शन करें. NDTA के मुताबिक, पिछले तीन हफ्तों में CJP और INDIA ब्लॉक के प्रदर्शनों के कारण दुकानदारों, वेटरों, ड्राइवरों, रेहड़ी-पटरी वालों और कारोबार पर निर्भर दूसरे लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है.
व्यापारियों का कहना है कि सड़कों के बंद होने और यातायात बाधित होने से लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई है. इसके अलावा, पर्यटकों और परिवारों के कनॉट प्लेस नहीं पहुंचने से कारोबार पर भी असर पड़ा है. एसोसिएशन ने राजनीतिक दलों से व्यावसायिक गतिविधियों को बाधित करने के बजाय प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगह चुनने की मांग की है.
CJP ने कारोबार पर असर के लिए सरकार को ठहराया जिम्मेदार
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन से कारोबार को नुकसान नहीं होता. उनके मुताबिक, कारोबार तब प्रभावित होता है, जब सरकार पूरे शहर को बंद करने, इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने और नागरिकों की आवाजाही सीमित करने जैसे कदम उठाती है. दिपके ने कहा कि सरकार से जवाब मांगना, अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन करना और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों से सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहने वाले लोग विपक्ष में रहते हुए प्रदर्शनों को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा मानने लगते हैं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार असहमति की आवाज दबाने के लिए पाबंदियों और पुलिस कार्रवाई का इस्तेमाल कर रही है. दिपके के मुताबिक, चुनाव में वोटों की गिनती के साथ लोकतंत्र खत्म नहीं हो जाता और चुनी हुई सरकार की जिम्मेदारी लोगों की बात सुनना है.
CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना अभियान शुरू किया है. संगठन ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है. 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में प्रवेश करने के बाद CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया गया था. इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जिससे आंदोलन और तेज हो गया.
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर से निर्धारित विरोध स्थल का दर्जा वापस ले लिया था. इसके बाद CJP ने सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज लहराकर इस फैसले को चुनौती देने का कदम उठाया. दिपके ने दावा किया कि मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में CJP के प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे. उन्होंने जयपुर में खुद पर हमला होने का भी आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई नहीं की, क्योंकि शारीरिक बल का इस्तेमाल संगठन के सिद्धांतों के खिलाफ है.
मार्च से पहले दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
CJP के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए मध्य दिल्ली में बड़े स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है. PTI के मुताबिक, नई दिल्ली इलाके में दिल्ली पुलिस के 6,000 से ज्यादा जवान, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 220 कंपनियां और विस्तारित CCTV नेटवर्क तैनात किए गए हैं. सुरक्षा व्यवस्था में कनॉट प्लेस, राजीव चौक, सेंट्रल पार्क, जंतर-मंतर, पालिका बाजार, आसपास के मेट्रो स्टेशन और अन्य संवेदनशील स्थान शामिल हैं. कनॉट प्लेस, पटेल चौक, ITO और संसद मार्ग समेत कई जगहों पर बैरिकेडिंग की गई है.
नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए 16 और 17 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क बंद रखने का आदेश दिया है. पुलिस का कहना है कि कनॉट प्लेस निर्धारित विरोध स्थल नहीं है. यहां सभाओं पर प्रतिबंध लगाने वाले आदेश भी लागू किए गए हैं. हालांकि, पुलिस ने संकेत दिया है कि किसी उपयुक्त स्थान पर छोटे समूह को राष्ट्रीय ध्वज लहराने और राष्ट्रगान गाने की अनुमति देने की व्यवस्था की जा सकती है.
इससे पहले दिपके ने आशंका जताई थी कि मार्च से पहले पुलिस उन्हें हिरासत में ले सकती है. उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी उनके आवास पर नजर रख रहे हैं. दिपके ने यह भी कहा था कि वह राष्ट्रीय ध्वज लहराने के लिए जेल जाने को तैयार हैं.
कारोबार के लिहाज से क्यों अहम है यह मामला?
कनॉट प्लेस दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल है. यहां दुकानें, रेस्तरां और दूसरे कारोबार बड़ी संख्या में ग्राहकों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही पर निर्भर करते हैं. ऐसे में सड़कें बंद होने, यातायात बाधित होने और सुरक्षा प्रतिबंधों से ग्राहकों की पहुंच प्रभावित हो सकती है. NDTA ने पिछले तीन हफ्तों के प्रदर्शनों से बिक्री और आजीविका प्रभावित होने की बात कही है. वहीं, CJP के संस्थापक का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कारोबार को नुकसान पहुंचाने की वजह नहीं हैं.
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में कारोबार को हुए कुल आर्थिक नुकसान का कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है. ऐसे में नुकसान की वास्तविक रकम बताना संभव नहीं है. लेकिन व्यापारियों की शिकायतों और प्रस्तावित मार्च के मद्देनजर कनॉट प्लेस में कारोबार, यातायात और ग्राहकों की आवाजाही पर पड़ने वाला असर अहम मुद्दा बना हुआ है.
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