Jio IPO: 1 लाख करोड़ रुपये के मुनाफे पर बैठी हैं मेटा और गूगल, लेकिन कोई नहीं बेच रहा शेयर, क्या है माजरा?
मेटा और गूगल ने 2020 में जियो में कुल मिलाकर लगभग 77,310 करोड़ रुपये का निवेश किया था. IPO प्राइस बैंड के अपर लेवल पर, उनकी हिस्सेदारी की वैल्यू लगभग 1.77 लाख करोड़ रुपये हो सकती है. इस फंड जुटाने की प्रक्रिया में ग्लोबल बिजनेस और फाइनेंस जगत की कुछ सबसे बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया था.
Highlights
- गूगल के पास 69.09 करोड़ शेयर हैं. इनकी निवेश वैल्यू लगभग 33,737 करोड़ रुपये है.
- मेटा और गूगल ने 2020 में जियो में लगभग 77,310 करोड़ रुपये का निवेश किया था.
- मेटा और गूगल को जियो के शेयर 488.34 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर मिले थे.
जियो प्लेटफॉर्म लिमिटेड का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (Jio IPO) मार्केट में दाखिल होने वाला है. प्रस्तावित IPO प्राइस बैंड के अपर लेवल के आधार पर, मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. और गूगल को जियो प्लेटफॉर्म्स में 2020 में किए गए अपने निवेश से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का ‘पेपर प्रॉफिट हो सकता है. इनमें से कोई भी कंपनी अपना एक भी शेयर नहीं बेच रही है.
मेटा और गूगल नहीं बेच रहे शेयर
मेटा की ‘जादू होल्डिंग्स’ (Jaadhu Holdings) और ‘गूगल इंटरनेशनल’, जियो के प्रस्तावित 30,200 करोड़ रुपये के IPO में अपना कोई भी शेयर नहीं बेच रही हैं. इसके बजाय, इस इश्यू में 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे. इससे इन दोनों ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों की हिस्सेदारी तो बनी रहेगी, लेकिन उनके निवेश की वैल्यू काफी बढ़ जाएगी.
गूगल को होगा कितना फायदा?
IPO प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, 2020 में मेटा और गूगल को जियो के शेयर 488.34 रुपये प्रति शेयर के भाव पर अलॉट किए गए थे. IPO प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर, जियो के शेयरों की कीमत 1,119 रुपये तय की गई है. इसका मतलब है कि प्रति शेयर 630.66 रुपये का फायदा, यानी लगभग 129 फीसदी का रिटर्न.
मेटा का पेपर प्रॉफिट?
IPO से पहले की मौजूदा हिस्सेदारी के हिसाब से मेटा के पास 89.23 करोड़ शेयर हैं. इनका निवेश मूल्य (इन्वेस्टमेंट कॉस्ट) लगभग 43,573 करोड़ रुपये आंका गया है. 1,119 रुपये प्रति शेयर के भाव पर, इनकी कुल वैल्यू 99,846 करोड़ रुपये हो जाएगी, जिससे लगभग 56,272 करोड़ रुपये का ‘पेपर प्रॉफिट’ बनता है.
अनरियलाइज्ड गेन
गूगल के पास 69.09 करोड़ शेयर हैं. इनकी निवेश वैल्यू लगभग 33,737 करोड़ रुपये है. IPO प्राइस के हिसाब से, इनकी वैल्यू 77,307 करोड़ रुपये हो जाएगी, जिससे लगभग 43,569 करोड़ रुपये का ‘पेपर प्रॉफिट’ मिलेगा.
इस तरह, मेटा और गूगल ने 2020 में जियो में कुल मिलाकर लगभग 77,310 करोड़ रुपये का निवेश किया था. IPO प्राइस बैंड के अपर लेवल पर, उनकी हिस्सेदारी की वैल्यू लगभग 1.77 लाख करोड़ रुपये हो सकती है, जिससे उन्हें कुल मिलाकर लगभग 99,841 करोड़ रुपये का ‘अनरियलाइज्ड गेन’ (ऐसा मुनाफा जो अभी केवल कागजों पर है) हो सकता है.
कोविड के दौरान हुई थी डील
ये मुनाफे ‘मार्क-टू-मार्केट’ अनुमान हैं. जब तक ये निवेशक अपने शेयर बेच नहीं देते, तब तक उन्हें यह मुनाफा असल में नहीं मिलेगा. महामारी के दौर में लगाए गए दांव को अब पब्लिक मार्केट में वैल्यूएशन मिल गया है. साल 2020 के मध्य में, जब महामारी अपने चरम पर थी, तब रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जियो के लिए 20 अरब डॉलर जुटाए थे. भारत में यह एक अभूतपूर्व सौदा था.
इस फंड जुटाने की प्रक्रिया में ग्लोबल बिजनेस और फाइनेंस जगत की कुछ सबसे बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया. इनमें सिल्वर लेक मैनेजमेंट, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, मुबाडला इन्वेस्टमेंट कंपनी, जनरल अटलांटिक, सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और टीपीजी कैपिटल शामिल थे. इस निवेश का मुख्य आधार भारत के सबसे बड़े वायरलेस ऑपरेटर को एक व्यापक डिजिटल सर्विस प्लेटफॉर्म में बदलना था.
अन्य निवेशकों ने भी खरीदे थे शेयर
मेटा और गूगल को जियो के शेयर 488.34 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर मिले. वहीं, पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड, केकेआर (KKR), विस्टा इक्विटी पार्टनर्स और सिल्वर लेक जैसे अन्य निवेशकों को 549.31 रुपये प्रति शेयर की दर से शेयर आवंटित किए गए. 1,119 रुपये की कीमत पर, इन निवेशकों को प्रति शेयर 569.69 रुपये का फायदा हो रहा है, जो कि लगभग 104 फीसदी है.
IPO से पहले बताई गई होल्डिंग्स के आधार पर, जिन निवेशकों ने 549.31 रुपये प्रति शेयर की दर से शेयर खरीदे थे. उन्हें IPO प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कुल मिलाकर लगभग 67,133 करोड़ रुपये का ‘पेपर प्रॉफिट’ (कागजी मुनाफा) हो सकता है. इनमें पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड, केकेआर, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, सिल्वर लेक, मुबाडला, जनरल अटलांटिक और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी शामिल हैं.
जियो का लक्ष्य भारत का सबसे बड़ा IPO
जियो का ‘बुक बिल्ट इश्यू’ 21 अक्टूबर, 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद हो जाएगा. शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को फाइनल होने की उम्मीद है, और 28 अक्टूबर को NSE और BSE पर शेयरों की लिस्टिंग हो सकती है.
1,119 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर जियो प्लेटफॉर्म्स का वैल्यूएशन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये होगा. इस इश्यू के जरिए लगभग 30,213 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे, जो 2024 में हुंडई मोटर इंडिया के 27,900 करोड़ रुपये के ऑफर से अधिक है. इस तरह, यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है.
रकम का क्या करेगी कंपनी?
जुटाए गए फंड में से 27,500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने (डेट रीपेमेंट या प्रीपेमेंट) के लिए किया जाएगा. बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट कार्यों के लिए होगा. यह पूरी तरह से एक ‘प्राइमरी’ ऑफरिंग है. मेटा, गूगल, पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड, KKR, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स और सिल्वर लेक जैसे मौजूदा निवेशक इस इश्यू के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर नहीं निकल रहे हैं.
यह स्ट्रक्चर दो वजहों से महत्वपूर्ण है. इससे जियो को नई पूंजी (फ्रेश कैपिटल) मिलती है, जबकि शुरुआती निवेशकों को कंपनी की भविष्य की ग्रोथ में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने का मौका मिलता है. इसका मतलब यह भी है कि मौजूदा निवेशक अपने मुनाफे को भुनाने (कैश आउट करने) के लिए इस IPO का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.
किसकी कितनी हिस्सेदारी?
फिलहाल, जियो प्लेटफॉर्म्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज की 66.43% हिस्सेदारी है. मेटा के पास 9.98% और गूगल के पास 7.73% हिस्सेदारी है. मेटा की ‘जादू होल्डिंग्स’ (Jaadhu Holdings) के पास जियो के 892.28 मिलियन शेयर हैं, जबकि गूगल इंटरनेशनल के पास 690.85 मिलियन शेयर हैं. इन दोनों टेक्नोलॉजी कंपनियों के पास मिलकर जियो की प्री-इश्यू इक्विटी का 17.71% हिस्सा है.
IPO के कारण मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी (परसेंटेज के हिसाब से) कम हो जाएगी, क्योंकि कंपनी नए शेयर जारी कर रही है. हालांकि, उनके पास मौजूद शेयरों की कुल संख्या उतनी ही रहेगी, जब तक कि वे लिस्टिंग के बाद अपने शेयर बेच न दें.
जियो के लिए एक नया बेंचमार्क
10.3 लाख करोड़ रुपये के वैल्यूएशन के साथ, जियो प्लेटफॉर्म्स लिस्टिंग के बाद मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर भारत की चौथी सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनी बन जाएगी. यह ICICI बैंक, ICICI, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान यूनिलीवर से भी बड़ा होगा, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 16.3 लाख करोड़ रुपये है.
रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए, इस IPO से उसके टेलीकॉम और डिजिटल बिजनेस को बाजार में एक अलग वैल्यूएशन मिलने की उम्मीद है, जिससे इनकी वैल्यू सामने आएगी.
मेटा और गूगल के लिए, यह महामारी के दौरान लगाए गए दांव पर पब्लिक मार्केट के हिसाब से एक बड़ा मुनाफा (मार्क-अप) पाने का मौका है. उन्होंने तब निवेश किया था जब जियो अपने डिजिटल इकोसिस्टम को बढ़ाने के लिए पूंजी जुटा रहा था. IPO प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर, उनके इस निवेश की वैल्यू उनकी मूल लागत से दोगुनी से भी ज्यादा हो सकती है.
डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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