1977 में आया था रिलायंस का IPO, ₹1000 के निवेश से ₹52 लाख तक, अब पब्लिक मार्केट Jio के टेस्ट की बारी

Jio IPO: यह इश्यू 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,900 करोड़ रुपये के IPO को पीछे छोड़ देगा और भारत का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बन जाएगा. रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए, यह IPO वैल्यूएशन का पता लगाने का भी एक जरिया है.

जियो के आईपीओ का टेस्ट. Image Credit: money9live

Highlights

  • रिलायंस समूह जियो प्लेटफॉर्म्स का 30,200 करोड़ रुपये का IPO लेकर आ रहा है.
  • जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यूएशन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है.
  • रिलायंस के पहली बार मार्केट में कदम रखने के लगभग 50 साल बाद यह IPO आ रहा है.

Jio IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज के 1977 के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में किया गया 1,000 रुपये का निवेश आज लगभग 52 लाख रुपये का हो सकता है. इसमें जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के डीमर्जर (अलग होने) से मिले शेयर भी शामिल हैं. लगभग पांच दशक बाद, यह ग्रुप भारत के पब्लिक मार्केट में एक और बड़ा कदम उठा रहा है और देश का सबसे बड़ा आईपीओ लेकर आ रहा है. रिलायंस समूह जियो प्लेटफॉर्म्स का 30,200 करोड़ रुपये का IPO लेकर मार्केट में आ रहा है.

10.3 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन

प्रस्तावित प्राइस बैंड के अपर लेवल पर, जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यूएशन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है. पूरी तरह से नए शेयरों (फ्रेश इश्यू) से बने इस IPO में 27 करोड़ इक्विटी शेयर शामिल हैं. यह 21 अक्टूबर, 2026 को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को फाइनल होने की उम्मीद है, और 28 अक्टूबर को NSE और BSE पर इसकी लिस्टिंग हो सकती है.

यह इश्यू 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,900 करोड़ रुपये के IPO को पीछे छोड़ देगा और भारत का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बन जाएगा. रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए, यह IPO वैल्यूएशन का पता लगाने का भी एक जरिया है.

जियो में रिलायंस की हिस्सेदारी

फिलहाल, जियो प्लेटफॉर्म्स में RIL की हिस्सेदारी 66.43 फीसदी है, जबकि मेटा प्लेटफॉर्म्स और गूगल के पास क्रमशः 9.98% और 7.73% हिस्सेदारी है. इस लिस्टिंग से RIL के टेलीकॉम और डिजिटल बिजनेस के लिए मार्केट-बेस्ड वैल्यूएशन तय होगा, जिससे कंपनी के शेयरधारकों को फायदा मिलने की उम्मीद है.

IPO से मिलने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने (डेट रीपेमेंट या प्रीपेमेंट) के लिए किया जाएगा. बाकी बची रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट कामों के लिए होगा.

रिलायंस के पब्लिक मार्केट सफर में एक नया अध्याय

जियो का यह IPO, रिलायंस के पहली बार भारतीय इक्विटी मार्केट में कदम रखने के लगभग 50 साल बाद आ रहा है. 1977 में रिलायंस टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज का IPO सात गुना सब्सक्राइब हुआ था, और इसे भारत में इक्विटी निवेश के कल्चर की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है.

RIL ने 23 जनवरी, 1978 को BSE पर अपने इक्विटी शेयर लिस्ट कराए थे. उस समय, रिलायंस ने 10 रुपये फेस वैल्यू वाले शेयर पेश किए थे. इस तरह, 1,000 रुपये के निवेश से 100 शेयर खरीदे जा सकते थे.

100 से 4,096 शेयर

अगले कुछ दशकों में रिलायंस ने छह बार बोनस इश्यू की घोषणा की. गणना में इस्तेमाल किए गए बोनस इतिहास के आधार पर, बिना किसी अतिरिक्त निवेश के, वे शुरुआती 100 शेयर बढ़कर 4,096 शेयर हो गए होते. अगर हम मौजूदा शेयर की कीमत 1,160 रुपये मान लें, तो रिलायंस इंडस्ट्रीज की होल्डिंग की कीमत लगभग 47.5 लाख रुपये होगी.

यह वेल्थ क्रिएशन केवल मूल कंपनी के शेयरों तक ही सीमित नहीं रहा. 2023 में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के डीमर्जर (अलग होने) के कारण, रिलायंस के पात्र शेयरधारकों को फाइनेंशियल सर्विसेज कारोबार के शेयर मिले.

52 लाख रुपये की वेल्थ

इस डीमर्जर व्यवस्था के तहत, रिकॉर्ड डेट पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर रखने वाले पात्र शेयरधारकों को, उनके पास मौजूद हर एक शेयर के बदले जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का एक शेयर मिला. डीमर्जर से ठीक पहले की शेयरहोल्डिंग के आधार पर, शुरुआती निवेश से जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के 2,048 शेयर प्राप्त हुए.

इस तरह, रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 52 लाख रुपये बैठती है.

टेक्सटाइल से लेकर टेलीकॉम और डिजिटल सर्विसेज तक

रिलायंस इंडस्ट्रीज की शुरुआत दिग्गज उद्योगपति धीरूभाई अंबानी ने ‘मायनायलॉन लिमिटेड’ (Mynylon Limited) के नाम से की थी. कंपनी 8 मई 1973 को बनी थी, और बाद में मार्च 1977 में इसका नाम बदलकर ‘रिलायंस टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज लिमिटेड’ कर दिया गया. इसके बाद, जून 1985 में यह ‘रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड’ बन गई.

शुरुआत में कंपनी का काम मुख्य रूप से टेक्सटाइल और पॉलिएस्टर से जुड़े व्यवसायों पर केंद्रित था, लेकिन बाद में रिलायंस ने हाइड्रोकार्बन की खोज और उत्पादन, पेट्रोलियम रिफाइनिंग और मार्केटिंग, पेट्रोकेमिकल्स, एडवांस्ड मटीरियल और कंपोजिट, रिन्यूएबल एनर्जी, रिटेल, डिजिटल सेवाओं, और मीडिया व एंटरटेनमेंट के क्षेत्रों में अपना विस्तार किया.

‘जियो प्लेटफॉर्म्स’ (Jio Platforms) इस समूह के सबसे महत्वपूर्ण नए व्यवसायों में से एक है. इसका IPO टेलीकॉम और डिजिटल सर्विसेज के कारोबार को सीधे पब्लिक मार्केट में लाएगा और निवेशकों को इस प्लेटफॉर्म के लिए एक अलग वैल्यूएशन बेंचमार्क देगा.

वैल्यूएशन की कसौटी

10.3 लाख करोड़ रुपये के वैल्यूएशन के साथ, जियो प्लेटफॉर्म्स बाजार में उतरेगा. यह वैल्यूएशन न केवल इसके मौजूदा आकार को दिखाता है, बल्कि भविष्य में होने वाली ग्रोथ की उम्मीदों को भी दिखाता है. रिलायंस के पहले IPO ने एक टेक्सटाइल कंपनी को लंबे समय तक वेल्थ (संपत्ति) बनाने वाली एक बड़ी कहानी में बदल दिया था. अब, जियो का यह ऑफर समूह के टेलीकॉम और डिजिटल कारोबार को पब्लिक मार्केट में एक नए बेंचमार्क के रूप में स्थापित करने का प्रयास है.

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