भारत-अमेरिका संबंधों की परीक्षा, क्या ट्रंप लगाएंगे 100% टैरिफ? 10 दिनों के भीतर हो सकता है बड़ा फैसला

अमेरिकी राजदूत ने कहा कि अब यह फैसला ट्रंप को लेना है. हालांकि 30 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर एक सार्थक और सकारात्मक बातचीत हुई थी. भारत जैसे देशों पर, जो रूस से तेल और गैस के बड़े खरीदार हैं, 100% तक शुल्क (टैरिफ) लगाया जा सकता है.

पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप Image Credit: Money9live

Highlights

  • रूस से तेल और गैस के बड़े खरीदार देशों पर 100% तक टैरिफ लग सकता है.
  • शनिवार से शुरू हो रही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारतीय यात्रा.
  • 30 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर बातचीत हुई थी.

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले 10 दिनों के भीतर ‘रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून’ (SRIA) पर फैसला ले सकते हैं. इस कानून के तहत, भारत जैसे देशों पर, जो रूस से तेल और गैस के बड़े खरीदार हैं, 100% तक शुल्क (टैरिफ) लगाया जा सकता है.

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए गोर ने बताया कि 18 सितंबर को लागू हुए इस कानून के तहत, इसे पारित होने के 30 दिनों के भीतर फैसला लेना अनिवार्य है.

क्या भारत को मिलेगी छूट?

जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत को कोई राहत या छूट मिल सकती है, तो अमेरिकी राजदूत ने कहा कि अब यह फैसला ट्रंप को लेना है. हालांकि 30 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर एक सार्थक और सकारात्मक बातचीत हुई थी.

शनिवार से शुरू हो रही अपनी भारत यात्रा के दौरान, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारतीय अधिकारियों के साथ होने वाली बातचीत में भी SRIA का मुद्दा प्रमुखता से उठने की उम्मीद है.

भारत-अमेरिका के रिश्ते तनावपूर्ण

भारत ने पिछले कुछ महीनों में कई बार अमेरिका को यह बताया है कि रूस से तेल खरीदने पर कोई भी शुल्क लगाने से दोनों देशों के आपसी संबंधों पर बुरा असर पड़ेगा. व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में देरी और अमेरिका-पाकिस्तान के बीच बढ़ते संबंधों के कारण भारत-अमेरिका के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं.

गोर ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका जल्द ही एक व्यापार समझौते पर पहुंच जाएंगे. उन्होंने बताया कि लगभग डेढ़ साल से चल रही जटिल बातचीत के बावजूद, दोनों देशों ने काफी प्रगति की है.

संबंधों का विस्तार

उन्होंने कहा, ‘बड़ी रूपरेखा, मुख्य ढांचा और बड़े मुद्दे तय हो चुके हैं.’ उन्होंने आगे कहा कि बाकी बचे मुद्दों में छोटी-छोटी बातें और नई चिंताएं शामिल हैं, जो बातचीत आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकती हैं. गोर ने आगे बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के 6-3 के फैसले के बाद प्रशासन ने व्यापार समझौते के कुछ हिस्सों पर फिर से विचार किया.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ के तहत ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ गैर-कानूनी थे. कोर्ट के अनुसार, ये टैरिफ कांग्रेस के पास मौजूद टैक्स लगाने के विशेष अधिकार का उल्लंघन करते थे और संविधान के खिलाफ थे.

भारत-अमेरिका संबंधों की परीक्षा

राजदूत ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, डेटा सेंटर और चिप निर्माण जैसे कई क्षेत्रों में व्यापारिक सहयोग बढ़ाना चाहता है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी कंपनियों द्वारा भारत में किया गया निवेश, अमेरिका में रोजगार पैदा करने में मदद कर सकता है.

भारत-अमेरिका संबंधों की एक और परीक्षा राष्ट्रपति ट्रंप के उन बार-बार किए गए दावों से हो रही है, जिनमें उन्होंने कहा है कि मई 2025 में उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में मदद की थी. यह घटना 22 अप्रैल के हमले के जवाब में भारत द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सीमा पार किए गए हमलों के कुछ दिनों बाद हुई थी.

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