Tata Group विवाद: मेहली मिस्त्री ने नोएल टाटा की पात्रता पर उठाए सवाल, ट्रस्ट्स ने कहा- उनके पास कोई अधिकार नहीं

Tata Group Controversy: दिवंगत रतन टाटा के करीबी रहे मिस्त्री का कार्यकाल पिछले साल 28 अक्टूबर को खत्म हो गया था. इसलिए बाद में ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठाने का उनके पास कोई कानूनी आधार नहीं है. मिस्त्री ने दावा किया कि बाई हीराबाई बोर्ड में ऐसे ट्रस्टी हैं जो नियुक्ति के लिए अयोग्य हैं.

मेहली मिस्त्री Image Credit: @Canva/Money9live

Highlights

  • ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठाने का मिस्त्री के पास कोई कानूनी आधार नहीं है.
  • मिस्त्री के पक्ष को हलफनामों का जवाब देने के लिए 5 नवंबर तक का समय दिया गया.
  • नोएल टाटा के पात्रता मानदंडों को पूरा करने पर उठाया गया सवाल.

Tata Group Controversy: टाटा ट्रस्ट्स के तहत आने वाले दो नॉन-प्रॉफिटेबल संगठनों ने गुरुवार को मेहली मिस्त्री के इस अधिकार पर सवाल उठाया है कि वे उनके कामकाज को लेकर चिंताएं क्यों जता रहे हैं. सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन ने चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय को बताया है कि दिवंगत रतन टाटा के करीबी रहे मिस्त्री का कार्यकाल पिछले साल 28 अक्टूबर को खत्म हो गया था. इसलिए बाद में ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठाने का उनके पास कोई कानूनी आधार नहीं है.

हितों के टकराव का आरोप

खबरों के अनुसार, मिस्त्री ने चैरिटी कमिश्नर से संपर्क कर इन दोनों ट्रस्टों में प्रशासन संबंधी कमियों और हितों के टकराव (Conflicts of Interest) का आरोप लगाया है, साथ ही उनके निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं.

चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय में दाखिल अलग-अलग हलफनामों में, दोनों ट्रस्टों ने कहा है कि मिस्त्री का कार्यकाल तीन साल के लिए तय था. उन्होंने तर्क दिया कि वे अपनी पुरानी ट्रस्टीशिप का इस्तेमाल ट्रस्ट के प्रशासन और कामकाज को चुनौती देने के लिए नहीं कर सकते.

चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय से कहा गया है कि मिस्त्री की आपत्तियों के गुण-दोष की जांच करने या किसी जांच का आदेश देने से पहले, उन्हें ट्रस्टों द्वारा उठाई गई ‘सुनवाई की पात्रता’ (Maintainability) और ‘अधिकार क्षेत्र’ (jurisdiction) संबंधी आपत्तियों पर फैसला लेना चाहिए.

मिस्त्री की मांग क्यों नहीं मानी जा सकती?

SDTT ने कहा कि SDTT, सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और बाई हीराबाई – ये तीनों अलग-अलग पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट हैं. इनके अपने अलग-अलग नियम, बोर्ड, संपत्तियां और खाते हैं. इसलिए, मिस्त्री की उस मांग को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, जिसमें उन्होंने इन सभी मामलों की एक साथ सुनवाई करने को कहा है.

अपने हलफनामे में बाई हीराबाई ट्रस्ट ने मिस्त्री द्वारा अपनी ‘ट्रस्ट डीड’ (Trust Deed) की धारा 6 और 18 की व्याख्या को चुनौती दी है. ये धाराएं धर्म और निवास के आधार पर ट्रस्टी बनने की पात्रता से जुड़ी हैं. ट्रस्ट का तर्क है कि ये शर्तें उस मूल वसीयत (Will) और उसमें किए गए संशोधनों (Codicil) के खिलाफ हैं, जिनके आधार पर ट्रस्ट चलता है, इसलिए इन्हें लागू नहीं किया जाना चाहिए.

मिस्त्री के पक्ष को इन हलफनामों का जवाब देने के लिए 5 नवंबर तक का समय दिया गया है.

मिस्त्री ने दायर किया आवेदन

इसके अलावा, इस साल की शुरुआत में विजय सिंह के ट्रस्टी पद से हटने के बाद, बाई हीराबाई ट्रस्ट ने एक आवेदन दाखिल किया है. इसमें उन्होंने नोएल टाटा को उस मामले में ‘रिपोर्टिंग ट्रस्टी’ बनाने का अनुरोध किया है, जो ट्रस्ट के कामकाज को लेकर मिस्त्री की शिकायतों से जुड़ा है.

मिस्त्री ने गुरुवार को एक आवेदन दायर किया, जिसमें उन्होंने बाई हीराबाई से एक हलफनामा देने को कहा है. इस हलफनामे में यह बताया जाना चाहिए कि नोएल टाटा पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं.

आवेदन में क्या कहा गया है?

मिस्त्री ने अपने आवेदन में कहा, ‘यह निवेदन है कि डिप्टी चैरिटी कमिश्नर यह सुनिश्चित करें कि इस आवेदन के जरिए जिन्हें रिपोर्टिंग ट्रस्टी (नोएल) के रूप में नियुक्त करने का प्रस्ताव है, वे 07.12.1923 की ट्रस्ट डीड की धारा 6 और 18 के अनुसार एक योग्य ट्रस्टी हों. इन धाराओं में अन्य बातों के अलावा यह भी कहा गया है कि ट्रस्टी का पारसी होना और जोरोस्ट्रियन (पारसी) धर्म का पालन करने वाला होना जरूरी है.’

मिस्त्री का दावा

मिस्त्री ने दावा किया कि बाई हीराबाई बोर्ड में ऐसे ट्रस्टी हैं जो नियुक्ति के लिए अयोग्य हैं, क्योंकि वे ट्रस्ट डीड में तय किए गए मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं. ट्रस्ट डीड के अनुसार, ट्रस्टी को मुंबई या नवसारी का स्थायी निवासी होना चाहिए और ज़ोरोस्ट्रियन पारसी धर्म का अनुयायी होना चाहिए.

इस बीच, एक अलग सुनवाई में SRTT ने चैरिटी कमिश्नर को उन चुनौतियों के बारे में बताया जिनका सामना उसे करना पड़ रहा है. दरअसल, 15 मई को आए कार्यालय के एक आदेश के कारण SRTT कोई भी बैठक आयोजित नहीं कर सकता है.

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