लोन चुकाने के बाद भी क्रेडिट रिपोर्ट में दिख रहा एक्टिव? ऐसे कराएं गलती ठीक, जानें पूरा तरीका

लोन की आखिरी किस्त चुकाने और बैंक से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट मिलने के बाद भी अगर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में अकाउंट एक्टिव दिख रहा है या बकाया रकम दर्ज है, तो इसे नजरअंदाज न करें. इससे नए लोन के आवेदन पर असर पड़ सकता है. जानें क्रेडिट रिपोर्ट में गलती सुधारने के लिए क्या करना चाहिए.

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Highlights

  • लोन चुकाने के बाद भी क्रेडिट रिपोर्ट में एक्टिव स्टेटस दिखे, तो सबसे पहले क्लोजर लेटर, नो-ड्यूज सर्टिफिकेट और भुगतान की रसीद जांचें.
  • बैंक से जानकारी अपडेट कराने के बाद भी गलती बनी रहे, तो संबंधित क्रेडिट ब्यूरो की आधिकारिक वेबसाइट पर डिस्प्यूट दर्ज करें.
  • शिकायत का समाधान न होने पर बैंक की शिकायत प्रक्रिया और पात्रता के अनुसार RBI के शिकायत प्रबंधन सिस्टम का सहारा लिया जा सकता है.

अगर आपने अपना पर्सनल लोन, कार लोन या कोई दूसरा कर्ज पूरी तरह चुका दिया है, लेकिन क्रेडिट रिपोर्ट में वह अब भी चालू दिख रहा है, तो परेशानी हो सकती है. बैंक और वित्तीय संस्थान नए लोन का आवेदन जांचते समय क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज कर्ज और पेमेंट का रिकॉर्ड देखते हैं. ऐसे में पुराने लोन का एक्टिव स्टेटस या बकाया बैलेंस आपकी मौजूदा देनदारी को वास्तविकता से ज्यादा दिखा सकता है और नए लोन की प्रक्रिया में देरी हो सकती है.

हालांकि, कई बार यह जानकारी अपडेट होने में देरी के कारण भी हो सकता है. इसलिए सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि लोन वास्तव में बंद हो चुका है या बैंक के रिकॉर्ड में अब भी कोई प्रक्रिया बाकी है.

सबसे पहले लोन बंद होने के दस्तावेज जांचें

क्रेडिट रिपोर्ट में गलती सुधारने के लिए सबसे पहले लोन क्लोजर लेटर, नो-ड्यूज सर्टिफिकेट या ऐसा स्टेटमेंट देखें, जिसमें बकाया रकम शून्य दिखाई गई हो. आखिरी किस्त की रसीद और बैंक खाते का स्टेटमेंट भी संभालकर रखें. ये दस्तावेज इस बात का सबूत हैं कि आपने लोन चुका दिया है.

अगर आपने पूरा कर्ज चुकाने के बजाय एकमुश्त समझौते के तहत पेमेंट किया है, तो क्रेडिट रिपोर्ट में अकाउंट का स्टेटस ‘Settled’ दिख सकता है. ‘Settled’ और ‘Closed’ का मतलब एक जैसा नहीं है. इसलिए यह जांचना जरूरी है कि लोन देने वाली संस्था के साथ आपका समझौता किस शर्त पर हुआ था.

सिक्योर्ड लोन के मामले में कुछ अलग औपचारिकताएं भी पूरी करनी पड़ सकती हैं. उदाहरण के लिए, कार लोन चुकाने के बाद वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) से हाइपोथिकेशन हटवाना पड़ सकता है. यह प्रक्रिया क्रेडिट रिपोर्ट में लोन का स्टेटस ठीक कराने से अलग है.

बैंक या लोन देने वाली कंपनी से करें संपर्क

अगर लोन बंद होने के बावजूद क्रेडिट रिपोर्ट में वह एक्टिव दिख रहा है, तो बैंक या फाइनेंस कंपनी के आधिकारिक कस्टमर केयर, शाखा या शिकायत माध्यम से संपर्क करें. शिकायत में लोन अकाउंट नंबर, लोन बंद होने की तारीख और भुगतान से जुड़े दस्तावेज दें.

बैंक से लिखित में पुष्टि मांगें कि लोन बंद हो चुका है और सही जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को भेज दी गई है. शिकायत का रेफरेंस नंबर, ईमेल और सभी दस्तावेजों की कॉपी अपने पास रखें. अगर बैंक सिर्फ मौखिक आश्वासन देता है, तो उससे लिखित जवाब और जानकारी अपडेट होने की संभावित तारीख भी मांगें.

Credit Bureau की वेबसाइट पर दर्ज करें शिकायत

अगर बैंक से संपर्क करने के बाद भी क्रेडिट रिपोर्ट में गलती बनी रहती है, तो संबंधित क्रेडिट ब्यूरो की आधिकारिक वेबसाइट पर विवाद दर्ज करें. शिकायत करते समय उस लोन अकाउंट को चुनें, जिसमें गलती है. इसके बाद गलत जानकारी की पहचान करें, जैसे अकाउंट का स्टेटस एक्टिव दिखना या बकाया रकम दर्ज होना. जहां दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा हो, वहां लोन क्लोजर लेटर या नो-ड्यूज सर्टिफिकेट भी जमा करें. शिकायत दर्ज होने के बाद मिलने वाला डिस्प्यूट नंबर संभालकर रखें.

आप दूसरे क्रेडिट ब्यूरो की रिपोर्ट भी जांच सकते हैं, क्योंकि अलग-अलग ब्यूरो की रिपोर्ट में एक ही लोन की जानकारी अलग हो सकती है. CIBIL के मुताबिक, विवाद का समाधान होने में करीब 30 दिन लग सकते हैं. हालांकि, वास्तविक समय लोन देने वाली संस्था के जवाब और मामले की जांच पर निर्भर करता है.

ध्यान रखें कि क्रेडिट ब्यूरो सिर्फ शिकायत मिलने के आधार पर किसी वास्तविक लोन रिकॉर्ड को हटा नहीं देता. वह संबंधित वित्तीय संस्था के साथ जानकारी की जांच करता है. विवाद सुलझने के बाद अपनी अपडेटेड क्रेडिट रिपोर्ट दोबारा जरूर देखें.

शिकायत का समाधान नहीं हो तो कहां करें शिकायत?

अगर बैंक या फाइनेंस कंपनी आपकी शिकायत का समाधान नहीं करती है, तो उसके औपचारिक शिकायत निवारण सिस्टम का इस्तेमाल करें. जरूरत पड़ने पर संबंधित नोडल अधिकारी से भी संपर्क किया जा सकता है. अगर निर्धारित अवधि में शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो मामले की प्रकृति और पात्रता के आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के शिकायत प्रबंधन सिस्टम के जरिए शिकायत की जा सकती है. इसके लिए RBI की लागू योजना और उसकी शर्तों को जांचना जरूरी है.

क्रेडिट रिपोर्ट ठीक कराने के नाम पर ऐसे एजेंटों को पैसे न दें, जो किसी वास्तविक लोन रिकॉर्ड को हटाने या क्रेडिट स्कोर बढ़ाने की गारंटी देते हैं. आधिकारिक माध्यमों से शिकायत करें और सभी दस्तावेज संभालकर रखें. अगर लोन पूरी तरह चुका दिया गया है, तो क्रेडिट रिपोर्ट में उसकी सही स्थिति दर्ज होनी चाहिए.

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