ईरान वॉर कैसे बदल रहा भारत के LPG इंपोर्ट का मैप; अमेरिका बना बड़ा सप्लायर; क्या अब कम होगा दबाव?

India LPG Import: ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई में रुकावटों से पर्शियन गल्फ से सप्लाई पर अधिक निर्भरता का जोखिम भारत के सामने आ गया. अब देश तेजी से अपने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) इंपोर्ट के स्रोतों में डायवर्सिफिकेशन ला रहा है.

एलपीजी सप्लाई Image Credit: AI/canva

India LPG Import: ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग से दुनिया का एनर्जी मार्केट उबल गया. सप्लाई में आई बाधा से कीमतें खौल उठीं और खाड़ी के तेल पर निर्भर देशों में एनर्जी का संकट पैदा हो गया. ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई में रुकावटों से पर्शियन गल्फ से सप्लाई पर अधिक निर्भरता का जोखिम भारत के सामने आ गया. इसके बाद भारत ने तेजी से अपनी रणनीति में बदलाव की तरफ कदम बढ़ा दिए. अब देश तेजी से अपने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) इंपोर्ट के स्रोतों में डायवर्सिफिकेशन ला रहा है.

इंपोर्ट में 20 फीसदी हिस्सेदारी

ब्लूमबर्ग न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका, जिसका पिछले साल भारत के LPG इंपोर्ट में सिर्फ 6 फीसदी हिस्सा था, अब देश का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है और उसका हिस्सा 20 फीसदी से अधिक हो गया है.

यह बदलाव भारत के LPG व्यापार के तरीके में एक बड़ा बदलाव है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक देश है और पारंपरिक रूप से अपनी खाना पकाने की गैस का एक बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से मंगाता रहा है.

लेकिन संघर्ष और उसके कारण क्षेत्रीय व्यापार में आई रुकावटों ने भारतीय रिफाइनरियों को अमेरिका और अफ्रीका से वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश करने के लिए प्रेरित किया है.

भारतीय LPG बाजार में अमेरिका की पकड़ मजबूत

ब्लूमबर्ग न्यूज के अनुसार, पश्चिम एशिया के आपूर्तिकर्ताओं पर अपनी निर्भरता कम करने के प्रयासों के तहत भारत ने पिछले साल अमेरिका के साथ अपना पहला LPG आपूर्ति समझौता किया था. आपूर्ति में हालिया रुकावटें अब इस डायवर्सिफिकेशन लाने की प्रक्रिया को तेज कर रही हैं.

मामले से परिचित लोगों ने ब्लूमबर्ग न्यूज को बताया कि सरकारी भारतीय रिफाइनरियां इस महीने अमेरिका से आपूर्ति के लिए टेंडर जारी कर सकती हैं, जो अगले साल भारत के LPG आयात का 20 फीसदी तक हो सकता है.

इस तरह की खरीद से भारत के LPG बाजार में अमेरिका की भूमिका और मजबूत होगी और फारस की खाड़ी से आने वाली आपूर्ति का एक विकल्प मिलेगा. यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारतीय रिफाइनरियों ने घरेलू LPG उत्पादन भी बढ़ाया है.

उत्पादन बढ़कर लगभग 44,000 टन प्रतिदिन हो गया है, जो अगस्त के औसत से लगभग 20% अधिक है, क्योंकि त्योहारी सीजन में घरेलू मांग बढ़ी है और सप्लाई का जोखिम बना हुआ है.

खाड़ी में रुकावटें चिंता का विषय बनी हुई हैं

फारस की खाड़ी भारत के LPG का एक महत्वपूर्ण सोर्स बनी हुई है, लेकिन हालिया रुकावटों ने इस क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भरता के जोखिम को उजागर किया है.

ब्लूमबर्ग न्यूज के अनुसार, भारत पेट्रोलियम कॉर्प के लिए सितंबर का एक कार्गो और इंडियन ऑयल कॉर्प के लिए दो कार्गो, जो सभी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) से आने थे, नहीं लिए जा सके.

ADNOC ने संकेत दिया है कि वह अक्टूबर के लिए अपनी तय मात्रा की सप्लाई करेगा, जिसमें इंडियन ऑयल के लिए पांच कार्गो और भारत पेट्रोलियम तथा हिंदुस्तान पेट्रोलियम के लिए तीन-तीन कार्गो शामिल हैं. कंपनी ने कहा कि वह अपने भारतीय ग्राहकों को विश्वसनीय और सुरक्षित LPG आपूर्ति देना जारी रखे हुए है.

अलग-अलग सोर्स से सप्लाई की जरूरत बढ़ी

सप्लाई में रुकावटें ऐसे समय में आई हैं जब भारत में त्योहारों सीजन की शुरुआत हो रही है, जिसमें खपत की डिमांड काफी अधिक हो जाती है. सर्दियों में मांग बढ़ने से सप्लाई पर और दबाव पड़ सकता है.

हालांकि, गर्मियों में सप्लाई की फौरी कमी को दूर करने में अमेरिका और अफ्रीका से आए वैकल्पिक कार्गो ने मदद की थी, लेकिन हाल की घटनाओं से पता चलता है कि अलग-अलग स्रोतों से सप्लाई लेना भारत की LPG खरीद रणनीति का एक स्थायी हिस्सा बन सकता है.

क्या कम हो सकेगी निर्भरता?

इसलिए, भारत के लिए यह बदलाव सिर्फ सप्लाई में रुकावट वाले कार्गो को बदलने तक सीमित नहीं है. अमेरिका की बड़ी भूमिका देश के LPG आयात के मिश्रण को बदल सकती है. साथ ही उस क्षेत्र पर निर्भरता कम कर सकती है जो ऐतिहासिक रूप से खाना पकाने के ईंधन की सप्लाई चेन के लिए अहम रहा है.

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