IRDAI के नए प्रस्ताव से इंश्योरेंस स्टॉक्स में हाहाकार! 11% तक टूटा शेयर; HDFC Life से लेकर ICICI Pru Life तक लुढ़के
IRDAI के नए कंसल्टेशन पेपर के बाद इंश्योरेंस स्टॉक्स में तेज गिरावट देखने को मिली. Max Financial Services का शेयर 11% तक टूटा, जबकि ICICI Prudential Life और HDFC Life के शेयरों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई. IRDAI ने इंश्योरेंस सेक्टर में कमीशन, Expenses of Management यानी EoM और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को लेकर कई बदलाव प्रस्तावित किए हैं.
Highlights
- IRDAI के नए कंसल्टेशन पेपर के बाद Max Financial का शेयर 11% तक टूटा.
- ICICI Pru Life और HDFC Life में भी तेज गिरावट आई है.
- IRDAI इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए हैं.
Insurance Stocks: इंश्योरेंस स्टॉक्स में गुरुवार के कारोबार के दौरान भारी दबाव देखने को मिला. इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI की ओर से कमीशन, एक्सपेंसेज ऑफ मैनेजमेंट यानी EoM और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में बदलाव को लेकर कंसल्टेशन पेपर जारी किए जाने के बाद कई बड़ी इंश्योरेंस कंपनियों के शेयर्स में तेज गिरावट आई. कई कंपनियों के शेयर्स में 11% तक की गिरावट देखने को मिली. आइए आपको बताते हैं कि किन इंश्योरेंस कंपनियों के शेयर्स में गिरावट देखने को मिली.
मैक्स फाइनेंशियल में 11% तक गिरावट
गुरुवार के कारोबार में Max Financial Services का शेयर 11% तक गिरकर 1,390 रुपये के स्तर पर पहुंच गया. वहीं, ICICI Prudential Life Insurance Company का शेयर 7.62% गिरकर 448 रुपये के लो लेवल तक पहुंच गया. HDFC Life Insurance Company का शेयर 6.75% गिरकर 524.15 रुपये तक आ गया.
हालांकि, SBI Life Insurance Company का शेयर करीब 0.50% बढ़कर 1,769 रुपये पर कारोबार कर रहा था. Life Insurance Corporation of India यानी LIC का शेयर करीब 0.97% बढ़कर 411 रुपये पर कारोबार कर रहा था. वहीं, Star Health and Allied Insurance Company का शेयर 2.33% गिरकर 536.50 रुपये पर कारोबार कर रहा था.
IRDAI के कंसल्टेशन पेपर से क्यों गिरे इंश्योरेंस स्टॉक्स
इंश्योरेंस स्टॉक्स में गिरावट की बड़ी वजह IRDAI का नया कंसल्टेशन पेपर माना जा रहा है. इस पेपर में इंश्योरेंस सेक्टर में कमीशन और एक्सपेंसेज ऑफ मैनेजमेंट को लेकर कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं. कंसल्टेशन पेपर में लाइफ इंश्योरेंस के लिए EoM को मौजूदा 30% से घटाकर दो साल में GDPI का 15% और पांच साल में 12.5% करने का प्रस्ताव रखा गया है. वहीं, जनरल इंश्योरेंस और SAHI के मामले में EoM को पांच साल में GDPI के 20% तक लाने का प्रस्ताव है. मौजूदा व्यवस्था में यह सीमा 30% बताई गई है.
फर्स्ट-ईयर कमीशन में बड़ी कटौती का प्रस्ताव
IRDAI के कंसल्टेशन पेपर में लाइफ इंश्योरेंस के सेविंग्स और टर्म प्रोडक्ट्स के साथ-साथ हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस में फर्स्ट-ईयर कमीशन में बड़ी कटौती का प्रस्ताव भी रखा गया है. इसके अलावा, लोन प्रोडक्ट्स के साथ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की मैंडेटरी बंडलिंग पर रोक लगाने का प्रस्ताव है.
सिंगल प्रीमियम क्रेडिट लाइफ इंश्योरेंस में कमीशन को अधिकतम 2% तक सीमित करने का प्रस्ताव भी दिया गया है. हेल्थ इंश्योरेंस में रिन्यूअल्स और पोर्टिंग पर भी कमीशन को कम करने का प्रस्ताव है. कंसल्टेशन पेपर के मुताबिक, डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटीज के लिए यह कमीशन 5% और एजेंट्स के लिए 10% तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा गया है.
इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस पर पड़ेगा असर
IRDAI के प्रस्तावित बदलावों का सबसे बड़ा असर इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस पर पड़ सकता है. कमीशन में बड़ी कटौती होने से इंश्योरेंस एजेंट्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स और अन्य डिस्ट्रीब्यूशन चैनल्स की इकोनॉमिक्स बदल सकती है. Emkay Global के मुताबिक, प्रस्तावित रिफॉर्म का उद्देश्य मिस-सेलिंग जैसी समस्याओं को कम करना और इंश्योरेंस को ज्यादा अफोर्डेबल बनाना हो सकता है. हालांकि, ब्रोकरेज के अनुसार डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन में बड़ी कटौती से इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस के अनवायबल होने का जोखिम भी पैदा हो सकता है.
किन इंश्योरेंस कंपनियों पर कम असर पड़ सकता है
Bernstein के मुताबिक, LIC और SBI Life अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हो सकते हैं, क्योंकि इन कंपनियों में कॉस्ट स्ट्रक्चर कम है और एजेंसी तथा ULIP मिक्स ज्यादा है. ब्रोकरेज के मुताबिक, SBI Life, LIC और Star Health पर प्रस्तावित बदलावों का असर अन्य कंपनियों की तुलना में कम हो सकता है.
इंश्योरेंस कंपनियों के बिजनेस मॉडल में बदलाव संभव
IRDAI के प्रस्तावित कमीशन और EoM फ्रेमवर्क से इंश्योरेंस कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस मॉडल में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है. खास तौर पर उन कंपनियों पर ज्यादा असर पड़ सकता है, जिनके प्रोडक्ट्स और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में हाई कमीशन स्ट्रक्चर की भूमिका ज्यादा है.
प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में इंश्योरेंस कंपनियों को अपने डिस्ट्रीब्यूशन चैनल्स, एजेंट इकोनॉमिक्स, बैंकाश्योरेंस मॉडल और प्रोडक्ट मिक्स की समीक्षा करनी पड़ सकती है. हालांकि, अभी ये बदलाव फाइनल रूल्स नहीं हैं. IRDAI ने इन्हें कंसल्टेशन पेपर के रूप में पेश किया है.
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