Crypto में भारत का जलवा! एक साल में 340 अरब डॉलर का निवेश, एशिया में नंबर-1 बना देश
OECD की Asia Capital Markets Report 2026 के अनुसार, जून 2024 से जून 2025 के बीच भारत में 340 अरब डॉलर की क्रिप्टो एसेट इनफ्लो दर्ज की गई, जो देश के GDP के करीब 9 फीसदी के बराबर है. एशिया में भारत सबसे अधिक क्रिप्टो इनफ्लो वाला देश बनकर उभरा है. रिपोर्ट में स्टेबलकॉइन्स, ब्लॉकचेन गतिविधियों और क्रिप्टो मार्केट के तेजी से बढ़ते साइज का भी जिक्र किया गया है.
OECD Report 2026: भारत में क्रिप्टो एसेट्स को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है. OECD की एशिया कैपिटल मार्केट्स रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, जून 2024 से जून 2025 के बीच भारत में करीब 340 अरब डॉलर की क्रिप्टो एसेट इनफ्लो दर्ज की गई. यह आंकड़ा देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 9 फीसदी के बराबर है. खास बात यह है कि एशिया के प्रमुख देशों में भारत ने सबसे अधिक क्रिप्टो इनफ्लो दर्ज किया है. इसके बाद दक्षिण कोरिया का स्थान रहा.
OECD रिपोर्ट में क्या कहा गया
OECD की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और दक्षिण कोरिया ने जून 2024 से जून 2025 के बीच क्रिप्टो एसेट्स में सबसे अधिक इनफ्लो दर्ज किया. इसके बाद वियतनाम और इंडोनेशिया का स्थान रहा. वहीं, यदि GDP के अनुपात में देखा जाए, तो वियतनाम लगभग 50 फीसदी के साथ पहले स्थान पर रहा. इसके बाद कंबोडिया 28 फीसदी और पाकिस्तान 26 फीसदी के साथ सूची में शामिल हैं. रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए आंकड़े ब्लॉकचेन एनालिटिक्स कंपनी चेनालिसिस से लिए गए हैं. रिपोर्ट का उद्देश्य एशियाई देशों में क्रिप्टो गतिविधियों के साइज और निवेश रुझानों को समझना है.
क्या वास्तव में भारत में आया 340 अरब डॉलर
डिजिटल साउथ ट्रस्ट के संस्थापक सुधाकर लक्ष्मणाराजा के अनुसार, चेनालिसिस की इनफ्लो पद्धति को अक्सर गलत तरीके से समझा जाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंकड़ा उन ब्लॉकचेन एड्रेसेज से जुड़ी कुल क्रिप्टो ट्रांजैक्शंस को दिखाता है, जिन्हें भारत से जोड़ा गया है. इसका अर्थ यह नहीं है कि 340 अरब डॉलर की विदेशी पूंजी भारत में आई या देश से बाहर गई. इसमें घरेलू ट्रेडिंग, वॉलेट ट्रांसफर, पेमेंट्स और DeFi जैसी गतिविधियां भी शामिल हो सकती हैं. यानी यह आंकड़ा भारत में क्रिप्टो गतिविधियों के कुल साइज को दिखाता है, न कि वास्तविक विदेशी निवेश को.
क्रिप्टो पर अभी भी भारी Tax
भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर फिलहाल सख्त टैक्स व्यवस्था लागू है. क्रिप्टो एसेट्स से होने वाली आय पर 30 फीसदी टैक्स लगाया जाता है. इसके अलावा लागू सरचार्ज और 4 फीसदी सेस भी देना पड़ता है. इतना ही नहीं, अधिकांश क्रिप्टो ट्रांजैक्शंस पर 1 फीसदी TDS भी लागू है. उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी सख्त टैक्स व्यवस्था के बावजूद भारत में क्रिप्टो निवेशकों की संख्या और ट्रांजैक्शन वॉल्यूम लगातार बढ़ रहा है.
स्टेबलकॉइन्स की बढ़ रही हिस्सेदारी
OECD की रिपोर्ट में स्टेबलकॉइन्स के बढ़ते महत्व का भी उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, 25 मार्च 2026 तक दुनिया के पांच सबसे बड़े स्टेबलकॉइन्स का संयुक्त मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 300 अरब डॉलर तक पहुंच गया. यह कुल क्रिप्टो मार्केट का करीब 10 फीसदी हिस्सा है. वहीं, वर्ष 2025 के दौरान इन पांच प्रमुख स्टेबलकॉइन्स की कीमत 48 फीसदी बढ़ा है. विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेबलकॉइन्स का बढ़ता उपयोग क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स, डिजिटल फाइनेंस और DeFi इकोसिस्टम को और मजबूत कर सकता है.
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