SEBI ने दिया अनिल अंबानी को झटका, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सेटलमेंट के अनुरोध को किया खारिज
अरबपति मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी को पिछले 18 महीनों में रेगुलेटर और जांच एजेंसियों की कड़ी जांच का सामना करना पड़ा है. अनिल अंबानी के लिए सेटलमेंट का अनुरोध खारिज होने का यह दूसरा मामला है.
भारत के फाइनेंशियल मार्केट रेगुलेटर सेबी ने उद्योगपति अनिल अंबानी और उनके कॉरपोरेट ग्रुप की उन अर्जियों को खारिज कर दिया है, जिनमें कंपनी के लगभग 700 मिलियन डॉलर के फंड के गलत इस्तेमाल के आरोपों को सेटल करने की बात कही गई थी.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने डॉक्यूमेंट के आधार पर लिखा कि सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने पिछले हफ्ते उन अनुरोधों को खारिज कर दिया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि अंबानी और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर अंबानी से जुड़ी कंपनियों को गलत तरीके से 65.26 अरब रुपये (691 मिलियन डॉलर) ट्रांसफर किए थे.
फ्रीज हैं संपत्तियां
अरबपति मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी को पिछले 18 महीनों में रेगुलेटर और जांच एजेंसियों की कड़ी जांच का सामना करना पड़ा है. ग्रुप के कई अधिकारियों को धोखाधड़ी के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है और अनिल अंबानी की कुछ संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है. अधिकारियों ने गलत काम करने से इनकार किया है और मामले अभी भी अदालतों में हैं.
क्या है सेबी का आरोप?
रॉयटर्स द्वारा देखे गए दस्तावेजों से पता चलता है कि SEBI ने सितंबर में आरोप लगाया था कि अंबानी और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े ट्रांजैक्शन ‘कंपनी के फंड का गलत इस्तेमाल’ थे, क्योंकि वे पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए कॉरपोरेट मकसद पूरा करने के बजाय निजी फायदे के लिए हो सकते थे.
अनिल अंबानी ग्रुप के एक प्रवक्ता ने ईमेल में कहा, ‘आरोपों का पूरी तरह से खंडन किया जाता है. मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं और ग्रुप कानूनी सलाह के अनुसार अपना पक्ष रखना जारी रखेगा.’ SEBI ने टिप्पणी के लिए ईमेल से किए गए अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया.
नियमों का उल्लंघन
रेगुलेटर द्वारा सेटलमेंट के अनुरोधों को खारिज करने और उसके खास आरोपों की जानकारी पहले नहीं दी गई थी. रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने अक्टूबर में एक्सचेंज फाइलिंग में कहा था कि SEBI ने आरोप लगाया है कि उसने एक जुड़ी हुई कंपनी के साथ अपने फाइनेंशियल एक्सपोजर से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया है, हालांकि उसने इसकी डिटेल नहीं दी थी.
रॉयटर्स द्वारा देखे गए दस्तावेजों से पता चला कि सेटलमेंट की अर्जियों को खारिज करते हुए, SEBI ने भारत की फाइनेंशियल क्राइम और धोखाधड़ी की जांच करने वाली एजेंसियों सहित अन्य भारतीय जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही समानांतर जांच का हवाला दिया.
पिछले साल भी हुई थी सेटलमेंट की अर्जी खारिज
अनिल अंबानी के लिए सेटलमेंट का अनुरोध खारिज होने का यह दूसरा मामला है. SEBI ने पिछले साल भारत के यस बैंक में निवेश से जुड़े एक मामले में आरोपों को सेटल करने की उनकी अर्जी खारिज कर दी थी.
SEBI की सेटलमेंट प्रक्रिया
SEBI की सेटलमेंट प्रक्रिया के तहत, कोई कंपनी बिना गलती माने मामले को सेटल करने के लिए जुर्माना भर सकती है. अगर वह सेटलमेंट को खारिज कर देती है, तो SEBI आमतौर पर कथित उल्लंघनों का ब्योरा देते हुए एक विस्तृत सार्वजनिक आदेश जारी करता है, जिसके नतीजों में मौद्रिक जुर्माने से लेकर कैपिटल मार्केट तक पहुंच पर रोक तक शामिल हो सकती है.
कंपनियां और संस्थाएं ऐसे आदेशों के खिलाफ कोर्ट में अपील कर सकती हैं. रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर जनता से 30 अरब रुपये तक जुटाने के लिए बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद, फंड जुटाने की अहम प्रक्रिया के तहत बाजार का रुख कर रही है.
65.26 अरब रुपये के लेन-देन का खुलासा
कंपनी ने पहले इंजीनियरिंग कॉन्ट्रैक्टर CLE प्राइवेट लिमिटेड के साथ लगभग 65.26 अरब रुपये के लेन-देन का खुलासा किया था, जिसे उसने एक स्वतंत्र कंपनी बताया था. लेकिन SEBI ने फंड के बहुत बड़े लेन-देन का आरोप लगाया. SEBI का कहना है कि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने 176.7 अरब रुपये ($1.9 अरब) CLE को ट्रांसफर किए, जिसने बाद में 2024 तक के एक दशक में अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ADA ग्रुप से जुड़ी कंपनियों में कम से कम 112 अरब रुपये का निवेश किया.
दस्तावेजों के अनुसार, SEBI ने पाया कि CLE एक स्वतंत्र कंपनी होने के बजाय, ‘असल में रिलायंस ADA ग्रुप की कंपनी के तौर पर काम कर रही थी’ और इसे अंबानी व कुछ अन्य अधिकारी ‘अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित’ करते थे.
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