शेयर बाजार में 5 मिनट का बड़ा बदलाव! अब 3:15 से 3:20 बजे के बीच भी दे सकेंगे ऑर्डर; SEBI ने ब्रोकरों को दिया निर्देश
SEBI ने शेयर ब्रोकरों को 3:15 बजे से 3:20 बजे के पांच मिनट के ट्रांजिशन पीरियड में निवेशकों के ऑर्डर स्वीकार करने की व्यवस्था करने को कहा है. अभी इस दौरान ऑर्डर नहीं दिए जा सकते. बदलाव का मकसद Closing Auction Session में लिक्विडिटी और सही कीमत तय होने की प्रक्रिया को बेहतर करना है.
Highlights
- SEBI ने पांच मिनट के ट्रांजिशन पीरियड में निवेशकों के ऑर्डर स्वीकार करने की व्यवस्था करने को कहा है.
- भी इस दौरान ऑर्डर नहीं दिए जा सकते.
- इसका मकसद Closing Auction Session में लिक्विडिटी और सही कीमत तय होने की प्रक्रिया को बेहतर करना है.
शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बड़ा बदलाव हो सकता है. बाजार नियामक SEBI ने स्टॉक ब्रोकरों से कहा है कि वे शाम 3:15 बजे से 3:20 बजे तक के पांच मिनट के ट्रांजिशन पीरियड में भी निवेशकों के ऑर्डर स्वीकार करने की व्यवस्था करें. अभी इस समय निवेशक ऑर्डर नहीं दे पाते हैं.
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट, ब्रोकरों को सितंबर के पहले हफ्ते तक अपने ट्रेडिंग सिस्टम और प्रक्रियाओं में जरूरी बदलाव करने के लिए कहा गया है. यह बदलाव Closing Auction Session यानी CAS में ट्रांजिशन को आसान बनाने के लिए किया जा रहा है.
क्यों किया जा रहा है बदलाव?
CAS के तहत क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शाम 3:15 बजे से 3:35 बजे तक चलता है. पहले पांच मिनट यानी 3:15 से 3:20 बजे तक का समय ट्रांजिशन फेज के लिए रखा गया था. इस दौरान रेफरेंस प्राइस तय किया जाता है, जबकि ऑर्डर देने की औपचारिक प्रक्रिया 3:20 बजे शुरू होती है.
SEBI के नए निर्देश के बाद ब्रोकर इस पांच मिनट के दौरान भी निवेशकों के ऑर्डर स्वीकार कर सकेंगे. यानी निवेशकों को क्लोजिंग ऑक्शन के औपचारिक ऑर्डर एंट्री फेज से पहले ऑर्डर देने का एक और मौका मिलेगा.
सितंबर से बदल सकते हैं ट्रेडिंग सिस्टम
इस बदलाव को लागू करने के लिए ब्रोकरों को अपने फ्रंट-एंड ऐप, ऑर्डर मैनेजमेंट सिस्टम और दूसरी संबंधित प्रक्रियाओं में बदलाव करने होंगे. इसे सितंबर से लागू किए जाने की संभावना है. SEBI का मकसद नियमित ट्रेडिंग सेशन से नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम में बदलाव को आसान बनाना है. इसके साथ ही बाजार बंद होने के समय लिक्विडिटी और सही कीमत तय होने की प्रक्रिया को बेहतर करना है.
CAS में कब दे सकते हैं ऑर्डर?
मौजूदा व्यवस्था के तहत शाम 3:20 बजे से 3:25 बजे के बीच मार्केट और लिमिट, दोनों तरह के ऑर्डर दिए जा सकते हैं. इसके बाद 3:25 बजे से 3:30 बजे तक केवल लिमिट ऑर्डर की अनुमति होती है. शाम 3:30 बजे से 3:35 बजे के बीच ऑर्डर की मैचिंग होती है. इसके बाद शेयरों का क्लोजिंग प्राइस तय होता है.
पहले क्यों थी निवेशकों की परेशानी?
3:15 बजे से 3:20 बजे तक का पांच मिनट का ट्रांजिशन पीरियड ब्रोकरों के लिए चिंता का विषय बना हुआ था. इसकी वजह यह थी कि निवेशक इस दौरान ऑर्डर नहीं दे सकते थे. SEBI ने बाजार में लिक्विडिटी और कीमत तय होने की प्रक्रिया को लेकर उठी चिंताओं के बाद यह कदम उठाया है. नया Closing Auction Session 3 अगस्त से चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया था.
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