इंश्योरेंस ब्रोकर्स को नहीं भाया सरकार का आइडिया, 70 फीसदी तक घट जाएगी कमाई; 10 लाख नौकरी पर आएगा संकट
IRDAI के प्रस्तावित कमीशन नियमों का इंश्योरेंस ब्रोकर्स विरोध कर रहे हैं. IBAI का कहना है कि कमीशन पर सीमा लगने से ब्रोकर्स की कमाई 60 से 70 फीसदी तक घट सकती है और करीब 10 लाख नौकरियों पर संकट आ सकता है. वहीं, IRDAI का तर्क है कि बदलावों से डिस्ट्रीब्यूशन लागत घटेगी और पॉलिसीधारकों को बेहतर वैल्यू मिलेगी.
Highlights
- इंश्योरेंस ब्रोकर्स की कमाई 60 से 70 फीसदी तक घटने का दावा.
- करीब 10 लाख नौकरियों पर संकट की आशंका है.
- IRDAI का तर्क है कि बदलावों से डिस्ट्रीब्यूशन लागत घटेगी और पॉलिसीधारकों को बेहतर वैल्यू मिलेगी.
इंश्योरेंस ब्रोकर्स ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी IRDAI के इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े प्रस्तावित बदलावों का विरोध किया है. ब्रोकर्स का कहना है कि अगर कमीशन पर तय सीमा लागू की जाती है, तो उनकी कमाई में 60 से 70 फीसदी तक की कमी आ सकती है. इसके साथ ही करीब 10 लाख नौकरियों पर संकट पैदा हो सकता है.
IBAI ने इन प्रस्तावों को लेकर चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि इन बदलावों से इंश्योरेंस बेचने और बांटने के मौजूदा कारोबारी मॉडल पर असर पड़ सकता है और इंडस्ट्री में अनिश्चितता बढ़ सकती है. IBAI ने इस प्रस्ताव पर अपनी राय देने के लिए दिसंबर तक का समय मांगा है.
क्या है सरकार का आइडिया?
IRDAI ने सितंबर के आखिर में एक कंसल्टेशन पेपर जारी कर इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा था. रेगुलेटर ने कमीशन की रकम को इंश्योरेंस प्रोडक्ट की जटिलता और उसे बेचने में लगने वाली मेहनत से जोड़ने का प्रस्ताव दिया है.
इसके तहत ऐसे प्रोडक्ट्स के लिए कम कमीशन देने का प्रस्ताव है, जिन्हें बेचने में बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती. इसमें अनिवार्य इंश्योरेंस कवर, जैसे मोटर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस भी शामिल है. IRDAI का कहना है कि इन बदलावों का मकसद डिस्ट्रीब्यूशन लागत को कम करना और पॉलिसीधारकों के लिए इंश्योरेंस की वैल्यू को बेहतर बनाना है.
ब्रोकर्स की कमाई 70% तक घटने का दावा
IBAI ने प्रस्तावित बदलावों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि कमीशन की सीमा तय होने से इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन का पूरा कारोबारी गणित प्रभावित हो सकता है. संगठन के मुताबिक, इससे ब्रोकर्स, एजेंट्स और बैंकों को मिलने वाले कमीशन पर असर पड़ेगा और उनकी कमाई 60 से 70% तक घट सकती है.
IBAI के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार भरिंडवाल ने कहा है कि संगठन ने IRDAI से दिसंबर तक अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए और समय मांगा है. साथ ही, संगठन ने IRDAI से बिना किसी पब्लिश्ड इम्पैक्ट असेसमेंट के हार्ड कमीशन कैप लागू नहीं करने की अपील की है. IBAI का कहना है कि इस इम्पैक्ट असेसमेंट में पॉलिसीधारकों, रोजगार, सरकारी बीमा कंपनियों और विदेशी निवेश पर पड़ने वाले असर को शामिल किया जाना चाहिए.
IRDAI के आंकड़ों में क्या दिखता है?
IRDAI के आंकड़ों के मुताबिक, जनरल इंश्योरेंस ब्रोकर्स के जरिए दिए गए कमीशन में FY23 से FY25 के बीच 173 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसी अवधि में ब्रोकर्स के जरिए जुटाए गए प्रीमियम में 37% की बढ़ोतरी हुई. इस दौरान औसत कमीशन रेट भी 8.5% से बढ़कर 17% हो गया.
यानी IRDAI के आंकड़ों के मुताबिक, ब्रोकर्स के जरिए आने वाले प्रीमियम में बढ़ोतरी के साथ कमीशन की दर और कुल कमीशन में भी तेज बढ़ोतरी हुई है. इसी को देखते हुए रेगुलेटर डिस्ट्रीब्यूशन लागत और कमीशन स्ट्रक्चर में बदलाव करना चाहता है.
ग्राहकों को सस्ता इंश्योरेंस मिलेगा?
ब्रोकर्स के संगठन का तर्क है कि कमीशन कम होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि ग्राहकों के लिए इंश्योरेंस प्रीमियम भी कम हो जाएगा. IBAI का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों से डिस्ट्रीब्यूटर्स और इंश्योरेंस कंपनियों के कर्मचारियों की कमाई कम हो सकती है, लेकिन इंश्योरेंस कंपनियों के मालिकों की ओर इनकम ट्रांसफर हो सकती है. संगठन के मुताबिक, इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह जरूरी नहीं होगा कि कमीशन से होने वाली बचत का फायदा पॉलिसीधारकों को प्रीमियम कम करके दिया जाए.
कमीशन कैप से क्या नया संकट पैदा हो सकता है?
IBAI ने हार्ड कमीशन कैप लागू होने पर इसके संभावित गलत असर को लेकर भी चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि अगर कमीशन पर सख्त सीमा लगाई जाती है, तो कुछ इंश्योरेंस कंपनियां अतिरिक्त कमीशन को मार्केटिंग फीस या दूसरे पेमेंट के तौर पर दिखाने जैसी प्रथाओं का सहारा ले सकती हैं. ब्रोकर्स के मुताबिक, इससे वही प्रथाएं दोबारा सामने आ सकती हैं, जिन्हें रेगुलेटर खत्म करना चाहता है.
10 लाख नौकरियों पर क्यों बताया संकट?
IBAI का कहना है कि कमीशन में 60 से 70 फीसदी तक की संभावित कटौती से इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन का पूरा कारोबारी मॉडल प्रभावित हो सकता है. इसी वजह से संगठन ने करीब 10 लाख नौकरियों पर संकट की आशंका जताई है. हालांकि, यह IBAI की ओर से जताई गई आशंका है. दिए गए सोर्स में यह नहीं कहा गया है कि 10 लाख नौकरियां निश्चित तौर पर खत्म होंगी.
100% FDI के बीच बढ़ सकती है अनिश्चितता
IBAI ने इस प्रस्ताव को ऐसे समय में आने पर भी सवाल उठाया है, जब सरकार ने इंश्योरेंस सेक्टर में 100 फीसदी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश यानी FDI की अनुमति दी है. संगठन का तर्क है कि इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के कारोबार के नियमों में इतने बड़े बदलाव से मौजूदा और संभावित विदेशी निवेशकों के लिए रेगुलेटरी अनिश्चितता बढ़ सकती है.
इसे भी पढ़ें- क्या अभी और महंगा होगा सोना-चांदी? आयात पर खत्म होगी IGST छूट, 3% टैक्स लगाने की सिफारिश
फिलहाल IRDAI का प्रस्ताव कंसल्टेशन स्टेज में है. IBAI ने दिसंबर तक अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए और समय मांगा है. ऐसे में आखिरी नियम लागू होने से पहले इस प्रस्ताव पर इंडस्ट्री की आपत्तियों और IRDAI के अगले फैसले पर नजर रहेगी.
Latest Stories
बदलेगा कार इंश्योरेंस खरीदने का तरीका, IRDAI ने दिए नए प्रस्ताव; मिलेगा डिजिटल ऑप्शन
होम लोन के साथ लाइफ इंश्योरेंस लेना चाहिए या नहीं, फ्लैट और रिड्यूसिंग कवर में कौन बेहतर, जानें पूरी डिटेल
LIC का जलवा कायम, अगस्त में 56.5 फीसदी पहुंची NBP हिस्सेदारी; प्रीमियम में 45% की जोरदार ग्रोथ
