भारत-न्यूजीलैंड FTA आज से लागू, सेब-शहद और वाइन खरीदना होगा सस्ता? भारतीय सामानों को मिलेगी ड्यूटी-फ्री एंट्री
भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू हो रहा है. इससे भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100 फीसदी ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा. दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को करीब 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. कपड़ा, चमड़ा, दवाइयों, मशीनरी और कृषि उत्पादों के निर्यात में नए अवसर मिलने की उम्मीद है.

India-New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आज, 20 अक्टूबर से लागू हो रहा है. इस समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100 फीसदी ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा. दोनों देशों ने 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं में आपसी कारोबार को दोगुना करके करीब 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.
इस समझौते से भारतीय कारोबारियों, छोटे उद्योगों (MSMEs), महिला उद्यमियों, किसानों और कारीगरों को नए मौके मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा, अगले 15 साल में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है. इससे मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि और नई तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में अवसर पैदा हो सकते हैं.
कपड़ा, चमड़ा और फुटवियर जैसे सेक्टर को मिलेगा फायदा
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए इस समझौते से कई भारतीय उद्योगों को फायदा मिलने की उम्मीद है. कपड़ा, रेडीमेड कपड़े, चमड़ा और फुटवियर जैसे श्रम आधारित क्षेत्रों में 10 फीसदी तक के टैरिफ खत्म होने से भारतीय उत्पाद न्यूजीलैंड के बाजार में ज्यादा कंपटीशन हो सकते हैं. इसके अलावा, इंजीनियरिंग सामान, दवाइयों, मशीनरी, केमिकल और कृषि उत्पादों के निर्यात को भी बेहतर बाजार पहुंच मिलने की उम्मीद है. समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों पर पहले दिन से ही टैरिफ खत्म करेगा, बशर्ते वे तय शर्तों को पूरा करते हों.
हालांकि, भारत ने घरेलू किसानों और उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है. इनमें डेयरी उत्पाद, प्याज, चीनी, चना, मटर, मक्का, बादाम, कई तरह के फैट और तेल, रत्न एवं आभूषण, एल्युमीनियम, तांबा, हथियार और गोला-बारूद शामिल हैं.
न्यूजीलैंड के सेब और कीवी के लिए क्या है व्यवस्था?
समझौते में न्यूजीलैंड के सेब, कीवी और मनुका शहद को भारतीय बाजार में प्रवेश देने के लिए तय शर्तें रखी गई हैं. इसके तहत टैरिफ रेट कोटा, न्यूनतम आयात मूल्य और दूसरे सुरक्षा उपाय लागू होंगे. इनका मकसद घरेलू किसानों के हितों की रक्षा करना है.
इसके साथ ही, दोनों देश सेब, कीवी और शहद के उत्पादन में सुधार के लिए कृषि क्षेत्र में सहयोग करेंगे. इसमें नई तकनीक अपनाने, उत्पादकता बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को समझौते के लागू होने से जुड़े कार्यक्रम में कहा कि एक सफल मुक्त व्यापार समझौता संतुलित होना चाहिए और इससे दोनों देशों को फायदा मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि दशहरे के शुभ अवसर पर इसकी शुरुआत दोनों देशों की साझेदारी के भविष्य के लिए अच्छा संकेत है. गोयल ने इस समझौते को भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में एक अहम पड़ाव बताया.
वहीं न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने कहा कि इस समझौते से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भी फायदा होगा. उनके मुताबिक, समझौते के पूरी तरह लागू होने के बाद न्यूजीलैंड के मौजूदा निर्यात का 95 फीसदी हिस्सा टैरिफ खत्म होने या उनमें बड़ी कटौती का फायदा उठा सकेगा.
भारतीय छात्रों को मिलेगा वर्क वीजा
इस समझौते में भारतीय युवाओं के लिए भी प्रावधान किए गए हैं. न्यूजीलैंड में पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय युवाओं को तय अवधि के लिए ट्रेनिंग और काम करने की सुविधा देने वाला गारंटीड वर्क वीजा मिलेगा. पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय किसानों को फल, सब्जियों, मसालों और दूसरे कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी. इसके साथ ही, कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार करने और उनकी आजीविका मजबूत करने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे.
कारोबारियों के लिए आसान होगी कस्टम क्लीयरेंस प्रक्रिया
समझौते के तहत कार्गो की कस्टम क्लीयरेंस 48 घंटे के भीतर और एक्सप्रेस व जल्दी खराब होने वाले सामान की क्लीयरेंस 24 घंटे के भीतर करने का प्रावधान है. इसके अलावा, डिजिटल सर्टिफिकेशन और तय शर्तें पूरी करने वाले कारोबारियों को उत्पाद के मूल देश से जुड़े नियमों का खुद प्रमाण देने की सुविधा मिलेगी. इससे कागजी कार्रवाई, प्रक्रिया में लगने वाला समय और कारोबारियों की अनुपालन लागत कम करने में मदद मिल सकती है.
समझौते के तहत न्यूजीलैंड के कुछ उत्पादों पर भी टैरिफ में कटौती होगी. इनमें शहद, सेब, कीवी, दूध से मिलने वाले एल्ब्यूमिन सहित दूसरे एल्ब्यूमिन, वाइन, दवाइयां, पॉलिमर और एल्युमीनियम जैसे उत्पाद शामिल हैं. इन पर राहत तय शर्तों के मुताबिक लागू होगी.
दवाइयों और मशीनरी के निर्यात में बड़ी संभावनाएं
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए FTA से दवाइयों और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने की काफी गुंजाइश है. भारत ने 2024 में दुनियाभर में करीब 20 अरब डॉलर की दवाइयों का निर्यात किया था. लेकिन न्यूजीलैंड को भारत का दवा निर्यात सिर्फ 69 मिलियन डॉलर रहा, जबकि न्यूजीलैंड ने कुल 763 मिलियन डॉलर की दवाइयों का आयात किया.
इम्यूनोलॉजिकल उत्पादों के मामले में भी भारत के लिए अवसर मौजूद हैं. न्यूजीलैंड ने इस कैटेगरी में करीब 140 मिलियन डॉलर का आयात किया, लेकिन भारत से लगभग कोई खरीद नहीं की. वहीं, भारतीय निर्यातकों ने दुनियाभर में करीब 300 मिलियन डॉलर के ऐसे उत्पाद भेजे. मशीनरी के क्षेत्र में भी संभावनाएं हैं. न्यूजीलैंड ने करीब 60 मिलियन डॉलर के फोर्कलिफ्ट आयात किए, जबकि भारत का वैश्विक निर्यात 141 मिलियन डॉलर रहा. इसके बावजूद न्यूजीलैंड को भारत से इनकी आपूर्ति बेहद कम थी. अंगूर के मामले में न्यूजीलैंड ने 48.3 मिलियन डॉलर का आयात किया, लेकिन इसमें भारत की हिस्सेदारी बहुत कम रही.
आभूषण, कपड़े और प्लास्टिक उत्पादों को भी मिल सकता है फायदा
भारत के आभूषण, कपड़े और प्लास्टिक उत्पादों के निर्यात में भी बढ़ोतरी की संभावना है. न्यूजीलैंड के 108 मिलियन डॉलर के कीमती आभूषणों के आयात बाजार में भारत की हिस्सेदारी एक चौथाई से भी कम है. इसी तरह, न्यूजीलैंड के 95 मिलियन डॉलर के टी-शर्ट आयात बाजार में भारत की हिस्सेदारी करीब 10% है. वहीं, करीब 50 मिलियन डॉलर के प्लास्टिक प्लेट, शीट और फिल्म के आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 7% है.
FTA के तहत भारतीय उत्पादों पर टैरिफ खत्म होने से उन्हें दूसरे देशों के निर्यातकों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सकती है. इससे न्यूजीलैंड में भारतीय सामान की मांग और निर्यात बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं.
पश्चिम एशिया में व्यापार की बाधाओं के बीच मिलेगा नया बाजार
पश्चिम एशिया में व्यापार मार्गों पर आ रही बाधाओं के बीच भारत-न्यूजीलैंड FTA का महत्व और बढ़ गया है. अगर व्यापार मार्गों पर लंबे समय तक बाधाएं बनी रहती हैं और प्रभावित खाड़ी देशों में मांग की रिकवरी कमजोर रहती है, तो न्यूजीलैंड का आयात बाजार भारत के उन निर्यातों में से कम से कम 12% के लिए वैकल्पिक बाजार बन सकता है.
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