रुक गई इंडिया-US ट्रेड डील बातचीत, निर्मला सीतारमण बोलीं- हथियार की तरह इस्तेमाल हो रहा टैरिफ

नई दिल्ली में 'म्यूनिख लीडर्स मीटिंग' में चर्चा के दौरान सीतारमण ने कहा, 'समझौते और बातचीत अभी भी चल रही है, लेकिन हमें लगता है कि दोनों पक्ष एक ऐसे स्तर पर पहुंच गए हैं, जिसके आगे कुछ भी लेना-देना बहुत मुश्किल होगा.'

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो) Image Credit: PTI

भारत और अमेरिका के बीच होने वाली ट्रेड डील अब अटक गई है और फिलहाल इसके पूरे होने की संभावना लगभग खत्म ही नजर आ रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड एग्रीमेंट (व्यापार समझौते) को लेकर बातचीत एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां से आगे बढ़ना मुश्किल लग रहा है.

उन्होंने संकेत दिया कि इस समझौते के लिए पहले ही बहुत कड़ी और गहन बातचीत हो चुकी है, इसलिए अब दोनों में से किसी भी पक्ष के लिए और रियायतें देना मुश्किल हो सकता है.

कुछ भी लेना-देना बहुत मुश्किल

नई दिल्ली में ‘म्यूनिख लीडर्स मीटिंग’ में चर्चा के दौरान सीतारमण ने कहा, ‘समझौते और बातचीत अभी भी चल रही है, लेकिन हमें लगता है कि दोनों पक्ष एक ऐसे स्तर पर पहुंच गए हैं, जिसके आगे कुछ भी लेना-देना बहुत मुश्किल होगा.’

उन्होंने कहा कि अगर दोनों पक्षों को बातचीत में आगे बढ़ने की गुंजाइश मिलती है, तो अभी भी कुछ बदलाव हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि लेकिन शायद अगर गुंजाइश हो, अगर काम करने की जगह हो, तो दोनों पक्ष ऐसा कर सकते हैं.

व्यापार असंतुलन US के लिए मुख्य चिंता का विषय

सीतारमण ने कहा कि अमेरिका पारंपरिक बातचीत के अलावा अन्य तरीकों से भारत के साथ व्यापार असंतुलन को ठीक करने की कोशिश कर रहा है. देशों को व्यापार घाटा कम करने के लिए मजबूर करने के लिए टैरिफ (आयात शुल्क) का इस्तेमाल एक हथियार की तरह किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि यह पहले के तरीके से अलग है, जब बातचीत के जरिए व्यापार असंतुलन को ठीक किया जाता था और देश एक-दूसरे से ज्यादा मार्केट एक्सेस और रियायतें पाने के लिए बातचीत करते थे.

व्यापार घाटा कम करने की कोशिश

सीतारमण की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब भारत और अमेरिका एक ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत जारी रखे हुए हैं, जिसका मकसद मार्केट एक्सेस बढ़ाना और द्विपक्षीय व्यापार से जुड़ी चिंताओं को दूर करना है. उन्होंने कहा कि व्यापार संतुलन अमेरिका के लिए एक अहम मुद्दा बना हुआ है, जो भारत के साथ अपना घाटा कम करने की कोशिश कर रहा है.

उन्होंने कहा, ‘व्यापार संतुलन काफी हद तक हमारे पक्ष में है. जाहिर है, घाटा उनकी तरफ है, सारा संतुलन अमेरिका के प्रतिकूल जा रहा है. इसलिए वे उस असंतुलन को कम करना चाहेंगे.’

सीतारमण के अनुसार, अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन को ठीक करना चाहेगा और पिछले कुछ वर्षों में जो कुछ भी उसने खोया है, उसे वापस पाने की कोशिश करेगा.

उन्होंने कहा, ‘और उनकी इच्छा यह होगी कि वे ज्यादा से ज्यादा हासिल करें, अपने नजरिए से, उन सभी चीजों की भरपाई करें जो उन्होंने इन वर्षों में खोई हैं.

नेगोशिएशन प्लेटफॉर्म

सीतारमण ने कहा कि ट्रेड नेगोशिएशन से पारंपरिक रूप से देशों को अंतरों को सामने लाने और आपसी मार्केट एक्सेस के जरिए असंतुलन को ठीक करने की कोशिश करने की इजाजत मिली है.

उन्होंने कहा, ‘पहले नेगोशिएशन ही एकमात्र ऐसा प्लेटफॉर्म हुआ करता था जिसके जरिए देश अंतरों को सामने ला सकते थे, एकतरफापन को सामने ला सकते थे, और कह सकते थे कि क्या हम इसे ठीक करना चाहेंगे? और आप इसे कैसे ठीक करेंगे?’

इम्बैलेंस को दूर करने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल बढ़ रहा

फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि ट्रेड इम्बैलेंस का सवाल और भी मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि देश ऐसी कमियों को दूर करने के लिए पारंपरिक बातचीत से आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने इसकी तुलना भारत के चीन के साथ ट्रेड रिलेशनशिप से की, जहां 2014 से ट्रेड इम्बैलेंस काफी बढ़ गया है.

कब हुई थी बातचीत की शुरुआत?

ये बातचीत फरवरी 2026 में घोषित एक अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के आधार पर हो रही है. भारत के वाणिज्य मंत्रालय की ओर से 7 फरवरी को जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया था कि दोनों देश उस समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे और साथ ही एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत भी जारी रखेंगे. इन वार्ताओं की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 फरवरी, 2025 को की थी.

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