भारतीय क्रूड बास्केट $76 के पार, 10 दिन में $8 की तेजी; पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बढ़ी चिंता
भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत पिछले 10 दिनों में 8.07 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर 76.28 डॉलर पर पहुंच गई है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ने की आशंका है. इसका असर Oil Marketing Companies (OMCs), Aviation Turbine Fuel (ATF), उर्वरक उद्योग और चालू खाते के घाटे पर पड़ सकता है.

Indian Crude Basket: भारत के लिए कच्चे तेल का आयात एक बार फिर महंगा होता जा रहा है. पिछले 10 दिनों में भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 8.07 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर 68.21 डॉलर से 76.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच फिर बढ़े टकराव के चलते वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. इसका असर भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है. साथ ही, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की जो उम्मीद जताई जा रही थी, वह फिलहाल खत्म होती दिख रही है.
10 डॉलर की बढ़ोतरी से रोजाना 4.2 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त बोझ
एनर्जी रिसर्च फर्म Rystad Energy के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का क्रूड ऑयल आयात खर्च करीब 4.2 करोड़ डॉलर प्रतिदिन बढ़ जाता है. इससे देश का आयात बिल बढ़ने के साथ-साथ Oil Marketing Companies (OMCs), एयरलाइन कंपनियों और उर्वरक निर्माताओं पर भी लागत का दबाव बढ़ सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल OMCs के पास पहले से खरीदा गया स्टॉक मौजूद है, इसलिए तत्काल असर सीमित रह सकता है. हालांकि, यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है.
Hormuz Strait बना सबसे बड़ा जोखिम
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से Hormuz Strait को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है. यह समुद्री मार्ग भारत के लिए कच्चे तेल, LPG और LNG के आयात का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है. यदि यहां सप्लाई बाधित होती है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो भारत को महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है.
पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद खत्म
युद्धविराम के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की जो उम्मीद थी, वह अब लगभग खत्म हो गई है. यदि इस समय खुदरा ईंधन की कीमतों में कटौती की जाती है, तो OMCs को रोजाना नुकसान उठाना पड़ सकता है. सबसे पहले Aviation Turbine Fuel (ATF) और उर्वरक उद्योग पर लागत बढ़ने का असर दिखाई देगा. साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का सब्सिडी बिल 13 से 15 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है, जिससे चालू खाते का घाटा भी बढ़ने का खतरा रहेगा.
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