रेलवे कंटेनर ट्रांसपोर्टेशन में बड़े बदलाव की योजना, मिलेगी कई तरह छूट; अधिक एक्सपोर्ट आकर्षित करने की कोशिश
प्रक्रियाओं को आसान बनाने के साथ-साथ, रेलवे कम से कम 25 वैगनों वाली 'मिनी कंटेनर ट्रेनें' (Mini Container Rakes) भी शुरू करने की योजना बना रही है. रेलवे निजी क्षेत्र को वैगनों के मेंटेनेंस की अनुमति देने के प्रस्तावों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है.

Indian Railways Container: भारतीय रेलवे कंटेनर ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह से बदलने की योजना बना रही है, ताकि अधिक एक्सपोर्ट ट्रैफिक को आकर्षित किया जा सके. इसमें कई कदम शामिल हैं, जैसे कंटेनरों की अनिवार्य तौल (Weighing) जैसी प्रक्रियाओं को कम करना, महंगी वस्तुओं को ले जाने के लिए छोटी ट्रेनें (Rakes) चलाना, ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के तहत टैरिफ में छूट देना, और कंटेनर ले जाने वाले फ्लैटबेड वैगनों के मेंटेनेंस का काम निजी हाथों में सौंपना.
तौलने की अनिवार्यता से मिलेगी छूट
ईटी ने एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया कि कंटेनर के जरिए होने वाले एक्सपोर्ट ट्रैफिक को 100% तौलने की अनिवार्यता से छूट दी जाएगी. उन्होंने कहा कि यह छूट कुछ खास तरह के सामानों के लिए होगी, लेकिन 5% ट्रेनों की रैंडम जांच की जाती रहेगी.
जानकारों के अनुसार, कंटेनरों को ट्रेन यात्रा से पहले (डिपो में) और बाद में (बंदरगाहों पर) तौला जाता है. रेलवे द्वारा की जाने वाली तौल एक अतिरिक्त प्रक्रिया है. अब कंटेनर ऑपरेटरों को केवल ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग’ के दिशा-निर्देशों के अनुसार ‘वेरिफाइड ग्रॉस मास’ (Verified Gross Mass) की एक कॉपी जमा करनी होगी.
मिनी कंटेनर ट्रेनें शुरू करने की योजना
प्रक्रियाओं को आसान बनाने के साथ-साथ, रेलवे कम से कम 25 वैगनों वाली ‘मिनी कंटेनर ट्रेनें’ (Mini Container Rakes) भी शुरू करने की योजना बना रही है. फिलहाल भारतीय रेलवे के पास लगभग 750 कंटेनर ट्रेनें हैं, जिनमें से प्रत्येक में 45 वैगन होते हैं. अधिकारी ने बताया, ‘मिनी ट्रेनों का मकसद कंटेनरों के जरिए महंगी वस्तुओं के ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है.’
निजी क्षेत्र को मिल सकता है मेंटेनेंस का काम
रेलवे निजी क्षेत्र को वैगनों के मेंटेनेंस की अनुमति देने के प्रस्तावों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है. इससे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के तहत कारोबार के नए मौके पैदा होंगे. इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, कुल वैगनों में से लगभग 20% हमेशा मेंटेनेंस डिपो में रहते हैं. भारतीय रेलवे कंटेनर वैगनों के मेंटेनेंस के लिए कुल फ्रेट टैरिफ (माल ढुलाई शुल्क) का लगभग 5% हिस्सा वसूलती है.
वित्तीय शर्तों पर चल रही बातचीत
एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि कई निर्माताओं और कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों ने रेलवे वैगनों के निजी मेंटेनेंस की अनुमति मांगी है. फिलहाल, इसके लिए वित्तीय शर्तों पर बातचीत चल रही है. अधिकारी ने कहा, ‘कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर चाहते हैं कि अगर वे वैगनों का मेंटेनेंस खुद करें, तो उन्हें फ्रेट टैरिफ में छूट मिले.’ इंडस्ट्री का दावा है कि इससे वैगनों का टर्नअराउंड टाइम (एक चक्कर पूरा करने में लगने वाला समय) बेहतर होगा और काम तेजी से हो सकेगा.
रूट्स की संख्या बढ़ाने की योजना
इन उपायों के अलावा, भारतीय रेलवे उन रूट्स की संख्या भी बढ़ाने की योजना बना रही है, जहां ‘हब एंड स्पोक’ टर्मिनल मौजूद होंगे. इससे मालगाड़ी ऑपरेटरों को कई जगहों से कंटेनर इकट्ठा करके उन्हें भारतीय रेलवे के जरिए भेजने की सुविधा मिलेगी.
इसमें उन्हें लंबी दूरी के माल परिवहन पर मिलने वाले शुल्क लाभ भी मिलते रहेंगे. इस तरह, उन्हें हब-पॉइंट्स पर माल को दोबारा बुक करने पर लगने वाले, कम दूरी के लिए लागू ऊंचे शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ेगा.