आकाशतीर भारत का नया ‘ब्रह्मास्त्र’, विदेशियों की बना पसंद, अमेरिकी थाड और पैट्रियट भी हुए साइडलाइन
ब्रह्मोस के बाद भारत का स्वदेशी Akashteer Air Defence System वैश्विक बाजार में नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है. ऑपरेशन सिंदूर में अपनी क्षमता साबित करने के बाद UAE ने इस Combat-Proven सिस्टम में गहरी दिलचस्पी दिखाई है.

भारत की डिफेंस एक्सपोर्ट कहानी में अब तक सिर्फ एक नाम की गूंज थी- ब्रह्मोस. इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने वैश्विक बाजार में भारत का परचम लहराया है. लेकिन अब भारत का एक और स्वदेशी सिस्टम दुनिया में तहलका मचाने को तैयार है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भारत की ‘आकाशतीर’ (Akashteer) एयर डिफेंस कंट्रोल सिस्टम को खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है. आकाशतीर आने वाले समय में रक्षात्मक तकनीक का नया ग्लोबल चेहरा बनने जा रहा है. आधुनिक युद्ध के बदलते दौर में यह भारत के लिए एक बहुत बड़ा इनोवोशन साबित हो सकता है.
युद्ध का बदला ढर्रा और ‘आकाशतीर’ की टाइमिंग आज कल
आजकल की जंग का तरीका पूरी तरह बदल चुका है. यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया के संघर्षों तक, सस्ते ड्रोन और आत्मघाती मूनिशन दुनिया की सबसे आधुनिक सेनाओं के लिए सिरदर्द बन चुके हैं.
कुछ हजार डॉलर के ड्रोन लाखों-करोड़ों की संपत्ति को तबाह कर रहे हैं. ऐसे माहौल में हर देश अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत करने में जुटा है. भारत का ‘आकाशतीर’ बिल्कुल सही समय पर वैश्विक बाजार में उतरा है, जो ड्रोन के इस नए खतरे से निपटने में पूरी तरह सक्षम है.
एयर डिफेंस का ‘नर्वस सिस्टम’
आकाशतीर को केवल एक मिसाइल या रडार समझना उसे कम आंकना होगा. दरअसल, यह एक ऑटोमेटेड एयर डिफेंस कंट्रोल और रिपोर्टिंग सिस्टम है. इसका मुख्य काम अलग-अलग रडार, सेंसर, संचार नेटवर्क और हथियारों को आपस में जोड़कर एक सिंगल, लाइव ऑपरेशनल तस्वीर तैयार करना है.
आधुनिक युद्ध में केवल ड्रोन का पता लगाना काफी नहीं होता, बल्कि पलक झपकते ही उसकी पहचान करना और उसे गिराने के लिए सही हथियार को कमांड देना सबसे बड़ी चुनौती है.
आकाशतीर इसी कमांड एंड कंट्रोल का काम करता है. यह पूरी डिफेंस प्रणाली के लिए’नर्वस सिस्टम’ की तरह काम करता है, जिससे चंद सेकेंडों में सटीक फैसले लिए जा सकते हैं.
ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया दम
किसी भी सैन्य उपकरण के लिए सबसे बड़ा सर्टिफिकेट उसका युद्ध के मैदान में सफल होना होता है. आकाशतीर को यह प्रामाणिकता ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मिली. इस संघर्ष के दौरान, आकाशतीर ने दुश्मनों के ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम करने में भारतीय सेना के पूरे डिफेंस नेटवर्क को सफलतापूर्वक कोऑर्डिनेट किया था.
भारतीय सेना के अधिकारियों के मुताबिक, इस सिस्टम की मदद से हवाई खतरों के खिलाफ बेहद सटीक और बेजोड़ ‘किल रेट’ हासिल की गई. इस युद्ध-परीक्षित (Combat-Proven) रिकॉर्ड की वजह से ही आज दुनिया भर के खरीदार इसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं.
क्यों खास है UAE की दिलचस्पी?
यूएई कोई ऐसा देश नहीं है जो बजट की कमी के कारण सस्ते विकल्प तलाश रहा हो. उसके पास पहले से ही अमेरिका के ‘थाड’ (THAAD) और ‘पैट्रियट’ जैसे दुनिया के सबसे महंगे और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं.
अगर यूएई जैसा सक्षम देश भारतीय ‘आकाशतीर’ का मूल्यांकन कर रहा है, तो यह वैश्विक बाजार को एक बड़ा संदेश देता है. यह इस बात का सबूत है कि भारतीय सिस्टम पश्चिमी देशों की तकनीक के साथ मिलकर काम कर सकता है और उनके मौजूदा नेटवर्क को और मजबूत बनाने की काबिलियत रखता है.
भारत का भू-राजनीतिक फायदा
आकाशतीर के लिए पूरी दुनिया में एक बहुत बड़ा बाजार मौजूद है. कई विकासशील और मध्यम आकार के देश ऐसे हैं जिनके पास अलग-अलग देशों के रडार और मिसाइलें तो हैं, लेकिन उन्हें एक साथ जोड़ने वाला कोई सेंट्रलाइज्ड सिस्टम नहीं है. आकाशतीर इसी कमी को पूरा करता है.
इसके अलावा, भारत को यहां एक बड़ा भू-राजनीतिक (Geopolitical) फायदा भी हासिल है. कई देश प्रतिबंधों के डर से रूस और रणनीतिक विवादों के कारण चीन के हथियार खरीदने से बचते हैं. अमेरिका का करीबी साझेदार होने के बावजूद स्वतंत्र विदेश नीति रखने के कारण, भारत को एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प के रूप में देखा जाता है.
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अब तक भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट मुख्य रूप से ब्रह्मोस के इर्द-गिर्द घूमता था. लेकिन एक परिपक्व निर्यातक बनने के लिए पोर्टफोलियो का बड़ा होना जरूरी है. अगर यूएई के साथ यह डील फाइनल होती है, तो यह दुनिया के दर्जनों छोटे और मध्यम देशों के लिए रास्ते खोल देगा जो किफायती लेकिन प्रभावी डिफेंस नेटवर्क चाहते हैं.
ब्रह्मोस ने भारत के लिए वैश्विक बाजार के दरवाजे खोले थे, और अब आकाशतीर उस रास्ते पर आगे बढ़कर भारत को ड्रोन युग का एक बड़ा नेटवर्क सप्लायर बनाने के लिए तैयार है.