17 टैक्स खत्म कर शुरू हुआ था GST, 9 साल में टैक्स बेस 66 लाख से 1.65 करोड़ हुआ; अब कंपनियां चाहती हैं सेंट्रलाइज्ड ऑडिट
1 जुलाई को GST लागू होने के 9 साल पूरे होने जा रहे हैं. Deloitte India के सर्वे के मुताबिक 99% बिजनेस लीडर्स जीएसटी के प्रति सकारात्मक या तटस्थ रुख रखते हैं, लेकिन टैक्स रिफंड में देरी, ऑडिट की जटिलता और नियमों की स्पष्टता को लेकर कंपनियों की चिंताएं अब भी बरकरार हैं. वहीं, उद्योग जगत अब AI-आधारित GST कंप्लायंस और सेंट्रलाइज्ड ऑडिट की मांग कर रहा है.
1 जुलाई को देश में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लागू हुए पूरे 9 साल होने जा रहे हैं. इस मौके पर आए एक बड़े सर्वे ने साफ कर दिया है कि भारतीय कॉर्पोरेट जगत ने जीएसटी को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है.
Deloitte India के ‘GST@9’ सर्वे के मुताबिक, देश के 99% बिजनेस लीडर्स ने जीएसटी को लेकर पॉजिटिव या न्यूट्रल रुख जताया है, जबकि इसके खिलाफ केवल 1% से भी कम राय देखने को मिली है. हालांकि, कंपनियों ने टैक्स रिफंड में देरी और ऑडिट से जुड़ी पेचीदगियों को लेकर चिंता भी जताई है.
1.65 करोड़ हुआ टैक्स बेस
डेलॉइट का यह सर्वे एमएसएमई (MSMEs) सहित 8 प्रमुख उद्योगों के 1,096 कॉरपोरेट दिग्गजों के जवाबों पर आधारित है. सर्वे के अनुसार, डिजिटलीकरण और टैक्स दरों को तर्कसंगत बनाने से बिजनेस करना काफी आसान हुआ है. साल 2017 में 17 स्थानीय टैक्स और 13 सेस को खत्म करके जब जीएसटी लागू किया गया था, तब टैक्सपेयर्स की संख्या 66.5 लाख थी, जो साल 2026 में बढ़कर करीब 1.65 करोड़ हो चुकी है.
रिफंड और ऑडिट को लेकर बढ़ीं चिंताएं
भले ही व्यापार जगत जीएसटी के मौजूदा ढांचे से खुश है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं. सर्वे में शामिल 87% दिग्गजों ने मांग की है कि टैक्स नियमों की व्याख्या में और अधिक स्पष्टता (Interpretational Clarity) होनी चाहिए. इसके अलावा:
- 61% उत्तरदाताओं ने कहा कि देश भर में जीएसटी ऑडिट की प्रक्रिया एक समान होनी चाहिए.
- 36% कंपनियों ने वर्किंग कैपिटल को ब्लॉक होने से बचाने के लिए रिफंड प्रक्रिया को तेज करने की मांग की है.
- 72% लोगों ने ‘सेंट्रलाइज्ड ऑडिट’ को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया, क्योंकि फिलहाल केंद्रीय और राज्य जीएसटी अधिकारियों की दोहरी और समानांतर जांच (Parallel Proceedings) से कंपनियां परेशान हैं.
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इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर और AI आधारित अगला फेज
सर्वे के अनुसार, अब समय आ गया है कि जीएसटी केवल डिजिटल होने से आगे बढ़कर एआई-ड्रिवेन (AI-driven) कंप्लायंस की ओर बढ़े. करीब 89% हितधारकों ने एआई आधारित डेटा प्रोसेसिंग को अपनी प्राथमिकता बताया है, ताकि विवाद कम हो सकें.
डेलॉइट इंडिया के इनडायरेक्ट टैक्स लीडर महेश जयसिंह के मुताबिक, यह सही समय है जब इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत रिफंड फॉर्मूले का दायरा बढ़ाया जाए और इसमें इनपुट सर्विसेज और कैपिटल गुड्स को भी शामिल किया जाए ताकि कंपनियों की फंसी हुई पूंजी (वर्किंग कैपिटल) को राहत मिल सके.
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