Gold-Silver Crash: जून तिमाही में सोना 12% और चांदी 17.6% फिसली, 4 साल के सबसे खराब दौर में सिल्वर

बुलियन बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. जून तिमाही में सोना करीब 12 फीसदी और चांदी 17.6 फीसदी टूट चुकी है. रिकॉर्ड हाई से सोना 24 फीसदी और चांदी 47 फीसदी नीचे आ गई है. मजबूत डॉलर, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा दिया है.

सोने-चांदी में गिरावट Image Credit: Money9 Live

ग्लोबल मार्केट में सोने और चांदी लगातार फिसल रहे हैं. पिछले दो सालों से रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे इन दोनों कीमती मेटल के ‘सुनहरे दिन’ फिलहाल खत्म होते दिख रहे हैं. जून तिमाही में सोना और चांदी दोनों ही भारी घाटे के साथ बंद होने जा रहे हैं. इसके साथ ही पिछले पांच तिमाहियों से चली आ रही इनकी बढ़त का सिलसिला भी टूट गया है. सोना जहां एक दशक (10 साल) की अपनी सबसे बड़ी तिमाही गिरावट की तरफ बढ़ रहा है, वहीं चांदी भी पिछले चार साल के अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है.

रिकॉर्ड हाई से औंधे मुंह गिरे दाम

आंकड़ों पर नजर डालें तो इस जून तिमाही में सोना अब तक करीब 12 फीसदी टूट चुका है, जो दिसंबर 2016 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है. वहीं चांदी भी 17.6 फीसदी फिसल चुकी है, जो जून 2022 के बाद इसका सबसे खराब प्रदर्शन है. अगर रिकॉर्ड स्तर से तुलना करें, तो सोना अपने ऑल-टाइम हाई ($5417 प्रति औंस) से 24 फीसदी नीचे आ चुका है. दूसरी तरफ, 28 जनवरी को $117 प्रति औंस का रिकॉर्ड बनाने वाली चांदी अब तक करीब 47 फीसदी टूट चुकी है.

क्यों थम गई बुलियन मार्केट की रफ्तार?

जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी में इस ऐतिहासिक गिरावट की तीन बड़ी वजहें हैं: मजबूत होता अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और फेडरल रिजर्व का कड़ा रुख.

  • फेडरल रिजर्व का कड़ा रुख: अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Fed) के नए चेयरमैन केविन वॉर्श ने साफ कर दिया है कि उनका पूरा ध्यान महंगाई को काबू करने पर है. ब्याज दरों में कटौती की जगह अब बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं.
  • ब्याज न मिलना पड़ा भारी: चूंकि सोने और चांदी पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के माहौल में निवेशक इन्हें छोड़कर सरकारी बॉन्ड जैसे फिक्स्ड-इनकम वाले विकल्पों में पैसा लगा रहे हैं.
  • भू-राजनीतिक तनाव में कमी: अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच समझौता होने से पश्चिम एशिया का तनाव कम हुआ है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें भी घटी हैं. सुरक्षा के लिहाज से सोने में सुरक्षित निवेश करने वाले अब हाथ पीछे खींच रहे हैं.

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आगे क्या होगी बाजार की चाल?

शिकागो फेड के प्रेसिडेंट ऑस्टिन गूल्सबी ने भी बढ़ती महंगाई पर चिंता जताई है. फिलहाल डॉलर इंडेक्स एक साल के उच्चतम स्तर पर है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक डॉलर का स्तर $100 के ऊपर बना रहेगा, तब तक सोने और चांदी की कीमतों पर यह दबाव जारी रहेगा. अब निवेशकों की नजर गुरुवार को आने वाले अमेरिकी पीसीई (PCE) प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों पर है, जिससे आगे की दिशा तय होगी.