72 डॉलर के नीचे पहुंचा ब्रेंट क्रूड, BPCL और HPCL समेत इन शेयरों ने पकड़ी रफ्तार, रखें नजर
InterGlobe Aviation, जो IndiGo एयरलाइन की पैरेंट कंपनी है, के शेयर शुरुआती कारोबार में 2.3 फीसदी चढ़कर 5,328 रुपये पर पहुंच गए. बाजार को उम्मीद है कि एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की लागत घटने से एयरलाइन कंपनियों के मार्जिन में सुधार हो सकता है, जिसका सीधा फायदा IndiGo जैसी कंपनियों को मिलेगा.
गुरुवार के कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट का फायदा क्रूड-सेंसिटिव शेयरों को मिला. अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude करीब 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक फिसल गया, जिसके बाद एयरलाइन और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली. ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान कच्चे तेल में आई पूरी तेजी अब खत्म हो चुकी है और कीमतें युद्ध से पहले के स्तर से भी नीचे पहुंच गई हैं.
IndiGo के शेयर में सबसे ज्यादा तेजी
InterGlobe Aviation, जो IndiGo एयरलाइन की पैरेंट कंपनी है, के शेयर शुरुआती कारोबार में 2.3 फीसदी चढ़कर 5,328 रुपये पर पहुंच गए. बाजार को उम्मीद है कि एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की लागत घटने से एयरलाइन कंपनियों के मार्जिन में सुधार हो सकता है, जिसका सीधा फायदा IndiGo जैसी कंपनियों को मिलेगा.
BPCL और HPCL में भी खरीदारी
तेल की कीमतों में नरमी का असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों पर भी दिखा. BPCL का शेयर 1 फीसदी बढ़कर 318.75 रुपये पर पहुंच गया. HPCL का शेयर 0.9 फीसदी चढ़कर 416.85 रुपये पर कारोबार करता दिखा. कच्चे तेल की कीमतें कम होने से इन कंपनियों की लागत पर दबाव घटता है, जिससे निवेशकों का सेटीमेंट मजबूत हुआ है.
Asian Paints को भी मिल सकता है फायदा
Asian Paints भी उन कंपनियों में शामिल है जिन्हें कम कच्चे तेल की कीमतों से लाभ मिलता है, क्योंकि कंपनी पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल का इस्तेमाल करती है. हालांकि गुरुवार को शेयर मामूली 0.2 फीसदी की कमजोरी के साथ 2,661.40 रुपये पर कारोबार करता दिखा.
लगातार चौथे दिन टूटा कच्चा तेल
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई. Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, Brent Crude 72.48 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया. WTI Crude करीब 69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था. यह गिरावट ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति के संकेत मिले हैं.
अमेरिका-ईरान वार्ता से बढ़ी राहत
बाजार में यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से मिडल ईस्ट में तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा घट सकता है. इसके अलावा Hormuz Strait के जरिए तेल आपूर्ति सामान्य बनी हुई है. मिडल ईस्ट और अफ्रीका के उत्पादकों की ओर से कच्चे तेल की आपूर्ति भी बढ़ी है, जिससे बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनी हुई है. इसी वजह से तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है.
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