HCC ने पिछले कुछ सालों में कर्ज कम करने पर फोकस किया है. कंपनी का कुल कर्ज करीब 4,851 करोड़ रुपये से घटकर 1,001 करोड़ रुपये पर आ गया है. इसके अलावा ऑपरेटिंग कैश फ्लो भी बेहतर हुआ है, जो करीब 134 करोड़ रुपये रहा. कंपनी के पास मजबूत ऑर्डर बुक भी है. मौजूदा ऑर्डर बैकलॉग करीब 13,152 करोड़ रुपये का है, जो ट्रांसपोर्ट, हाइड्रो, वाटर और न्यूक्लियर जैसे अलग-अलग सेक्टर में फैला हुआ है.
सुजलॉन एनर्जी रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की बड़ी कंपनियों में से एक है. यह कंपनी विंड टरबाइन जनरेटर बनाने के साथ-साथ इंस्टॉलेशन और ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस का काम भी करती है. कंपनी का बिजनेस मॉडल वर्टिकल इंटीग्रेशन पर आधारित है, जिससे ऑर्डर बुक मजबूत बनी रहती है. वहीं, ओरिएंट इलेक्ट्रिक कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल सेगमेंट की जानी मानी कंपनी है. इसके पोर्टफोलियो में फैन, लाइटिंग, होम अप्लायंसेज और स्विचगियर जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं. देशभर में इसका मजबूत ब्रांड नेटवर्क और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल है.
FMCG सेक्टर में अब दोबारा तेजी के संकेत दिखने लगे हैं. FMCG सेक्टर की रिकवरी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण बाजार से आ रहा है. ग्रामीण इलाकों में महंगाई कम होना, एमएसपी में बढ़ोतरी, कृषि उत्पादन में सुधार और बढ़ती खरीद क्षमता ने डिमांड को मजबूत किया है. इसका सीधा फायदा रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों को मिल रहा है.
कई निवेशक गूगल या MCX पर गोल्ड और सिल्वर की स्पॉट कीमत देखते हैं और उम्मीद करते हैं कि ETF भी बिल्कुल उसी तरह चले. हकीकत में ETF एक रेफरेंस बेंचमार्क को ट्रैक करते हैं, जो स्पॉट प्राइस से थोड़ा अलग हो सकता है. सिल्वर ETF आमतौर पर ग्लोबल सिल्वर प्राइस को डॉलर से रुपये में बदलकर ट्रैक करते हैं.
इन 4 शेयरों से आने वाले समय में मौका हो सकता है. ये शेयर अलग-अलग सेक्टर से जुड़े हैं. ये अपने पिछले पांच साल के औसत पीई के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे होते हैं. ऐसे में इन्हें अंडरवैल्यूड माना जाता है. ऐसे शेयर लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न देने का मौका दे सकते हैं.
विदेशी निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी से ये शेयर निवेशकों के रडार पर हैं. पिछले एक साल में FII ने एफएमसीजी, बैंकिंग और रिन्यूएबल पावर जैसे सेक्टर्स की कई कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है. यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशक भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी को लेकर काफी पॉजिटिव हैं.
Adani Ports के शेयर में करीब 5 फीसदी की गिरावट आई और यह 1,343 रुपये के आसपास पहुंच गया. वहीं Adani Energy का शेयर करीब 8 फीसदी फिसलकर 852 रुपये पर आ गया. इसके अलावा Ambuja Cement, ACC और Adani Total Gas जैसे बाकी ग्रुप स्टॉक्स में भी कमजोरी देखने को मिली.
ताजा Q3 नतीजों में भी कंपनी ने ग्रोथ की रफ्तार बनाए रखी है. इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 1,140 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,183 करोड़ रुपये हो गया, यानी करीब 4 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. वहीं प्रॉफिट में ज्यादा दमदार उछाल देखने को मिला. मुनाफा 141 करोड़ रुपये से बढ़कर 192 करोड़ रुपये हो गया, जो करीब 36 फीसदी की ग्रोथ को दिखाता है.
23 जनवरी के कारोबार में InterGlobe Aviation का शेयर दबाव में नजर आया. स्टॉक करीब 2.69 फीसदी गिरकर 4,777 रुपये के आसपास ट्रेड करता दिखा. इंट्राडे आधार पर भी शेयर में कमजोरी बनी रही. अगर हालिया प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले एक हफ्ते में शेयर करीब 0.93 फीसदी चढ़ा है. वहीं बीते तीन महीनों में स्टॉक करीब 19.21 फीसदी टूटा है.
इस लिस्ट में 21 रुपये तक के शेयर हैं. ज्यादा NPA होने से बैंक की कमाई और कैपिटल दोनों पर दबाव पड़ता है. इसी वजह से निवेशक इन आंकड़ों पर खास ध्यान देते हैं. आइए कुछ ऐसे स्टॉक्स को जानते हैं, जिन्होंने Q3 FY26 में नेट NPA को 0.4 फीसदी या उससे नीचे लाकर अपनी मजबूत स्थिति दिखाई है.