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Tejas Chaturvedi

पूर्वांचल की मिट्टी से निकले तेजस चतुर्वेदी की कहानी किसी मसाला फिल्म से कम नहीं! JNU, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी और IIMC जैसे भारत के टॉप संस्थानों को फतह करने के बाद तेजस सीधे न्यूजरूम के अखाड़े में कूद पड़े. फिलहाल TV9 में उपसंपादक हैं.


संवाद लिए जुड़ें- https://www.instagram.com/tejas_jnu/

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Tejas Chaturvedi

बाजार में कमजोरी के बीच 30 मार्च के लिए कुछ शेयर फोकस में रह सकते हैं. कोल इंडिया ने ज्वाइंट वेंचर बनाया, जेएसडब्ल्यू स्टील अधिग्रहण की तैयारी में है, गुजरात फ्लोरोकेमिकल्स की सब्सिडियरी ने फंड जुटाया. रेलटेल को बड़ा ऑर्डर मिला और जी आर इंफ्रा को हाईवे प्रोजेक्ट मिला है.

FY26 में 8 पेनी स्टॉक्स में भारी गिरावट देखने को मिली है. इनमें 50 फीसदी से लेकर 90 फीसदी तक की गिरावट आई. कम कीमत और ज्यादा रिटर्न के लालच में निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है. पेनी स्टॉक्स में कम लिक्विडिटी, ज्यादा वोलैटिलिटी के चलते मैनिपुलेशन का खतरा रहता है, जिससे अचानक गिरावट आ सकती है.

डेली चार्ट पर लंबी बेयर कैंडल बनी है, जो कमजोरी का संकेत देती है. उन्होंने कहा कि निफ्टी ने 23,465 के आसपास नया लोअर टॉप बनाया है, जो डाउनट्रेंड की कंफर्मेशन करता है. पिछले एक महीने से लोअर टॉप और लोअर बॉटम का पैटर्न जारी है, जो बाजार में कमजोरी को दर्शाता है.

भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स और निफ्टी में 2 फीसदी से ज्यादा कमजोरी रही. बाजार पर मिडिल ईस्ट तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये में गिरावट और FIIs की बिकवाली का दबाव है. इस हफ्ते US-ईरान संबंध, तेल कीमतें और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे.

लंबी अवधि में इसने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है, जिसमें 3 साल में करीब 202 प्रतिशत और 5 साल में करीब 193 प्रतिशत का रिटर्न शामिल है. विदेशी निवेशकों ने इस स्टॉक में करीब 5.59 फीसदी की हिस्सेदारी अपने पास रखी है. इसके साथ ही DIIs के पास भी इसमें 6.15 फीसदी की होल्डिंग है.

दिग्गज निवेशक विजय केडिया के पोर्टफोलियो में कई हाई ग्रोथ शेयर शामिल हैं, जिनमें Patel Engineering, Advait Energy, Elecon Engineering और Neuland Laboratories प्रमुख हैं. इन कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में मजबूत प्रॉफिट CAGR दिखाया है. मजबूत फंडामेंटल और लगातार ग्रोथ के चलते ये शेयर निवेशकों के रडार पर हैं.

डेट-फ्री माइक्रो-कैप कंपनियां वित्तीय रूप से मजबूत होती हैं और उन पर ब्याज का बोझ नहीं होता. वहीं PEG रेश्यो 1 से कम होने का मतलब है कि शेयर अपनी ग्रोथ के मुकाबले सस्ता मिल रहा है, जो वैल्यू निवेशकों के लिए अच्छा मौका बन सकता है.

इसके शेयरों में अभी दबाव देखने को मिला है. शुक्रवार को इंट्राडे में यह करीब 4.76 प्रतिशत गिरकर 386.15 रुपये तक आ गया. पिछले एक हफ्ते में शेयर 6.14 प्रतिशत गिरा है, जबकि इस साल अब तक इसमें करीब 17.7 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है.

बिकवाली से चौतरफा कोहराम मचा हुआ है. लगातार बिकवाली के चलते बड़े और मिडकैप स्टॉक्स भी इससे अछूते नहीं रहे. 27 मार्च को भी इसका असर साफ नजर आया, जब निफ्टी 500 इंडेक्स 458.05 अंक यानी करीब 2.13 फीसदी गिरकर 21,020.15 के स्तर पर बंद हुआ था.

युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है, जो युद्ध से पहले करीब 70 डॉलर था. अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है, जिससे ग्लोबल महंगाई बढ़ने का खतरा है.