कंपनी ने इसे लगातार दूसरी मुनाफे वाली तिमाही बताया है, जो पेमेंट्स और फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस में बेहतर प्रदर्शन का संकेत माना जा रहा है. हालांकि, कंपनी के शेयरों में 8 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के बाद 208 रुपये पर आ गए. MobiKwik का ऑपरेशंस से रेवेन्यू Q4FY26 में सालाना आधार पर 7.81 फीसदी बढ़कर 288.71 करोड़ रुपये पहुंच गया.
हालिया तेजी के बाद भी पिछले तीन महीनों में कंपनी का शेयर करीब 0.78 फीसदी नीचे है, लेकिन पिछले एक साल में इसमें करीब 8.26 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. हालिया तेजी के बाद भी पिछले तीन महीनों में कंपनी का शेयर करीब 0.78 फीसदी नीचे है.
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने FY26 के लिए 10 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 2 रुपये डिविडेंड देने की सिफारिश की है. हालांकि यह डिविडेंड आगामी AGM में शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद लागू होगा. डिविडेंड घोषणा के बावजूद बाजार में शेयर पर दबाव बना रहा.
नई व्यवस्था के तहत ऑनशोर क्रूड ऑयल उत्पादन पर प्रभावी रॉयल्टी दर घटाकर 10 फीसदी कर दी गई है, जबकि ऑफशोर क्रूड उत्पादन पर यह दर 8 फीसदी कर दी गई है. सरकार ने इसके लिए नया कैलकुलेशन सिस्टम लागू किया है, जिससे कंपनियों पर रॉयल्टी का बोझ कम होगा और प्रोजेक्ट्स की प्रॉफिट बेहतर हो सकती है.
हालांकि ब्रोकरेज स्टॉक को लेकर पॉजिटिव नजर आ रहा है, लेकिन हाल के महीनों में शेयर का प्रदर्शन कमजोर रहा है. पिछले एक हफ्ते में शेयर 4.63 फीसदी गिरा है, जबकि पिछले तीन महीनों में इसमें 11.04 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं पिछले एक साल में शेयर करीब 36.66 फीसदी टूट चुका है.
आज कई बड़ी और मिडकैप कंपनियां मार्च तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. इनमें प्रमुख रूप से Berger Paints India, Bharat Petroleum Corporation, Dixon Technologies India, Dr Reddy's Laboratories, Nazara Technologies, Tata Power Company, Torrent Power, Pfizer और SKF India जैसी कंपनियां शामिल हैं. बाजार की नजर इन कंपनियों के नतीजों और भविष्य के आउटलुक पर रहेगी.
Tata Motors से जुड़े इस ऑर्डर के बाद कंपनी चर्चा में आ गई है. Magnus Steel and Infra स्टील ट्रेडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सप्लाई कारोबार में सक्रिय है. सोमवार को कंपनी का शेयर 4.98 फीसदी चढ़कर 193.05 रुपये पर बंद हुआ.
यह ट्रांजैक्शन भारतीय स्टॉक एक्सचेंज के स्क्रीन बेस्ड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए किया जाएगा. बाजार की भाषा में इसे ब्लॉक डील या बड़े संस्थागत प्लेसमेंट के तौर पर देखा जाता है. ऐसे सौदों में आमतौर पर बड़े निवेशक अपनी हिस्सेदारी संस्थागत खरीदारों को बेचते हैं.
तिमाही नतीजों, बड़े ऑर्डर्स, मैनेजमेंट बदलाव और ब्लॉक डील जैसी खबरों के चलते पावर, इंफ्रा, फार्मा, डेटा सेंटर, ऑटो, हॉस्पिटैलिटी और टेलीकॉम सेक्टर के शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे. कुछ कंपनियों ने मजबूत प्रदर्शन किया है, जबकि कुछ के नतीजों में दबाव देखने को मिला है.
Q4 FY26 के दौरान कई कंपनियां ऐसी रहीं, जिनमें FIIs और DIIs दोनों ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई. इससे संकेत मिलता है कि बड़े निवेशकों को इन कंपनियों के बिजनेस मॉडल और आने वाले समय की संभावनाओं पर भरोसा है. इस लिस्ट में अलग-अलग सेक्टर की कंपनियां हैं.