दाखिल खारिज कराने से सरकारी भूमि रिकॉर्ड हमेशा अपडेट और सटीक बने रहते हैं, जिससे यह स्पष्ट रहता है कि संपत्ति का असली मालिक कौन है और उसका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है. इससे भविष्य में होने वाले विवादों की संभावना कम हो जाती है.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार का ट्रेंड फिलहाल पॉजिटिव बना हुआ है, लेकिन हालिया तेज रैली के बाद थोड़ी मुनाफावसूली या कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है. ऐसे में निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी यानी buy on dips की रणनीति अपनानी चाहिए.
सेक्टोरल फ्रंट पर ऑटो, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल्टी, FMCG, PSU बैंक और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में 1-2 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई. हालांकि आईटी सेक्टर में कमजोरी रही और इंडेक्स करीब 1.7 फीसदी गिरकर बंद हुआ.
जांच में सामने आया कि इस स्कीम के जरिए 2,950 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई गई. हालांकि, ब्रोकर को कितना फायदा हुआ, इसका सही आंकड़ा सामने नहीं आ पाया. SEBI ने पाया कि ब्रोकर ने नियमों का उल्लंघन किया है और वह अब ‘फिट एंड प्रॉपर’ मानदंडों पर खरा नहीं उतरता. रेगुलेटर ने कंपनी पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है.
गोल्ड ETF में मार्च में 2,266 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो फरवरी के 5,255 करोड़ रुपये से कम है. इससे साफ है कि हाल की तेजी के बाद इस कैटेगरी में थोड़ी सुस्ती आई है. ‘अन्य स्कीम्स’, जिसमें ETF शामिल हैं, में 30,768 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया. यह फरवरी के 13,879 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा है, जिससे इंडस्ट्री को कुछ सहारा मिला.
OMC कंपनियों के लिए कच्चा तेल मुख्य इनपुट कॉस्ट होता है. जब कच्चे तेल की कीमत तेजी से बढ़ती है, तो कंपनियां तुरंत पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ा पातीं, जिससे उनके मार्जिन पर दबाव आता है. इसी वजह से पिछले महीने IOC, BPCL और HPCL के शेयरों में 25 फीसदी से 27 फीसदी तक की गिरावट देखी गई थी.
किचन अप्लायंसेज में गैस की कमी के चलते इंडक्शन कुकटॉप की डिमांड बढ़ रही है. वॉशिंग मशीन, फ्रिज और वॉटर प्यूरिफायर में भी ठीक-ठाक प्रदर्शन रहने की उम्मीद है. इसको देखकर ब्रोकरेज हाउस ने कई शेयरों को चुना है जिसमें अच्छा-खास रिटर्न मिल सकता है.
तिमाही नतीजों के बाज TCS के शेयरों में दबाव देखने को मिला है. TCS का शेयर फिलहाल करीब 2,511 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है और दिन के दौरान करीब 3 प्रतिशत की गिरावट में है. पिछले एक हफ्ते में हल्की तेजी रही है, लेकिन तीन महीने और एक साल के दौरान स्टॉक में गिरावट देखने को मिली है.
अगर बायबैक को मंजूरी मिलती है, तो यह करीब तीन साल बाद कंपनी का पहला बायबैक होगा. इससे पहले जून 2023 में Wipro ने 12,000 करोड़ रुपये का बायबैक किया था. उस समय कंपनी ने 445 रुपये प्रति शेयर के भाव पर करीब 26.96 करोड़ शेयर खरीदे थे, जो कुल इक्विटी का लगभग 4.91 प्रतिशत था.
9 अप्रैल को TCS का शेयर करीब 1.16 फीसदी की तेजी के साथ 2,589 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा था. पिछले एक हफ्ते में स्टॉक 7.51 प्रतिशत चढ़ा है, लेकिन पिछले तीन महीनों में 19.19 प्रतिशत और एक साल में करीब 21.38 फीसदी गिरा है.