निफ्टी के लिए 23,950–23,980 का जोन अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है और अगर इंडेक्स इस स्तर के ऊपर टिकता है तो शॉर्ट टर्म में 24,100 और उसके बाद 24,230 तक की तेजी देखने को मिल सकती है. वहीं नीचे की तरफ 23,700–23,650 का जोन मजबूत सपोर्ट रहेगा.
AI के बढ़ते इस्तेमाल के चलते पारंपरिक एयर कूलिंग अब पर्याप्त नहीं रह गई है. हाई-डेंसिटी वर्कलोड ज्यादा हीट पैदा करते हैं, जिसकी वजह से अब लिक्विड कूलिंग टेक्नोलॉजी की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहा है. आने वाले समय में डेटा सेंटर ग्रोथ का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा AI से आने की उम्मीद है.
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो पावर, डिफेंस और टेलीकॉम को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए. FMCG, ऑटो, IT, एनर्जी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में करीब 1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. ब्रॉडर मार्केट भी दबाव में रहा, जहां Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 दोनों इंडेक्स में करीब 0.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
अब बाजार की नजर NCLAT की अगली सुनवाई पर रहेगी. इस केस का फैसला JAL के अधिग्रहण की दिशा तय करेगा, जिसका असर संबंधित कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिल सकता है. Adani Enterprises का शेयर सोमवार को मजबूती के साथ करीब 2,140.6 रुपये पर ट्रेड कर रहा है और इसमें 2.58 प्रतिशत की तेजी देखी गई है. पिछले एक हफ्ते में स्टॉक करीब 16.7 प्रतिशत चढ़ा है.
Avenue Supermarts का शेयर 13 अप्रैल को हल्की बढ़त के साथ 4,430.4 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा था. स्टॉक में पिछले एक हफ्ते में 1.56 प्रतिशत की तेजी आई है, जबकि पिछले तीन महीनों में यह करीब 15.6 प्रतिशत चढ़ा है. सालभर में स्टॉक ने करीब 7.23 प्रतिशत का रिटर्न दिया है.
दिल्ली सरकार ने शनिवार को EV पॉलिसी का ड्राफ्ट पब्लिक कंसल्टेशन के लिए जारी किया है. जिसके बाद निवेशकों का रुझान इस सेक्टर की कंपनियों की ओर बढ़ा. Ather Energy के शेयर में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई और यह करीब 906.80 रुपये तक पहुंच गया.
इस पॉलिसी का फोकस केवल पैसेंजर व्हीकल्स तक सीमित नहीं है, बल्कि दोपहिया, तिपहिया और कमर्शियल वाहनों के इलेक्ट्रिफिकेशन पर भी विशेष जोर दिया गया है. दिल्ली सरकार ने इस पॉलिसी का ड्राफ्ट 11 अप्रैल 2026 को जारी किया है और हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं. अंतिम अधिसूचना के बाद यह पॉलिसी लागू होगी और 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी.
इस तेज गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका लगा. बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप कुछ ही मिनटों में करीब 8 लाख करोड़ रुपये घट गया और यह 451 लाख करोड़ रुपये से गिरकर लगभग 443 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. आइए इस गिरावट के पीछे की वजह जानते हैं.
दाखिल खारिज कराने से सरकारी भूमि रिकॉर्ड हमेशा अपडेट और सटीक बने रहते हैं, जिससे यह स्पष्ट रहता है कि संपत्ति का असली मालिक कौन है और उसका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है. इससे भविष्य में होने वाले विवादों की संभावना कम हो जाती है.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार का ट्रेंड फिलहाल पॉजिटिव बना हुआ है, लेकिन हालिया तेज रैली के बाद थोड़ी मुनाफावसूली या कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है. ऐसे में निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी यानी buy on dips की रणनीति अपनानी चाहिए.