अगर बायबैक को मंजूरी मिलती है, तो यह करीब तीन साल बाद कंपनी का पहला बायबैक होगा. इससे पहले जून 2023 में Wipro ने 12,000 करोड़ रुपये का बायबैक किया था. उस समय कंपनी ने 445 रुपये प्रति शेयर के भाव पर करीब 26.96 करोड़ शेयर खरीदे थे, जो कुल इक्विटी का लगभग 4.91 प्रतिशत था.
9 अप्रैल को TCS का शेयर करीब 1.16 फीसदी की तेजी के साथ 2,589 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा था. पिछले एक हफ्ते में स्टॉक 7.51 प्रतिशत चढ़ा है, लेकिन पिछले तीन महीनों में 19.19 प्रतिशत और एक साल में करीब 21.38 फीसदी गिरा है.
निफ्टी में L&T, इंटरग्लोब एविएशन, HDFC बैंक, श्रीराम फाइनेंस और Jio फाइनेंशियल सबसे कमजोर रहे, जबकि Dr. Reddy’s लैब्स, हिंदाल्को, बजाज ऑटो, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और ONGC सबसे ज्यादा बढ़त देने वाले शेयर रहे. मिडकैप और स्मॉलकैप आज फ्लैट बंद हुए.
पूरे FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 2,418 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल से 78 प्रतिशत ज्यादा है. नेट प्रॉफिट 180.15 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 108 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई. EPS भी 14 रुपये से बढ़कर 29.14 रुपये हो गया. ट्रेलिंग आधार पर कंपनी करीब 28.5 के P/E पर है, जिससे वैल्यूएशन को मिड रेंज में माना जा सकता है. बीते एक हफ्ते में शेयर 20 फीसदी भाग चुका है.
हालांकि, कंपनी के फाइनेंशियल्स अभी दबाव में हैं. दिसंबर तिमाही (Q3 FY26) में रेवेन्यू 55 प्रतिशत गिरकर 470 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल 1,045 करोड़ रुपये था. बीते एक महीने की बात करें तो स्टॉक 53 फीसदी भाग चुका है. यानी अगर किसी निवेशक ने एक महीने पहले इसमें पैसा लगाया होता तो इसने निवेशकों के पैसे को डेढ़ गुना से ज्यादा कर दिया होता.
EMKAY ने Jindal Steel and Power को Add से अपग्रेड कर BUY कर दिया है और इसका टारगेट प्राइस बढ़ाकर 1,400 रुपये कर दिया है, जो पहले 1,125 रुपये था. यह अपग्रेड बेहतर कीमतों के माहौल और कंपनी के अंगुल प्लांट में कैपेसिटी विस्तार को ध्यान में रखते हुए किया गया है.
बाजार की गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाली कर्ज मुक्त कंपनियों में निवेश के मौके बनते हैं. Shilchar Technologies, Shanthi Gears और Jyoti Resins जैसी कंपनियां मजबूत बैलेंस शीट, अच्छा रिटर्न और लगातार ग्रोथ के साथ लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती हैं.
ताजा ट्रेडिंग में यह शेयर करीब 8.64 प्रतिशत की तेजी के साथ 165.92 रुपये पर ट्रेड करता दिखा. पिछले एक महीने में स्टॉक करीब 16 प्रतिशत चढ़ चुका है. वहीं एक हफ्ते में 12.59 प्रतिशत की तेजी आई है. पिछले एक साल में यह शेयर करीब 49.48 प्रतिशत तक ऊपर गया है.
इन कंपनियों की सबसे बड़ी खासियत इनका कम Debt to Equity रेशियो है. कुछ कंपनियों में यह लगभग शून्य के करीब है. इसका मतलब है कि कंपनी पर कर्ज का दबाव नहीं है, जो गिरते बाजार में एक पॉजिटिव संकेत माना जाता है. आइए इन्हें एक-एक कर जानते हैं.
शेयर में आई इस गिरावट का असर कंपनी के मार्केट कैप पर भी पड़ा. Reliance का मार्केट कैप गिरकर 18 लाख करोड़ रुपये के नीचे आ गया और करीब 17.65 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना. Reliance निफ्टी 50 का सबसे बड़ा लूजर बनकर उभरा. कंपनी का इंडेक्स में वजन ज्यादा होने की वजह से Nifty 50 भी दबाव में आ गया.