बुधवार के कारोबार में Tata Elxsi का शेयर करीब 5.01 फीसदी गिरकर 3,512 रुपये पर कारोबार करता दिखा. पिछले एक सप्ताह में शेयर 5.27 फीसदी, तीन महीने में 20.39 फीसदी और एक साल में 43.16 फीसदी टूट चुका है.
नतीजों के बाद कंपनी के शेयर में भी दबाव देखने को मिला और यह कारोबार के दौरान 3 फीसदी तक टूट गया. पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 424 करोड़ रुपये था, जो इस बार घटकर 104 करोड़ रुपये रह गया. हालांकि, कंपनी की आय में बढ़त दर्ज की गई.
ब्रॉडर मार्केट में खरीदारी देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप दोनों इंडेक्स करीब 0.39 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत नजर आया. सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी IT को छोड़कर लगभग सभी सेक्टरों में तेजी रही. IT इंडेक्स में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली, जबकि अन्य सेक्टरों में खरीदारी का माहौल बना रहा.
रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के सांसदों के समर्थन वाले इस बिल का मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है. इसके तहत रूस के अधिकारियों, बैंकों और एनर्जी प्रोजेक्ट पर नए प्रतिबंध लगाए जाएंगे. पहले प्रस्ताव में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले सभी देशों पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने की बात थी.
IBM के अनुसार, जून तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सिर्फ 1 फीसदी बढ़कर 17.2 अरब डॉलर रहा. यह आंकड़ा बाजार के अनुमान से कम रहा. जिसके बाद अमेरिकी बाजार में Infosys और Wipro के एडीआर में भी कमजोरी देखने को मिली, जिसका असर घरेलू आईटी शेयरों पर पड़ सकता है.
15 जुलाई के कारोबार में Tata Elxsi, LTTS, Anand Rathi, Delhivery, Hero MotoCorp, Kirloskar Brothers और Jammu & Kashmir Bank जैसे शेयर फोकस में रहेंगे. इन कंपनियों ने तिमाही नतीजे, बड़े निवेश, ऑर्डर और कारोबारी अपडेट जारी किए हैं. वहीं IBM के कमजोर नतीजों के बाद आईटी सेक्टर के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी.
मार्च 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार, FII की हिस्सेदारी बढ़कर 14.55 प्रतिशत हो गई, जो दिसंबर 2025 तिमाही में 14.11 प्रतिशत थी. इसी दौरान प्रमोटरों की हिस्सेदारी भी मामूली बढ़कर 62.86 प्रतिशत हो गई, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की हिस्सेदारी 15.23 प्रतिशत से घटकर 14.13 प्रतिशत रह गई.
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, Fairfax ने पहले जो कीमत तय की थी, वह सरकार की अपेक्षा से कम थी. इसी वजह से उस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली थी. अब कंपनी ने अपने ऑफर में प्रति शेयर कुछ रुपये बढ़ाने की तैयारी की है. हालांकि नई कीमत का खुलासा अभी नहीं किया गया है.
एलारा कैपिटल के अनुसार, HCLTech ने जून तिमाही में रेवेन्यू और मार्जिन दोनों मोर्चों पर बाजार के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया. हालांकि पहली तिमाही में रेवेन्यू में तिमाही आधार पर हल्की गिरावट रही, जिसका कारण बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में पहले से तय प्रोडक्टिविटी कमिटमेंट रहा.
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली रही. दूसरी ओर, निवेशकों आईटी और फार्मा शेयरों में खरीदारी दिखाई. इसके अलावा मेटल सेक्टर के शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली.