अब बाजार की नजर NCLAT की अगली सुनवाई पर रहेगी. इस केस का फैसला JAL के अधिग्रहण की दिशा तय करेगा, जिसका असर संबंधित कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिल सकता है. Adani Enterprises का शेयर सोमवार को मजबूती के साथ करीब 2,140.6 रुपये पर ट्रेड कर रहा है और इसमें 2.58 प्रतिशत की तेजी देखी गई है. पिछले एक हफ्ते में स्टॉक करीब 16.7 प्रतिशत चढ़ा है.
Avenue Supermarts का शेयर 13 अप्रैल को हल्की बढ़त के साथ 4,430.4 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा था. स्टॉक में पिछले एक हफ्ते में 1.56 प्रतिशत की तेजी आई है, जबकि पिछले तीन महीनों में यह करीब 15.6 प्रतिशत चढ़ा है. सालभर में स्टॉक ने करीब 7.23 प्रतिशत का रिटर्न दिया है.
दिल्ली सरकार ने शनिवार को EV पॉलिसी का ड्राफ्ट पब्लिक कंसल्टेशन के लिए जारी किया है. जिसके बाद निवेशकों का रुझान इस सेक्टर की कंपनियों की ओर बढ़ा. Ather Energy के शेयर में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई और यह करीब 906.80 रुपये तक पहुंच गया.
इस पॉलिसी का फोकस केवल पैसेंजर व्हीकल्स तक सीमित नहीं है, बल्कि दोपहिया, तिपहिया और कमर्शियल वाहनों के इलेक्ट्रिफिकेशन पर भी विशेष जोर दिया गया है. दिल्ली सरकार ने इस पॉलिसी का ड्राफ्ट 11 अप्रैल 2026 को जारी किया है और हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं. अंतिम अधिसूचना के बाद यह पॉलिसी लागू होगी और 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी.
इस तेज गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका लगा. बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप कुछ ही मिनटों में करीब 8 लाख करोड़ रुपये घट गया और यह 451 लाख करोड़ रुपये से गिरकर लगभग 443 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. आइए इस गिरावट के पीछे की वजह जानते हैं.
दाखिल खारिज कराने से सरकारी भूमि रिकॉर्ड हमेशा अपडेट और सटीक बने रहते हैं, जिससे यह स्पष्ट रहता है कि संपत्ति का असली मालिक कौन है और उसका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है. इससे भविष्य में होने वाले विवादों की संभावना कम हो जाती है.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार का ट्रेंड फिलहाल पॉजिटिव बना हुआ है, लेकिन हालिया तेज रैली के बाद थोड़ी मुनाफावसूली या कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है. ऐसे में निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी यानी buy on dips की रणनीति अपनानी चाहिए.
सेक्टोरल फ्रंट पर ऑटो, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल्टी, FMCG, PSU बैंक और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में 1-2 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई. हालांकि आईटी सेक्टर में कमजोरी रही और इंडेक्स करीब 1.7 फीसदी गिरकर बंद हुआ.
जांच में सामने आया कि इस स्कीम के जरिए 2,950 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई गई. हालांकि, ब्रोकर को कितना फायदा हुआ, इसका सही आंकड़ा सामने नहीं आ पाया. SEBI ने पाया कि ब्रोकर ने नियमों का उल्लंघन किया है और वह अब ‘फिट एंड प्रॉपर’ मानदंडों पर खरा नहीं उतरता. रेगुलेटर ने कंपनी पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है.
गोल्ड ETF में मार्च में 2,266 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो फरवरी के 5,255 करोड़ रुपये से कम है. इससे साफ है कि हाल की तेजी के बाद इस कैटेगरी में थोड़ी सुस्ती आई है. ‘अन्य स्कीम्स’, जिसमें ETF शामिल हैं, में 30,768 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया. यह फरवरी के 13,879 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा है, जिससे इंडस्ट्री को कुछ सहारा मिला.