रुपये में इस साल अब तक 5 प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी आ चुकी है. RBI पहले ही डॉलर बेचकर बाजार को संभालने की कोशिश कर चुका है, लेकिन अब उसने रणनीति बदलते हुए बैंकों की सट्टेबाजी पर लगाम लगाने का रास्ता चुना है.
शेयर अपने 52-वीक लो से करीब 30 फीसदी चढ़ चुका है. हालांकि, हाल के दिनों में स्टॉक में थोड़ी कमजोरी दिखी है, लेकिन बड़े ऑर्डर मिलने से आने वाले समय में इसमें पॉजिटिव ट्रिगर देखने को मिल सकता है. Life Insurance Corporation of India का इस स्टॉक में 6.21 फीसदी की हिस्सेदारी है. वहीं, विदेशी निवेशकों ने इसमें 6.29 फीसदी की हिस्सेदारी अपने पास रखी है.
निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 2.68 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 2.66 फीसदी गिरकर बंद हुए. सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी PSU बैंक, निफ्टी बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे ज्यादा दबाव में रहे. वहीं निफ्टी मेटल और निफ्टी ऑयल एंड गैस में थोड़ी कम गिरावट दर्ज की गई.
बाजार में कमजोरी के बीच 30 मार्च के लिए कुछ शेयर फोकस में रह सकते हैं. कोल इंडिया ने ज्वाइंट वेंचर बनाया, जेएसडब्ल्यू स्टील अधिग्रहण की तैयारी में है, गुजरात फ्लोरोकेमिकल्स की सब्सिडियरी ने फंड जुटाया. रेलटेल को बड़ा ऑर्डर मिला और जी आर इंफ्रा को हाईवे प्रोजेक्ट मिला है.
FY26 में 8 पेनी स्टॉक्स में भारी गिरावट देखने को मिली है. इनमें 50 फीसदी से लेकर 90 फीसदी तक की गिरावट आई. कम कीमत और ज्यादा रिटर्न के लालच में निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है. पेनी स्टॉक्स में कम लिक्विडिटी, ज्यादा वोलैटिलिटी के चलते मैनिपुलेशन का खतरा रहता है, जिससे अचानक गिरावट आ सकती है.
डेली चार्ट पर लंबी बेयर कैंडल बनी है, जो कमजोरी का संकेत देती है. उन्होंने कहा कि निफ्टी ने 23,465 के आसपास नया लोअर टॉप बनाया है, जो डाउनट्रेंड की कंफर्मेशन करता है. पिछले एक महीने से लोअर टॉप और लोअर बॉटम का पैटर्न जारी है, जो बाजार में कमजोरी को दर्शाता है.
भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स और निफ्टी में 2 फीसदी से ज्यादा कमजोरी रही. बाजार पर मिडिल ईस्ट तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये में गिरावट और FIIs की बिकवाली का दबाव है. इस हफ्ते US-ईरान संबंध, तेल कीमतें और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे.
लंबी अवधि में इसने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है, जिसमें 3 साल में करीब 202 प्रतिशत और 5 साल में करीब 193 प्रतिशत का रिटर्न शामिल है. विदेशी निवेशकों ने इस स्टॉक में करीब 5.59 फीसदी की हिस्सेदारी अपने पास रखी है. इसके साथ ही DIIs के पास भी इसमें 6.15 फीसदी की होल्डिंग है.
दिग्गज निवेशक विजय केडिया के पोर्टफोलियो में कई हाई ग्रोथ शेयर शामिल हैं, जिनमें Patel Engineering, Advait Energy, Elecon Engineering और Neuland Laboratories प्रमुख हैं. इन कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में मजबूत प्रॉफिट CAGR दिखाया है. मजबूत फंडामेंटल और लगातार ग्रोथ के चलते ये शेयर निवेशकों के रडार पर हैं.
डेट-फ्री माइक्रो-कैप कंपनियां वित्तीय रूप से मजबूत होती हैं और उन पर ब्याज का बोझ नहीं होता. वहीं PEG रेश्यो 1 से कम होने का मतलब है कि शेयर अपनी ग्रोथ के मुकाबले सस्ता मिल रहा है, जो वैल्यू निवेशकों के लिए अच्छा मौका बन सकता है.