US-Iran युद्ध से पहले के स्तर पर लौटा कच्चा तेल, ब्रेंट $72 प्रति बैरल के करीब, अब सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से सप्लाई बाधित होने की आशंका घटी है, जिसका असर तेल के दामों पर पड़ा है. WTI और ब्रेंट दोनों लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या कच्चे तेल की नरमी का फायदा भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी मिलेगा?
Crude Oil Latest Price (25 June, 2026) : अमेरिका-ईरान तनाव कम होने और युद्धविराम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर पर लौट आई हैं. ब्रेंट क्रूड फिर 72 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कच्चे तेल में आई इस नरमी का फायदा भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी मिलेगा?
दोनों बेंचमार्क की ताजा कीमत क्या है?
Trading Economics के ताजा आंकड़ों के अनुसार, WTI (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) क्रूड की कीमत 69.552 डॉलर प्रति बैरल है. इसमें 0.788 डॉलर (1.12 फीसदी) की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, ब्रेंट क्रूड का भाव 72.896 डॉलर प्रति बैरल पर है. इसमें 0.844 डॉलर (1.14 फीसदी) की कमजोरी देखने को मिली है.

US-Iran युद्ध से पहले के स्तर पर लौटा कच्चा तेल

28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के पहले ब्रेंट 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कोरोबार कर रहा था. कच्चे तेल की मौजूदा कीमत युद्ध के पहले के भाव के बराबर पर आ गई है.
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट क्यों है?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका-ईरान युद्धविराम और पश्चिम एशिया में तनाव कम होना है. पिछले कुछ समय से बाजार को डर था कि यदि संघर्ष बढ़ा तो होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. युद्ध शुरू होने के कुछ दिनों बाद ईरान ने इस समुद्री रास्तो को बंद कर दिया था, जिससे दुनिया भर लगभग 20 फीसदी तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई थी. अब होर्मुज स्ट्रेट खुलने से गैस-तेल की सप्लाई फिर से युद्ध शुरू होने के पहले के स्तर की ओर बढ़ रही है.
क्या पेट्रोल-डीजल सस्ते होंगे?
सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने से भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत कम नहीं हो जाते. घरेलू ईंधन की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें कच्चे तेल का औसत आयात मूल्य, रुपये-डॉलर की विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, केंद्र और राज्यों के टैक्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति शामिल हैं.
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं और अन्य लागतों में भी बड़ी बढ़ोतरी नहीं होती, तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बन सकती है. हालांकि, फिलहाल केवल कच्चे तेल में आई इस गिरावट के आधार पर ईंधन की कीमतों में तत्काल कटौती की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी. साथ ही सरकार और OMCs की ओर से भी कोई संकेत नहीं दिए गए हैं.
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