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डीजल की कीमत

भारत में डीजल की कीमतों का सीधा असर इकोनॉमी पर होता है, कीमतें तय होने में कच्चे तेल से लेकर टैक्स सिस्टम बड़ी भूमिका निभाता है. डीजल के दाम में बेस प्राइस, ट्रांसपोर्ट खर्च, डीलर कमीशन, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्यों का VAT शामिल होता है. मई 2026 में देश के मेट्रो शहरों में डीजल की कीमत ₹90.67 से लेकर ₹95.25 प्रति लीटर के बीच बनी हुई है. पिछले 15 साल में डीजल की कीमतों में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. पहले डीजल पर सरकार भारी सब्सिडी देती थी, लेकिन 2014 में इसे पूरी तरह बाजार आधारित प्रणाली में शामिल कर दिया गया. इसके बाद से कीमतें वैश्विक क्रूड ऑयल बाजार के हिसाब से तय होने लगीं. 2020 के कोविड काल में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर तेल से बड़ी कमाई की. वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने से भारत में भी डीजल की कीमतों में तेज उछाल आया. भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. देश में पेट्रोल से ज्यादा डीजल की खपत होती है. डीजल की खपत सबसे ज्यादा ट्रांसपोर्ट और खेती के क्षेत्र में होती है. ट्रक, बसें, ट्रैक्टर और सिंचाई के कई उपकरण डीजल पर निर्भर हैं. यही वजह है कि डीजल की मांग लगातार बढ़ती जा रही है और इसका सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है.डीजल महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता. माल ढुलाई महंगी होने से खाने-पीने की चीजों से लेकर निर्माण सामग्री तक लगभग हर वस्तु की कीमत बढ़ जाती है. खेती की लागत बढ़ने से किसानों पर भी दबाव पड़ता है. यही कारण है कि डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को महंगाई बढ़ाने वाला सबसे बड़ा कारक माना जाता है.

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भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता कई अहम घटनाक्रमों से भरा रहेगा. US-Iran तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर नजर रहेगी, जबकि क्रूड ऑयल की कीमतें बाजार की दिशा के लिए अहम रहेंगी. इसके अलावा US Fed की Meeting Minutes, FII flows और गोल्ड प्राइस भी निवेशकों के रडार पर होंगे. इन 5 फैक्टर्स से बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.

देशभर के वाहन चालकों के लिए राहत भरी खबर है. प्राइवेट तेल कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद कंपनी ने यह फैसला लिया है. नई कीमतें देशभर के सभी नायरा पेट्रोल पंपों पर लागू हो गई हैं.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से सप्लाई बाधित होने की आशंका घटी है, जिसका असर तेल के दामों पर पड़ा है. WTI और ब्रेंट दोनों लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या कच्चे तेल की नरमी का फायदा भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी मिलेगा?

पश्चिम एशिया में युद्धविराम (सीजफायर) के ऐलान का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखने लगा है. हाल के दिनों में भू-राजनीतिक तनाव के चलते रिकॉर्ड तेजी दिखाने वाले कच्चे तेल के दाम अब नरम पड़ रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों बेंचमार्क प्री-वॉर स्तर की ओर बढ़ रहे हैं. तेल कीमतों में यह गिरावट भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की संभावना बढ़ सकती है.

देश में बल्क डीजल और रिटेल डीजल की कीमतों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है. जहां आम लोगों को मिलने वाला रिटेल डीजल लगभग 95 रुपये प्रति लीटर है, वहीं कंपनियों को सप्लाई होने वाला बल्क डीजल काफी महंगा बिक रहा है. इसी बीच सरकार ने उद्योगों की डीजल खरीद पर निगरानी बढ़ा दी है. आइए समझते हैं बल्क डीजल क्या होता है और यह इतना महंगा क्यों है?

सरकार ने औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा रिटेल पेट्रोल पंपों से डीजल और पेट्रोल खरीदने पर सख्त नाराजगी जताई है. सरकार का कहना है कि इससे सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है और आम लोगों के लिए ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. राज्यों को ऐसे मामलों पर कार्रवाई करने और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं.

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद ज्यादातर राज्यों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है. सबसे सस्ता पेट्रोल Andaman and Nicobar Islands में 88.66 रुपये प्रति लीटर है, जबकि सबसे महंगा पेट्रोल Andhra Pradesh में 117.75 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. Chittoor, Nellore और Kakinada देश के सबसे महंगे पेट्रोल वाले शहरों में शामिल हैं.

तेल कंपनियों ने सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कर दी. दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पहुंच गया है. 15 मई के बाद से यह चौथी बढ़ोतरी है.

कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखने लगा है. 15 से 23 मई के बीच तेल कंपनियों ने तीन बार पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम बढ़ाए हैं. इसके बावजूद कंपनियों को डीजल पर हर लीटर में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. अलग-अलग राज्यों में VAT की दरें भी ईंधन की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं.

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों के घरेलू बजट पर दिखने लगा है. 15 मई से अब तक ईंधन करीब 5 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है, जिससे सालाना खर्च में लगभग 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है. कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन, फूड डिलीवरी, कैब सर्विस और रोजमर्रा की दूसरी जरूरी चीजें भी महंगी हो सकती हैं.

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम लोगों की चिंता बढ़ गई है. बीते 8 दिनों में तीन बार तेल के दाम बढ़ाए गए, जिससे पेट्रोल 99.51 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. वहीं डीजल भी 92.49 रुपये प्रति लीटर हो चुका है. बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई और ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद देशभर में ईंधन के दाम फिर चर्चा में हैं. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है. इसकी मुख्य वजह राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले अलग-अलग टैक्स और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें हैं.

ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है. यही वजह है कि 15 मई से भारत में पेट्रोल-डीजल प्रति लीटर 3 रुपये महंगे हुए हैं. देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने के बाद सरकार ने घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए पेट्रोल के निर्यात पर प्रति लीटर 3 रुपये का विंडफॉल टैक्स लगाया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर विंडफॉल टैक्स क्या होता है, सरकार इसे क्यों लगाती है और इसका असर किन-किन कंपनियों पर पड़ने वाला है.

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर विंडफॉल टैक्स लगा दिया है. वहीं डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर टैक्स में कटौती की गई है. सरकार का कहना है कि यह कदम देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए उठाया गया है.

करीब चार साल बाद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. बावजूद इसके, भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां ईंधन की कीमतों में सबसे कम बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़े हैं.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है. इसी वजह से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल कंपनियों को पिछले साल जैसी स्थिति में लौटने के लिए ईंधन की कीमतों में करीब 16 फीसदी तक और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है.