क्या है तीन ‘F’ जिस पर सीतारमण का जोर? कहा- एक्साइज ड्यूटी में कटौती से हो सकता है ₹1 लाख करोड़ का नुकसान
सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील - जिसमें उन्होंने ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने, और सोने जैसे गैर-जरूरी आयात से बचने की बात कही है - को बाहरी आर्थिक दबाव को संभालने के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल इंपोर्टर और कंज्यूमर है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को पश्चिम एशिया संकट और एनर्जी मार्केट में उतार-चढ़ाव के चलते बढ़ते वैश्विक दबावों के बीच, उन तीन ‘F’ फ्यूल, फॉरेक्स और फर्टिलाइजर, पर अधिक ध्यान देने की बात कही. मुंबई में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील – जिसमें उन्होंने ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने, और सोने जैसे गैर-जरूरी आयात से बचने की बात कही है – को बाहरी आर्थिक दबाव को संभालने के संदर्भ में देखा जाना चाहिए.
व्यापक चुनौती
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का विदेशी मुद्रा बचाने की अपील, जहां तक संभव हो, बहुत महत्वपूर्ण है. उन्होंने आगे कहा कि ‘3Fs’ पर दिया गया जोर अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद व्यापक चुनौती को दर्शाता है.
कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत होर्मुज जलडमरूमध्य और व्यापक खाड़ी क्षेत्र से जुड़े तनाव के बाद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में रुकावटों का असर महसूस कर रहा है. सीतारमण ने कहा कि कच्चे तेल, उर्वरक और सोने की बढ़ी हुई कीमतें बाहरी क्षेत्र पर दबाव डाल रही हैं.
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल इंपोर्टर और कंज्यूमर है. देश में भी फ्यूल की कीमतें बढ़ी हैं. सोमवार को पेट्रोल और डीजल के रेट फिर से बढ़ा दिए गए. मई महीने में यह चौथी बार कीमतों में बदलाव हुआ है, क्योंकि फ्यूल बेचने वाली कंपनियां ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं.
1 लाख करोड़ का हो सकता है नुकसान
वित्त मंत्री ने राजकोषीय दबाव को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कम होने के असर के कारण FY27 में सरकारी राजस्व को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है.
अटका है 8.1 लाख करोड़ का पेमेंट
MSME सेक्टर के बारे में सीतारमण ने पब्लिक सेक्टर की कंपनियों से कहा कि वे 45 दिन के पेमेंट विंडो का सख्ती से पालन करें. उन्होंने बताया कि अभी करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये के पेमेंट अटके हुए हैं, जिससे छोटे बिजनेस की लिक्विडिटी और वर्किंग कैपिटल पर असर पड़ रहा है.
उन्होंने ‘डर फैलाने’ के प्रति भी आगाह किया और कहा कि भारत को अर्थव्यवस्था में विश्वास बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए, भले ही उसे पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न बाहरी झटकों का सामना करना पड़ रहा हो.