29.6% टूटा LNG आयात, 4.6% घटी ईंधन खपत! महंगे तेल और पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी भारत की मुश्किलें

वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल और वेस्ट एशिया संकट के बीच भारत में ईंधन मांग पर दबाव साफ दिखने लगा है. अप्रैल 2026 में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत 4.6% घटी, जबकि LNG आयात में करीब 30% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

महंगे तेल ने बढ़ाई भारत की टेंशन! Image Credit: Money9 Live

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और पश्चिम एशिया संकट के चलते देश की ऊर्जा मांग गहरे दबाव में आ गई है. अप्रैल 2026 में भारत की पेट्रोलियम उत्पादों की कुल खपत में सालाना आधार पर 4.6% की गिरावट दर्ज की गई है. हैरान करने वाली बात यह है कि खपत घटने के बावजूद, महंगे क्रूड और डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये की वजह से देश का तेल आयात बिल एक साल में करीब 5.7 अरब डॉलर बढ़ गया है.

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में देश की कुल पेट्रोलियम खपत घटकर 19.3 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) रह गई, जो पिछले साल अप्रैल में 20.2 MMT थी.

LNG आयात में 30% की भारी गिरावट

सबसे ज्यादा मार गैस सेक्टर पर पड़ी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की ऊंची कीमतों और सप्लाई में बाधा के चलते अप्रैल में देश की प्राकृतिक गैस की कुल खपत 16.7% घटकर 4,703 MMSCM रह गई. वहीं, देश का एलएनजी (LNG) आयात करीब 29.6% घटकर 1,954 MMSCM पर आ गया.

क्रूड की मात्रा वही, पर चुकाने पड़े ज्यादा

PPAC के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने अप्रैल 2026 में लगभग 21 MMT कच्चे तेल का आयात किया, जिसके लिए 16.3 अरब डॉलर चुकाने पड़े. पिछले साल अप्रैल 2025 में भी लगभग इतना ही (20.98 MMT) तेल आयात हुआ था, लेकिन तब उसकी कीमत सिर्फ 10.66 अरब डॉलर थी. यानी बिना मात्रा बढ़ाए, भारत को केवल एक महीने में लगभग $5.7 अरब (करीब 54,000 करोड़ रुपये) ज्यादा देने पड़े.

इसकी मुख्य वजह बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का पिछले साल के $67.79 से 78% बढ़कर औसतन $120.55 प्रति बैरल पर पहुंचना है. वहीं भारतीय बास्केट क्रूड भी $67.72 से बढ़कर $114.48 प्रति बैरल हो गया.

कमजोर रुपये ने बिगाड़ा खेल

आयात के इस खर्च को बढ़ाने में रुपये की कमजोरी ने आग में घी का काम किया. आरबीआई (RBI) के मुताबिक, अप्रैल 2025 में जो रुपया प्रति डॉलर ₹85.05 के स्तर पर था, वह 30 अप्रैल 2026 तक टूटकर ₹95.24 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. इसी का नतीजा है कि आम उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ना शुरू हो गया है और सरकारी तेल कंपनियों ने महज 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब ₹5 प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं.

यह भी पढ़ें: चौथी बार बढ़े तेल के दाम, पेट्रोल की कीमत 100 के पार, 2.61 रुपए हुआ महंगा, डीजल में 2.71 रुपए का इजाफा

पेट्रोल-डीजल की मांग और औद्योगिक सुस्ती

  • डीजल व पेट्रोल: कुल ईंधन मांग में 43% हिस्सेदारी रखने वाले डीजल की खपत 0.9% की मामूली बढ़त के साथ 8.33 MMT रही, जबकि पेट्रोल की मांग 6.8% बढ़कर 3.68 MMT पर पहुंच गई. एलपीजी (LPG) की खपत 13.1% घटकर 2.21 MMT रह गई.
  • औद्योगिक ईंधन: इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों में सुस्ती के संकेत देते हुए कोलतार (Bitumen) की खपत 30.6%, नैफ्था की मांग 18.9% और फर्नेस ऑयल का इस्तेमाल 9.4% घट गया है.

फिलहाल, अप्रैल 2026 में कच्चे तेल के लिए भारत की विदेशी निर्भरता बढ़कर 88.3% हो गई है, जो यह साफ करता है कि वैश्विक तनाव और डॉलर का उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था को कितनी तेजी से प्रभावित कर सकता है.