अब ‘फ्रीज फंड’ पर अटकी डील! ईरान ने दी समझौता टूटने की चेतावनी, ट्रंप बोले- चाहिए पूरी गारंटी
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम और परमाणु समझौते को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन तेहरान ने चेतावनी दी है कि बातचीत अब भी टूट सकती है. ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका उसके ब्लॉक्ड एसेट्स जारी करने जैसे अहम मुद्दों पर अड़चन पैदा कर रहा है.
US Iran nuclear deal: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले तीन महीनों से चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए जिस समझौते की उम्मीद की जा रही थी, उसमें फिर से खटास पड़ती दिख रही है. ईरान ने सोमवार को दोटूक चेतावनी दी है कि दोनों देशों के बीच चर्चा के केंद्र में रहा संभावित समझौता कभी भी रद्द हो सकता है. ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका पर समझौते की मुख्य शर्तों, खासकर उसके फ्रीज किए गए फंड को रिलीज करने के रास्ते में रुकावटें डालने का आरोप लगाया है.
मौजूदा बातचीत में ईरान का आरोप है कि वह समझौते की टेबल पर आ तो गया है, लेकिन अमेरिका उसका रुका हुआ पैसा छोड़ने में आनाकानी कर रहा है. वहीं अमेरिका का मानना है कि बिना पूरी गारंटी के पैसा छोड़ना जल्दबाजी होगी.
अमेरिका पैसा जारी करने में कर रहा आनाकानी
ईरानी मीडिया ‘तस्नीम न्यूज एजेंसी’ के मुताबिक, ईरान की संपत्ति और फंड को अनफ्रीज करने का मुद्दा दोनों देशों के बीच बातचीत में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है. एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है, “ईरान की ब्लॉक की गई संपत्तियों को जारी करने समेत समझौते की कुछ अहम शर्तों पर अमेरिकी बाधाएं अब भी जारी हैं. इस वजह से इस बात की पूरी आशंका है कि यह समझौता पूरी तरह रद्द हो जाए.”
परमाणु समझौते पर नहीं बनी बात
दूसरी तरफ, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में साफ किया कि अमेरिका इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं करने वाला. रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने खुद सुलहकारों को निर्देश दिए हैं कि वे समझौते के लिए किसी हड़बड़ी में न रहें.
रुबियो ने कहा, “परमाणु वार्ता बेहद तकनीकी मामला है. आप किसी परमाणु समझौते को 72 घंटे के भीतर किसी नैपकिन के पीछे लिखकर तय नहीं कर सकते.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका के इस रुख को क्षेत्र के 7-8 देशों का पूरा समर्थन हासिल है.
ट्रम्प की चेतावनी: इस बार कोई गलती नहीं होगी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए अपनी रणनीति साफ कर दी. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत व्यवस्थित और सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ रही है, लेकिन जब तक कोई समझौता पूरी तरह तय, प्रमाणित और हस्ताक्षरित नहीं हो जाता, तब तक ईरान पर लगी आर्थिक पाबंदियां जारी रहेंगी.
ट्रम्प ने 2015 में ओबामा प्रशासन के समय हुए परमाणु समझौते (JCPOA) को इतिहास का सबसे खराब सौदा बताते हुए कहा, “इस बार कोई गलती नहीं हो सकती. समय हमारे पक्ष में है.” ट्रम्प ने दोहराया कि वह ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे.
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होर्मुज स्ट्रेट पर भी पेंच फंसा
इस बीच, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी दोनों पक्षों में खींचतान जारी है. ट्रम्प ने दावा किया था कि महीनों के संघर्ष के बाद इस समुद्री रास्ते को दोबारा खोलने के लिए दोनों देशों ने एक सहमति पत्र (MoU) का खाका तैयार कर लिया है. हालांकि, ईरानी सुप्रीम लीडर के सैन्य सलाहकार मोहसिन रजाई ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस जलमार्ग पर नियंत्रण ईरान का ‘कानूनी अधिकार’ है.
वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ट्रम्प से बात कर मांग की है कि किसी भी अंतिम समझौते में ईरान के यूरेनियम संवर्धन केंद्रों को पूरी तरह खत्म करने की शर्त शामिल होनी चाहिए. फिलहाल प्रतिबंधों में ढील और ईरान के पैसे की वापसी को लेकर दोनों देशों के बीच गतिरोध बरकरार है.
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