नई ग्रामीण रोजगार योजना के तहत बड़े बदलाव की तैयारी, दिव्यांगों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए शुरू होगा अलग-अलग वेतन सिस्टम

यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, भारत में दिव्यांग लोगों की अनुमानित संख्या 2.68 करोड़ है और इनमें से लगभग 70% ग्रामीण इलाकों में रहते हैं. नए ढांचे के तहत, दिव्यांगजनों वाले परिवारों को लाभार्थी-केंद्रित संपत्तियों के लिए प्राथमिकता दी जाएगी.

ग्रामीण रोजगार गारंटी सिस्टम Image Credit: money9live/AI

भारत का ग्रामीण रोजगार गारंटी सिस्टम एक बड़े बदलाव के दौर से गुजरने वाला है, जिससे लाखों कमजोर वर्ग के मजदूरों को मिलने वाले वेतन और उन्हें सौंपे जाने वाले काम के तरीके में बदलाव आ सकता है. सरकार के दो वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, 1 जुलाई से केंद्र सरकार ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ या VB-GRAM G के तहत दिव्यांगों (PwDs), महिलाओं, बुज़ुर्ग मजदूरों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए दैनिक मजदूरी दर का एक अलग ढांचा लागू करेगी.

अलग-अलग दरों की अनुसूची

मिंट में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम से ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के तहत अलग-अलग ‘दरों की अनुसूची’ (SoR) लागू होगी. इससे उत्पादकता के नियम और काम के नतीजे मजदूरों की क्षमताओं के अनुरूप होंगे, जिससे उन्हें बिना किसी नुकसान के पूरा तय वेतन मिल सकेगा. दिव्यांगजनों के लिए दिशा-निर्देश और भी आगे जाते हैं. उन्हें पूरा दैनिक वेतन पाने के लिए निश्चित घंटों तक काम करने की जरूरत नहीं होगी.

अधिकारियों ने बताया कि इसके बजाय, काम उनकी व्यक्तिगत क्षमताओं और शारीरिक स्थिति के आधार पर सौंपा जाएगा. उन्हें अधिक मेहनत वाले कामों के बजाय सुपरवाइजरी, सपोर्ट और आजीविका से जुड़े कामों की ओर भी प्रेरित किया जाएगा.

ग्रामीण रोजगार ढांचे में बड़ा बदलाव

यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, भारत में दिव्यांग लोगों की अनुमानित संख्या 2.68 करोड़ है और इनमें से लगभग 70% ग्रामीण इलाकों में रहते हैं. यह ग्रामीण रोजगार ढांचे में एक बड़े बदलाव के साथ भी हो रहा है, क्योंकि VB-GRAM G, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) के ढांचे की जगह ले रहा है. MGNREGA के तहत रोजगार की कानूनी गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर रहा है, जबकि पारंपरिक उत्पादकता मानकों ने अक्सर कमजोर वर्गों को पूरी भागीदारी से बाहर रखा है.

किसे दी जाएगी प्राथमिकता?

नए ढांचे के तहत, दिव्यांगजनों वाले परिवारों को लाभार्थी-केंद्रित संपत्तियों के लिए प्राथमिकता दी जाएगी और उन्हें उनके घर के पास काम दिया जाएगा. यह ढांचा खास मामलों में उपस्थिति दर्ज करने के वैकल्पिक तरीके और दिव्यांग-अनुकूल काम की खास श्रेणियां भी पेश करता है.

ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड

मिंट ने एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया कि दिव्यांग श्रमिकों की पहचान करने, उनके अधिकारों को ट्रैक करने और उन्हें उपयुक्त काम देने में मदद के लिए विशेष ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड भी जारी किए जाएंगे. इन जॉब कार्ड का रंग दूसरे श्रमिकों को जारी किए जाने वाले कार्ड से अलग होगा. प्रस्तावित SoR (दरों की अनुसूची) पूरी अधिसूचित दैनिक मजदूरी के भुगतान की गारंटी देता है, जो वर्तमान में राज्यों में 241 रुपये से 400 रुपये प्रति दिन के बीच है.

दिव्यांगजनों (PwDs) के लिए विशिष्ट दरें अभी तय की जानी हैं. इस सुधार का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण रोजगार के दायरे को बढ़ाना है.

आजीविका-सहायक डिजाइन

VB-GRAM G को आजीविका-सहायक बुनियादी ढांचा बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें कौशल विकास और प्रशिक्षण केंद्र, वर्क शेड, स्वयं-सहायता समूह भवन, पशुधन और मत्स्य पालन बुनियादी ढांचा, ग्रामीण बाजार, भंडारण इकाइयां और मूल्य-वर्धन केंद्र शामिल हैं.

योजना का वित्तीय ढांचा

कार्यक्रम का वित्तीय ढांचा भी MGNREGA से अलग है. जहां पहले केंद्र सरकार इस योजना के तहत मजदूरी की 100 फीसदी खर्च उठाती थी, वहीं VB-GRAM G के तहत वह अधिकांश राज्यों में कुल लागत का 60 फीसदी और पूर्वोत्तर तथा हिमालयी राज्यों में 90 फीसदी फंड देगी, जबकि बाकी खर्च राज्य उठाएंगे. चालू वित्त वर्ष में ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के तहत रोजगार बढ़ रहा है. 24 जून तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में यह संख्या 1.74 करोड़ थी, जो मई में बढ़कर 2.74 करोड़ और जून में 2.86 करोड़ हो गई.

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