पति ने बताई ₹11 हजार आय, कोर्ट ने फिर भी लगाया ₹25 हजार भरण-पोषण
दिल्ली हाई कोर्ट ने ₹11,000 मासिक आय का दावा करने वाले पति को पत्नी और बच्चे के लिए ₹25,000 मासिक भरण-पोषण देने का आदेश बरकरार रखा. कोर्ट ने कमाई की क्षमता और योग्यता को ध्यान में रखते हुए हर साल 5% बढ़ोतरी भी मंजूर की.
Highlights
- ₹11 हजार आय वाले पति को ₹25 हजार भरण-पोषण देना होगा
- पत्नी और नाबालिग बच्चे के लिए राशि तय हुई
- भरण-पोषण में हर साल पांच फीसदी बढ़ोतरी होगी
दिल्ली हाई कोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने ₹11,000 प्रति महीने कमाई का दावा करने वाले पति को पत्नी और नाबालिग बेटे के लिए कुल ₹25,000 मासिक भरण-पोषण देने के आदेश को बरकरार रखा है. इसके साथ ही इस राशि में हर साल 5 फीसदी की बढ़ोतरी भी होगी. कोर्ट ने कहा कि केवल बताई गई आय के आधार पर किसी व्यक्ति की भुगतान क्षमता तय नहीं की जा सकती.
सिर्फ घोषित आय देखकर फैसला नहीं होगा
मामले में पति ने दावा किया था कि उसकी मासिक आय केवल ₹11,000 है. उसका कहना था कि इतनी कम कमाई में ₹25,000 मासिक भरण-पोषण देना उसके लिए संभव नहीं है. हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया.
कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण तय करते समय व्यक्ति की वास्तविक आर्थिक क्षमता को देखा जाना जरूरी है. इसके लिए उसकी शैक्षणिक योग्यता, पेशेवर अनुभव, काम करने की क्षमता और संभावित आय जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा सकता है.
पति की योग्यता भी बनी आधार
इस मामले में अदालत के सामने यह बात भी आई कि पति के पास स्कॉटलैंड से हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट की योग्यता है. कोर्ट ने माना कि ऐसी शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता रखने वाला व्यक्ति अपनी बताई गई ₹11,000 की आय से ज्यादा कमाने की क्षमता रख सकता है.
अदालत ने यह भी माना कि सिर्फ कम आय दिखाकर भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता. पत्नी और बच्चे की जरूरतों को देखते हुए पति की कमाई की वास्तविक क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है.
पत्नी और बच्चे के लिए ₹25 हजार
दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्नी और नाबालिग बेटे के लिए कुल ₹25,000 प्रति महीने भरण-पोषण की राशि को उचित माना. इसका उद्देश्य परिवार की जरूरी जरूरतों को पूरा करना है. अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि बच्चे की पढ़ाई, भोजन, कपड़े और दूसरी आवश्यकताओं पर लगातार खर्च होता है.
कोर्ट ने माना कि महंगाई बढ़ने के साथ समय के साथ भरण-पोषण की तय राशि की वास्तविक कीमत भी कम हो सकती है. इसलिए इसमें हर साल 5 फीसदी की बढ़ोतरी का प्रावधान उचित है.
हर साल 5% बढ़ेगी रकम
अदालत ने भरण-पोषण राशि में 5 फीसदी सालाना बढ़ोतरी को भी बरकरार रखा. इसका मतलब है कि शुरुआती ₹25,000 की राशि हर साल बढ़ेगी. यह व्यवस्था महंगाई और बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई है.
इस फैसले से साफ है कि भरण-पोषण के मामलों में अदालत केवल पति की बताई गई आय को ही अंतिम आधार नहीं मानती. व्यक्ति की योग्यता और कमाने की क्षमता भी महत्वपूर्ण हो सकती है.
फैसले का क्या मतलब है?
यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण है, जहां पति अपनी आय कम बताकर भरण-पोषण की जिम्मेदारी कम करने की कोशिश करता है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी और बच्चे के अधिकारों का आकलन करते समय वास्तविक कमाई की क्षमता और परिवार की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाएगा. साथ ही, महंगाई को देखते हुए समय-समय पर भरण-पोषण राशि में बढ़ोतरी का प्रावधान भी किया जा सकता है.
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