कमोडिटी डेरिवेटिव्स में बढ़ेगी लिक्विडिटी? SEBI कर रहा पोजिशन लिमिट की समीक्षा, जल्द आएंगे नए नियम!

SEBI कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट में लिक्विडिटी और ट्रेडिंग बढ़ाने के लिए नॉन-एग्री कॉन्ट्रैक्ट्स की पोजिशन लिमिट की समीक्षा कर रहा है. SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे के मुताबिक, इस मामले में कंसल्टेशन पूरा हो चुका है और जल्द गाइडलाइंस आ सकती हैं. रेगुलेटर फिजिकल सेटलमेंट, GST से जुड़ी दिक्कतों और निवेशक जागरूकता पर भी काम कर रहा है.

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Highlights

  • SEBI नॉन-एग्री कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स की पोजिशन लिमिट की समीक्षा कर रहा है.
  • SEBI की ओर से इस मामले में कंसल्टेशन भी पूरा किया जा चुका है.
  • जानें लिक्विडिटी, फिजिकल सेटलमेंट, GST और निवेशक जागरूकता को लेकर क्या है रेगुलेटर का प्लान.

कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट में लिक्विडिटी और ट्रेडिंग को बढ़ाने के लिए बाजार नियामक SEBI पोजिशन लिमिट की समीक्षा कर रहा है. SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि नॉन-एग्री कॉन्ट्रैक्ट्स में पोजिशन लिमिट को लेकर काम चल रहा है, जिसका मकसद रिस्क कंट्रोल को बनाए रखते हुए मार्केट में ज्यादा गहराई लाना है. SEBI की ओर से इस मामले में कंसल्टेशन भी पूरा किया जा चुका है और आगे गाइडलाइंस जारी की जाएंगी.

कमोडिटी मार्केट में पोजिशन लिमिट क्यों अहम?

पोजिशन लिमिट यह तय करती है कि कोई मार्केट पार्टिसिपेंट किसी कॉन्ट्रैक्ट में कितनी अधिक पोजिशन रख सकता है. SEBI अब इस व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है, ताकि कमोडिटी मार्केट में ज्यादा भागीदारी और लिक्विडिटी को बढ़ावा दिया जा सके, लेकिन इसके साथ रिस्क मैनेजमेंट भी बना रहे.

एग्री कमोडिटी में फिजिकल सेटलमेंट पर भी नजर

तुहिन कांत पांडे ने कहा कि कुछ एग्री कमोडिटी में शुरुआत से ही फिजिकल सेटलमेंट लागू होने से कॉन्ट्रैक्ट के डेवलप होने में दिक्कत आ सकती है. ऐसे में फेज्ड अप्रोच अपनाई जा सकती है, जिसमें कॉन्ट्रैक्ट को पहले पर्याप्त समय दिया जाए और बाद में फिजिकल सेटलमेंट को जरूरी किया जाए.

SEBI ने इससे पहले चुनिंदा एग्री कमोडिटी डेरिवेटिव्स में फिजिकल सेटलमेंट को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर कंसल्टेशन पेपर भी जारी किया था.

GST से जुड़ी दिक्कतों पर भी काम

SEBI कमोडिटी मार्केट में मौजूद दूसरी दिक्कतों को कम करने पर भी काम कर रहा है. इसके तहत उन मार्केट पार्टिसिपेंट्स के साथ बातचीत की जा रही है, जो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के जरिए कमोडिटी देते या प्राप्त करते हैं और उन्हें GST से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

किसानों और MSME तक पहुंच बढ़ाने की तैयारी

SEBI चेयरमैन ने कहा कि कमोडिटी मार्केट में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिर्फ ट्रेडिंग को आसान बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए. इसका डिजाइन किसानों, प्रोड्यूसर्स, प्रोसेसर्स, MSME, कमर्शियल यूजर्स और फिजिकल हेजर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर होना चाहिए.

Project Jagrook से बढ़ेगी जागरूकता

SEBI Project Jagrook के तहत कमोडिटी डेरिवेटिव्स को लेकर निवेशक जागरूकता बढ़ाने पर भी फोकस कर रहा है. इसके दायरे में किसान, Farmer Producer Organisations यानी FPOs, MSME, हेजर्स और दूसरे मार्केट यूजर्स शामिल होंगे.

SEBI के मुताबिक, सिर्फ मार्केट तक पहुंच होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसमें शामिल लोगों को कमोडिटी डेरिवेटिव्स के फायदे और जोखिम दोनों की जानकारी होना जरूरी है. SEBI ने 1 अक्टूबर 2026 को Project Jagrook के तहत स्टॉक ब्रोकर्स के ट्रेडिंग ऐप और वेबसाइट पर निवेशक जागरूकता संदेश दिखाने से जुड़ा सर्कुलर भी जारी किया है.

FPI के लिए भी खुला कमोडिटी मार्केट

हाल ही में SEBI ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI को फिजिकली सेटल्ड नॉन-एग्री कमोडिटी डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सा लेने की अनुमति दी है, हालांकि इसके लिए कुछ सेफगार्ड्स लागू रहेंगे. इस कदम का उद्देश्य कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट में विदेशी भागीदारी और लिक्विडिटी को बढ़ाना है.

कैश मार्केट को गहरा करने पर भी फोकस

SEBI कैश मार्केट में भी ज्यादा लिक्विडिटी और भागीदारी बढ़ाने पर काम कर रहा है. इसके लिए सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग, हेजिंग और आर्बिट्राज जैसे क्षेत्रों को मजबूत करने पर जोर है. SEBI के मुताबिक, कैश और डेरिवेटिव्स मार्केट के बीच बेहतर तालमेल से प्राइस डिस्कवरी को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.

रिस्क कंट्रोल से समझौता नहीं

SEBI चेयरमैन ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों को आसान बनाने का मतलब अनुपालन को कमजोर करना नहीं है. क्लाइंट फंड, मार्जिन, रिपोर्टिंग और निगरानी से जुड़े मजबूत कंट्रोल आगे भी जरूरी रहेंगे. यानी रेगुलेटर का फोकस मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने के साथ मार्केट इंटीग्रिटी और निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने पर रहेगा.

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