3 बार रिजेक्ट हुआ अमेरिका का वीजा, आज हैं ट्रंप के खास; जानें कौन हैं 1.3 अरब डॉलर के मालिक संजय मेहरोत्रा
संजय मेहरोत्रा को 1976 में अमेरिका जाने के लिए उनका स्टूडेंट वीजा तीन बार रिजेक्ट हुआ, लेकिन पिता की कोशिश से आखिरकार उन्हें Berkeley में पढ़ाई का मौका मिला. आगे चलकर उन्होंने SanDisk की सह स्थापना की और 2017 में Micron के CEO बने.
Highlights
- संजय मेहरोत्रा को 1976 में अमेरिका जाने के लिए तीन बार वीजा रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था.
- Berkeley से पढ़ाई के बाद उन्होंने SanDisk की सह स्थापना की और 2017 में Micron Technology के CEO बने.
- AI Boom और मेमोरी चिप की बढ़ती मांग से Micron को फायदा हुआ और मेहरोत्रा अरबपति क्लब में शामिल हो गए.
संजय मेहरोत्रा की कहानी उन भारतीयों के लिए खास है जो बड़े सपने लेकर अमेरिका जाना चाहते हैं. 1976 में अमेरिका जाने के लिए उनका वीजा तीन बार रिजेक्ट हुआ था. हालांकि बाद में उनके पिता की कोशिश से उन्हें स्टूडेंट वीजा मिल गया और वह पढ़ाई के लिए अमेरिका पहुंचे. आज वही संजय मेहरोत्रा Micron Technology के CEO हैं और अमेरिका के सेमीकंडक्टर सेक्टर के बड़े चेहरों में गिने जाते हैं. 2026 में उनकी संपत्ति करीब 1.3 अरब डॉलर बताई गई है.
कानपुर में हुआ जन्म
संजय मेहरोत्रा का जन्म 1958 में उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था. उनका परिवार मीडिल क्लास से था और उनके पिता चाहते थे कि बेटा आगे की पढ़ाई अमेरिका में करें. संजय ने भारत में पढ़ाई शुरू की और आगे चलकर अमेरिका की यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने की तैयारी की. उन्हें University of California Berkeley में पढ़ाई का मौका मिला. लेकिन अमेरिका जाने से पहले उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती वीजा की थी.
तीन बार रिजेक्ट हुआ US वीजा
संजय मेहरोत्रा को 1976 में अमेरिका जाने के लिए तीन बार वीजा रिजेक्शन का सामना करना पड़ा. हर बार निराशा के बाद भी उनके पिता ने अमेरिका भेजने का सपना नहीं छोड़ा. रिपोर्ट्स के अनुसार उनके पिता ने अमेरिकी दूतावास में काउंसलर के सामने करीब 20 मिनट तक अपने बेटे की पढ़ाई को लेकर बात की. आखिरकार संजय को अमेरिका जाने का मौका मिला. इसके बाद उन्होंने Berkeley में कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की.
Intel से शुरू हुआ चिप की दुनिया का सफर
अमेरिका पहुंचने के बाद संजय मेहरोत्रा ने टेक्नोलॉजी की दुनिया में कदम रखा. उन्होंने Intel में काम किया और इसी दौरान उनकी दिलचस्पी मेमोरी चिप और चिप डिजाइन में बढ़ी. आगे चलकर उन्होंने Eli Harari और Jack Yuan के साथ 1988 में SanDisk की शुरुआत की. कंपनी ने फ्लैश मेमोरी टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. SanDisk से जुड़े उनके काम ने उन्हें मेमोरी चिप इंडस्ट्री में एक खास पहचान दिलाई.
SanDisk से Micron तक पहुंचे
संजय मेहरोत्रा ने SanDisk में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं और 2011 में कंपनी के CEO बने. उनके नेतृत्व में कंपनी ने फ्लैश मेमोरी कारोबार को आगे बढ़ाया. 2016 में Western Digital ने SanDisk का करीब 16 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया. इसके बाद 2017 में संजय मेहरोत्रा को Micron Technology का CEO बनाया गया. तब से वह कंपनी के कारोबार और मेमोरी चिप रणनीति को आगे बढ़ा रहे हैं.
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ट्रंप के साथ दिखे संजय मेहरोत्रा
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में अमेरिका के निवेश और घरेलू चिप प्रोडक्शन को बढ़ावा देने की नीति के बीच संजय मेहरोत्रा की भूमिका और अहम हुई है. मई 2026 में वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ चीन जाने वाले कारोबारी प्रतिनिधिमंडल में शामिल हुए थे. वह इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल भारतीय मूल के प्रमुख टेक अधिकारियों में से एक थे.
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