Ram Mandir CEO: 5585 लोगों ने किया आवेदन, IAS-IPS से लेकर कॉरपोरेट प्रोफेशनल तक रेस में
अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के पहले फुल टाइम CEO पद के लिए 5585 आवेदन मिले हैं. इनमें रिटायर्ड IAS और IPS अधिकारी, पूर्व सैन्य अधिकारी, कॉरपोरेट प्रोफेशनल और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट शामिल हैं. स्क्रीनिंग के बाद 16 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए चुना गया. राम मंदिर का संचालन अब केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है.

अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के पहले फुल टाइम CEO पद को लेकर बड़ी दिलचस्पी देखने को मिली है. इस पद के लिए कुल 5585 आवेदन मिले हैं. इनमें रिटायर्ड IAS और IPS अधिकारी, पूर्व सैन्य अधिकारी, कॉरपोरेट प्रोफेशनल और टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग शामिल हैं. कई दौर की स्क्रीनिंग के बाद 16 उम्मीदवारों को आमने- सामने इंटरव्यू के लिए बुलाया गया. इंटरव्यू 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में हुए. इतनी बड़ी संख्या में आवेदन बताता है कि राम मंदिर अब केवल धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं रह गया है.
राम मंदिर के CEO का काम इतना खास क्यों
राम मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ सकती है. ऐसे में मंदिर के संचालन में केवल पूजा और दान की व्यवस्था संभालना काफी नहीं होगा. CEO को श्रद्धालुओं, सुरक्षा एजेंसियों, सरकारी विभागों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के साथ तालमेल करना होगा. निर्माण परियोजनाओं, तकनीक, दान और वित्तीय व्यवस्था पर भी नजर रखनी होगी. इसी वजह से इस पद की जिम्मेदारी किसी बड़े संस्थान के मैनेजमेंट जैसी हो सकती है.
IAS अधिकारियों के लिए क्यों आकर्षक है पद
रिटायर्ड IAS अधिकारियों के लिए मंदिर ट्रस्ट का CEO पद इसलिए खास हो सकता है क्योंकि इसमें प्रशासन से जुड़ी कई जिम्मेदारियां शामिल हैं. IAS अधिकारी अपने करियर में अलग- अलग विभागों के बीच तालमेल और क्राइसिस मैनेजमेंट जैसे काम करते हैं. राम मंदिर में भी कई सरकारी और प्राइवेट एजेंसियों के साथ तालमेल की जरूरत होगी. इसके अलावा अयोध्या में होने वाले बड़े आयोजनों के दौरान व्यवस्था बनाए रखना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी. इस पद के जरिए रिटायर्ड अधिकारी एक बड़े और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित संस्थान से जुड़े रह सकते हैं.
IPS का अनुभव भी काम आएगा
राम मंदिर में बड़ी भीड़ को संभालना और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना बेहद अहम है. इसी वजह से रिटायर्ड IPS अधिकारियों का अनुभव इस पद के लिए उपयोगी हो सकता है. उन्हें VIP मूवमेंट, निगरानी, आपात स्थिति और कई सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल का अनुभव रहता है. पूर्व सैन्य अधिकारियों के पास भी लॉजिस्टिक्स, अनुशासन, संकट प्रबंधन और बड़ी संख्या में लोगों के प्रबंधन का अनुभव होता है. ये क्षमताएं मंदिर जैसे बड़े तीर्थ स्थल के संचालन में काम आ सकती हैं.
कॉरपोरेट और टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल भी दावेदार
राम मंदिर का संचालन आने वाले समय में तकनीक पर भी ज्यादा निर्भर हो सकता है. डिजिटल दान, ऑनलाइन सर्विस, श्रद्धालुओं के लिए विजिटर मैनेजमेंट, डेटा सिस्टम और फाइनेंस कंट्रोल जैसे काम महत्वपूर्ण होंगे. ऐसे में कॉरपोरेट और टेक्नोलॉजी क्षेत्र से आने वाले उम्मीदवारों को भी फायदा मिल सकता है. इन क्षेत्रों के प्रोफेशनल आधुनिक HR सिस्टम और डिजिटल व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद कर सकते हैं. इसलिए केवल सरकारी प्रशासन का अनुभव ही इस पद के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता है.
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CEO के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी
मंदिर ट्रस्ट का काम सरकारी विभाग से अलग होता है. CEO किसी सरकारी अधिकारी की तरह केवल आदेश देकर काम नहीं करा सकता. उसे ट्रस्ट के सदस्यों, संतों, धार्मिक अधिकारियों, सरकारी विभागों, पुलिस, कर्मचारियों, ठेकेदारों और श्रद्धालुओं के साथ मिलकर काम करना होगा. इसके लिए प्रशासनिक क्षमता के साथ धार्मिक परंपराओं की समझ और सभी पक्षों के साथ संवाद करने की क्षमता जरूरी होगी. यानी CEO के लिए मैनेजमेंट और संवेदनशीलता दोनों का संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी.