शिकारियों के साथ NGO का कथित कनेक्शन? 10 तेंदुओं की खाल ने खोला बड़ा राज
10 तेंदुओं की खाल बरामद होने के बाद मध्य प्रदेश STSF ने Wildlife SOS और कथित शिकार नेटवर्क के बीच संभावित गठजोड़ की जांच शुरू की है. NGO के CEO को नोटिस जारी कर 17 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया गया है.
Highlights
- 10 तेंदुओं की खाल मिलने पर STSF ने जांच शुरू की
- Wildlife SOS और शिकार नेटवर्क के गठजोड़ की जांच जारी
- CEO कार्तिक सत्यनारायण को पूछताछ के लिए नोटिस मिला
मध्य प्रदेश में 10 तेंदुओं की खाल बरामद होने के बाद वन्यजीव संरक्षण संगठन Wildlife SOS और कथित अवैध शिकार नेटवर्क के बीच संभावित गठजोड़ को लेकर जांच शुरू हो गई है. मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) इस मामले की जांच कर रही है. जांच एजेंसियों के अनुसार, संगठन से जुड़े लोगों पर कथित तौर पर शिकार और वन्यजीव बरामदगी की कार्रवाई को मंचित करने के गंभीर आरोप लगे हैं. हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल जांच का हिस्सा हैं और इनकी पुष्टि होना बाकी है.
SOS ने कहा- आरोप गलत
वहीं, वाइल्डलाइफ SOS ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. संस्था का कहना है कि उसके पास अपने काम और सरकारी एजेंसियों के साथ सहयोग से जुड़े रिकॉर्ड और पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. संस्था ने कहा कि वह किसी भी वैध जांच में पूरा सहयोग करेगी.
NGO की पृष्ठभूमि
Wildlife SOS की स्थापना वर्ष 1995 में कार्तिक सत्यनारायण और गीता शेषमणि द्वारा की गई थी. यह संगठन विभिन्न राज्य सरकारों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) के माध्यम से भारत के विभिन्न हिस्सों में कई वन्यजीव बचाव केंद्र (Rescue Centres) संचालित करता है.
वर्तमान में अधिकारी इन समझौतों की भी जांच कर रहे हैं. इनमें भोपाल में प्रस्तावित भालू बचाव केंद्र (Bear Rescue Centre) के लिए लंबित MoU भी शामिल है, जिसकी समीक्षा वर्तमान वन्यजीव तस्करी से जुड़े आरोपों के मद्देनज़र की जा रही है. पूरे मामले में पूछे जाने पर भी कार्तिक सत्यनारायण और न ही सचिव गीता शेषमणि ने कोई प्रतिक्रिया दी है.
हाईवे पर 10 तेंदुओं की खाल के साथ चार गिरफ्तार
मामला 23 जुलाई को सामने आया, जब ग्वालियर-आगरा हाईवे पर चार कथित शिकारियों को 10 तेंदुओं की खाल के साथ गिरफ्तार किया गया. Wildlife SOS ने अपनी ‘Forest Watch’ इकाई के जरिए इस कार्रवाई का श्रेय लिया था.
इसके बाद मध्य प्रदेश STSF ने समानांतर जांच शुरू की. जांच अधिकारियों के मुताबिक, दो प्रमुख संदिग्ध भगवान सिंह उर्फ सलीम और उसका सहयोगी वसीम कथित तौर पर Wildlife SOS से जुड़े थे. रिपोर्ट के अनुसार, भगवान सिंह पिछले करीब पांच वर्षों से संगठन के साथ काम कर रहा था.
‘स्टेज्ड सीज़र’ के आरोपों की जांच
जांच अधिकारियों का दावा है कि उन्हें कुछ डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनकी जांच के आधार पर Wildlife SOS के CEO कार्तिक सत्यनारायण की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है. अधिकारियों का आरोप है कि कथित तौर पर शिकार की घटनाओं को इस तरह तैयार किया गया कि बाद में उनकी बरामदगी को एंटी-पोचिंग कार्रवाई के तौर पर पेश किया जा सके.
जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या ऐसी कार्रवाई का इस्तेमाल संगठन की एंटी-पोचिंग छवि मजबूत करने और दान या अनुदान हासिल करने के लिए किया गया.
जंगलों में मिले वन्यजीव अवशेष
जांच के दौरान शिवपुरी और मुरैना के जंगलों में कुछ ऐसे स्थान मिलने की बात सामने आई है, जहां तेंदुओं के अवशेष जमीन में दबे हुए पाए गए. इन अवशेषों को डीएनए जांच के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) भेजा गया है.
इसके अलावा अधिकारियों ने हरियाणा से लाए गए तीन लेग-होल्ड ट्रैप भी बरामद किए हैं. जांच में इन ट्रैप को कथित तौर पर शिकार से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचाए जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है.
रिकॉर्ड के मुताबिक, भगवान सिंह और वसीम वर्ष 2023 में तमिलनाडु के सत्यमंगलम वन क्षेत्र में हुई एक अन्य वन्यजीव बरामदगी के दौरान भी मौजूद थे. उस कार्रवाई का श्रेय भी Wildlife SOS की ओर से लिया गया था.
CEO को 17 अगस्त को पेश होने का नोटिस
मध्य प्रदेश STSF ने Wildlife SOS के CEO कार्तिक सत्यनारायण को औपचारिक नोटिस जारी किया है. उन्हें 17 अगस्त को शिवपुरी में जांच अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए कहा गया है.
मध्य प्रदेश की मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक समीता राजौरा के मुताबिक, क्षेत्र के जंगलों को सुरक्षित रखने और संभावित वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की जांच के लिए Wildlife Crime Control Bureau (WCCB) के साथ समन्वय किया जा रहा है.
1995 में हुई थी Wildlife SOS की स्थापना
Wildlife SOS की स्थापना 1995 में कार्तिक सत्यनारायण और गीता शेषमणि ने की थी. संगठन विभिन्न राज्यों में सरकारों के साथ समझौता ज्ञापनों के जरिए वन्यजीव बचाव केंद्र संचालित करता है.
मौजूदा जांच के बीच इन समझौतों की भी समीक्षा की जा रही है. इनमें भोपाल में प्रस्तावित भालू बचाव केंद्र से संबंधित लंबित MoU भी शामिल है. इस मामले में प्रतिक्रिया के लिए कार्तिक सत्यनारायण और संगठन की सचिव गीता शेषमणि से संपर्क किए जाने की बात कही गई है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है. फिलहाल STSF की जांच जारी है और लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.
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