Rupee Rate Today: रुपये में लगातार दूसरे दिन तेजी, डॉलर के मुकाबले 94.94 पर पहुंचा
रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे मजबूत होकर 94.94 के स्तर पर बंद हुआ. यह करीब 2 महीने का सबसे मजबूत स्तर है. रुपये को मजबूत घरेलू आर्थिक आंकड़ों, विदेशी निवेश और RBI के संभावित हस्तक्षेप से सहारा मिला. अगस्त में विदेशी निवेशकों ने करीब 3.1 अरब डॉलर का निवेश किया.

भारतीय रुपये में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन मजबूती देखने को मिली. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 28 पैसे मजबूत होकर 94.94 के स्तर पर बंद हुआ. यह करीब 2 महीने का सबसे मजबूत स्तर है. बाजार में रुपये को घरेलू आर्थिक आंकड़ों और विदेशी निवेश से सपोर्ट मिला. बाजार जानकारों के मुताबिक, RBI की ओर से संभावित हस्तक्षेप से भी रुपये को मजबूती मिली. हालांकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और कमजोर घरेलू बाजार ने रुपये की तेजी को सीमित रखा.
94.94 पर पहुंचा रुपया
इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 95.06 के स्तर पर खुला. कारोबार के दौरान रुपये ने 94.79 का दिन का ऊपरी स्तर और 95.10 का निचला स्तर देखा. कारोबार खत्म होने पर रुपया 94.94 के स्तर पर बंद हुआ. पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 21 पैसे मजबूत होकर 95.22 पर बंद हुआ था. इस तरह मंगलवार को भी रुपये में मजबूती बनी रही.
RBI के हस्तक्षेप से मिला सपोर्ट
बाजार जानकारों के मुताबिक, रुपये को संभावित RBI हस्तक्षेप से भी सपोर्ट मिला है. इसके अलावा घरेलू आर्थिक आंकडे़ मजबूत रहने से भी रुपये की स्थिति बेहतर हुई है. हाल में MSCI से जुडे़ विदेशी निवेश से भी रुपये को कुछ समय के लिए सहारा मिला. हालांकि बाजार में विदेशी निवेशकों की एक्टिविटी अभी पूरी तरह पॉजिटिव नहीं हुई हैं. इसलिए रुपये की आगे की चाल कई घरेलू और वैश्विक संकेतकों पर निर्भर करेगी.
विदेशी निवेश से रुपये को सपोर्ट
अगस्त में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में करीब 3.1 अरब डॉलर का निवेश किया. यह पिछले 23 महीनों में सबसे मजबूत मासिक निवेश रहा. अगस्त लगातार दूसरा महीना रहा जब विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदारी की. हालांकि 2026 में अब तक विदेशी निवेशक करीब 24.6 अरब डॉलर के शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं. .
क्रूड ऑयल की तेजी बनी चिंता
रुपये की मजबूती के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमत दबाव का कारण बनी हुई है. मंगलवार को Brent crude की कीमत करीब 1.97 फीसदी बढ़कर 92.27 डॉलर प्रति बैरल हो गई. अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है.
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घरेलू अर्थव्यवस्था से मिला सपोर्ट
भारत की आर्थिक स्थिति से जुडे़ आंकडे़ रुपये के लिए सकारात्मक रहे हैं. अप्रैल से जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी है. यह अनुमान से बेहतर आर्थिक वृद्धि है. वहीं वित्त वर्ष 2026 27 में जुलाई के अंत तक केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा पूरे साल के लक्ष्य का 26.8 फीसदी रहा. इन आंकड़ों से घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती का संकेत मिलता है.