सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड इन्वेस्टर्स के लिए बड़ी खबर! 1 लाख रुपये का इन्वेस्टमेंट बना इतना; मिला 361% रिटर्न
SGB 2018-19 सीरीज VI के इन्वेस्टर्स के लिए बड़ी खबर है. इस सीरीज के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की कीमत 15,102 रुपये प्रति ग्राम तय की गई है. 3,276 रुपये की इश्यू प्राइस के मुकाबले इन्वेस्टर्स को करीब 361% का एब्सोल्यूट रिटर्न मिला है. यानी अगर किसी इन्वेस्टर ने 1 लाख रुपये का निवेश किया था, तो उसकी वैल्यू बढ़कर करीब 4.61 लाख रुपये हो गई है.

Sovereign Gold Bond: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी SGB में निवेश करने वाले इन्वेस्टर के लिए बड़ी खबर है. Reserve Bank of India (RBI) ने SGB 2018-19 सीरीज VI के प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की प्राइस 15,102 रुपये प्रति यूनिट तय की है. इन्वेस्टर इस ट्रेंच को 12 अगस्त 2026 से प्रीमैच्योरली रिडीम कर सकेंगे. इस रिडेम्पशन प्राइस की तुलना इश्यू प्राइस से की जाए तो इन्वेस्टर को गोल्ड प्राइस में बढ़ोतरी से करीब 361 फीसदी का एब्सोल्यूट रिटर्न मिला है.
8 साल की अवधि पूरी होने पर रिडीम किया जाता है
RBI के नियमों के मुताबिक, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को सामान्य तौर पर इश्यू डेट से 8 साल की अवधि पूरी होने पर रिडीम किया जाता है. हालांकि, इन्वेस्टर को 5 साल पूरे होने के बाद कुछ निर्धारित इंटरेस्ट पेमेंट डेट्स पर प्रीमैच्योर रिडेम्पशन का विकल्प मिलता है. रिडेम्पशन प्राइस 999 प्योरिटी गोल्ड के पिछले 3 बिजनेस डेज के क्लोजिंग प्राइसेज के सिंपल एवरेज के आधार पर तय की जाती है.
3,276 रुपये से 15,102 रुपये पहुंची कीमत
आंकड़ों के मुताबिक, संबंधित SGB सीरीज को ऑनलाइन इन्वेस्टर के लिए 3,276 रुपये प्रति ग्राम की इश्यू प्राइस पर जारी किया गया था. अब प्रीमैच्योर रिडेम्पशन प्राइस 15,102 रुपये प्रति ग्राम तय की गई है. इस हिसाब से इन्वेस्टर को प्रति ग्राम 11,826 रुपये का सीधा कैपिटल गेन होता है. इसकी गणना इस तरह की जा सकती है:
15,102 रुपये – 3,276 रुपये = 11,826 रुपये प्रति ग्राम
यानी जिस Investor ने इस SGB को 3,276 रुपये प्रति ग्राम की इश्यू प्राइस पर खरीदा था, उसके इन्वेस्टमेंट की गोल्ड वैल्यू अब करीब 4.61 गुना हो गई है. इस आधार पर एब्सोल्यूट रिटर्न करीब 361.11 फीसदी बैठता है. हालांकि, इस कैलकुलेशन में SGB पर मिलने वाला एनुअल इंटरेस्ट शामिल नहीं है.
1 लाख रुपये का Investment कितना हुआ
अगर किसी Investor ने इस SGB में इश्यू के समय ऑनलाइन मोड से 1 लाख रुपये का Investment किया था, तो केवल गोल्ड प्राइस में बढ़ोतरी के आधार पर प्रीमैच्योर रिडेम्पशन पर उसकी वैल्यू करीब 4.61 लाख रुपये हो सकती है. यानी 1 लाख रुपये के शुरुआती Investment पर करीब 3.61 लाख रुपये का कैपिटल गेन बनता है. हालांकि, यह कैलकुलेशन केवल रिडेम्पशन वैल्यू पर आधारित है. इसमें SGB पर होल्डिंग पीरियड के दौरान मिलने वाला 2.5 फीसदी एनुअल इंटरेस्ट शामिल नहीं किया गया है.
SGB इन्वेस्टर को सरकार की ओर से 2.5 फीसदी प्रति वर्ष की फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट मिलती है. यह इंटरेस्ट आम तौर पर हाफ-ईयरली बेसिस पर भुगतान किया जाता है. इसलिए किसी Investor का वास्तविक कुल रिटर्न केवल गोल्ड प्राइस एप्रिसिएशन से मिलने वाले रिटर्न से अधिक हो सकता है.
ऑफलाइन इन्वेस्टर को कितना फायदा
इस SGB सीरीज के लिए ऑफलाइन मोड से आवेदन करने वाले इन्वेस्टर के लिए इश्यू प्राइस 3,326 रुपये प्रति ग्राम थी. वहीं, ऑनलाइन Applicants को 50 रुपये प्रति ग्राम का डिस्काउंट दिया गया था. इसलिए ऑनलाइन और ऑफलाइन इन्वेस्टर की इफेक्टिव परचेज प्राइस अलग थी. 15,102 रुपये प्रति ग्राम की प्रीमैच्योर रिडेम्पशन प्राइस के आधार पर ऑफलाइन इन्वेस्टर के लिए भी रिटर्न काफी मजबूत बनता है, लेकिन ऑनलाइन इन्वेस्टर को शुरुआती डिस्काउंट के कारण अतिरिक्त फायदा मिलता है.
टैक्स रूल्स में भी हुआ बदलाव
SGB इन्वेस्टर के लिए टैक्सेशन को समझना भी बेहद जरूरी है. 1 अप्रैल से SGB से जुड़े कैपिटल गेन्स टैक्स रूल्स में बदलाव किया गया है. नए प्रावधानों के तहत प्रीमैच्योर रिडेम्पशन पर कैपिटल गेन्स टैक्स एग्जेम्प्शन का लाभ नहीं मिलेगा. यानी ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स को भी प्रीमैच्योर रिडेम्पशन के मामले में टैक्स इम्प्लिकेशंस का सामना करना पड़ सकता है.
वहीं, मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन्स टैक्स एग्जेम्प्शन का लाभ ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स के लिए 8 साल की पूरी टेन्योर रखने की स्थिति में उपलब्ध है. सेकेंडरी मार्केट से SGB खरीदने वाले इन्वेस्टर के लिए टैक्स ट्रीटमेंट अलग हो सकता है और उन्हें मैच्योरिटी तक होल्ड करने के बावजूद वही टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता, जो ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स को मिलता है.
इसलिए इन्वेस्टर के लिए केवल गोल्ड प्राइस में हुई तेजी और 361 फीसदी रिटर्न को देखना पर्याप्त नहीं है. प्रीमैच्योर रिडेम्पशन का फैसला लेते समय इंटरेस्ट इनकम, होल्डिंग पीरियड, टैक्स लायबिलिटी और आगे गोल्ड प्राइस की संभावित दिशा को भी ध्यान में रखना जरूरी है.
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