सस्ती हुई चीनी, कीमतों में आई इतनी गिरावट; जानें- एक किलो का रेट
सरकार के 10 लाख टन कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की इजाजत देने के बाद मिल-गेट भाव में लगभग 20 फीसदी की गिरावट के बावजूद रिटेल कीमतें ऊंची बनी रहीं. ISMA ने सितंबर के आखिर में क्लोजिंग स्टॉक 35 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है.

सरकार के इम्पोर्ट की इजाजत देने, स्टॉक रखने पर पाबंदी लगाने और जमाखोरों पर सख्ती करने जैसे कदमों के बाद गुरुवार को रिटेल मार्केट में चीनी की कीमतें थोड़ी कम होकर 64.33 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं. कंज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट के डेटा के मुताबिक, गुरुवार को चीनी का पूरे देश का औसत भाव 64.33 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जो 26 अगस्त के 65.05 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से थोड़ी कम है.
ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट
सरकार के 10 लाख टन कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की इजाजत देने के बाद मिल-गेट भाव में लगभग 20 फीसदी की गिरावट के बावजूद रिटेल कीमतें ऊंची बनी रहीं. चीनी की मौजूदा औसत कीमत एक महीने पहले के स्तर से 31 फीसदी और एक साल पहले की कीमतों से 39 फीसदी ज्यादा है. डेटा से पता चला कि गुरुवार को अधिकतम बिक्री मूल्य 76 रुपये प्रति किलोग्राम था, जबकि सबसे आम भाव (मोडल रेट) 65 रुपये प्रति किलोग्राम था.
कीमतों में 20 फीसदी की गिरावट
गुरुवार को एक बयान में इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा, ‘हाल के ऊंचे स्तरों से चीनी की कीमतों में लगभग 20 फीसदी की गिरावट आई है, क्योंकि सप्लाई से जुड़े उपायों और बेहतर मार्केट विजिबिलिटी का असर मार्केट में दिखने लगा है. उम्मीद है कि यह गिरावट जारी रहेगी क्योंकि त्योहारों के समय की खरीदारी सामान्य हो रही है और आने वाले हफ्तों में नई चीनी उपलब्ध हो जाएगी.’
एक्सपोर्ट पर रोक
कीमतों को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के इम्पोर्ट की इजाजत दी है. सरकार ने डीलरों और बेवरेज बनाने वाली कंपनियों जैसे बड़े ग्राहकों पर स्टॉक रखने की सीमा तय कर दी है. कुछ महीने पहले ही एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी गई थी.
भारत का कुल चीनी उत्पादन
ISMA के मुताबिक, 2025-26 मार्केटिंग ईयर (अक्टूबर-सितंबर) में भारत का कुल चीनी उत्पादन (इथेनॉल के लिए डाइवर्जन के बाद) लगभग 279 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती स्टॉक 50 लाख टन था. सालाना घरेलू मांग 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि सरकार द्वारा रोक लगाने से पहले देश ने 8 लाख टन चीनी का एक्सपोर्ट किया था.
गन्ने की फसल पर असर
ISMA ने सितंबर के आखिर में क्लोजिंग स्टॉक 35 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है. एसोसिएशन ने बताया कि मौजूदा मार्केटिंग ईयर में कुल 309 लाख टन चीनी के उत्पादन में से 30 लाख टन चीनी को दूसरे कामों में इस्तेमाल किए जाने का अनुमान है. ISMA ने शुरू में अनुमान लगाया था कि 2025-26 मार्केटिंग ईयर में देश का कुल चीनी उत्पादन 345 लाख टन होगा, लेकिन बाद में खराब मौसम और कीड़ों की वजह से गन्ने की फसल पर असर पड़ने के कारण इस अनुमान को घटा दिया गया.
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