NSE IPO को मिलने वाली है मंजूरी, SEBI चेयरमैन ने कहा, ‘हम इसके करीब हैं’

NSE ने 17 जून को अपना 614 पेज का DRHP दाखिल किया था, जिसमें 148.9 मिलियन शेयरों तक की पूरी तरह से 'ऑफर-फॉर-सेल' (OFS) की पेशकश की गई थी. पिछले महीने एक और बाधा तब दूर हुई जब NSE ने 31 जुलाई को SEBI को अपना सेटलमेंट पेमेंट पूरा कर दिया.

एनएसई आईपीओ Image Credit: Money9live

Highlights

  • NSE को अगस्त में रेगुलेटरी मंजूरी मिलने की उम्मीद थी.
  • SBICAPS NSE के 8.78 मिलियन तक शेयर बेचेगा.
  • NSE ने 17 जून को अपना 614 पेज का DRHP दाखिल किया था.

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने गुरुवार को कहा कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रस्तावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) को मंजूरी मिलने में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा. इससे संकेत मिलता है कि लंबे समय से प्रतीक्षित लिस्टिंग को जल्द ही रेगुलेटरी मंजूरी मिल सकती है.

मंजूरी के करीब

NSE क्लियरिंग के 30 साल पूरे होने के जश्न के मौके पर, जब पांडे से पूछा गया कि क्या सेबी (SEBI) NSE के IPO को मंजूरी देने के करीब है, तो उन्होंने कहा, ‘हम इसके करीब हैं.’ NSE को अगस्त में रेगुलेटरी मंजूरी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स में बदलाव के बाद 10 अगस्त को अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में एक ऐडेंडम (अतिरिक्त जानकारी) दाखिल करने के कारण समय-सीमा बढ़ा दी गई.

SBI कैपिटल मार्केट्स

SBI कैपिटल मार्केट्स (SBICAPS) को शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर के तौर पर शामिल किए जाने के बाद, प्रस्तावित IPO पर जनता की राय जानने की समय-सीमा 21 दिन बढ़ाकर 31 अगस्त, 2026 कर दी गई. इस बदलाव से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के NSE के 24.75 मिलियन शेयरों को बेचने के पहले के प्रस्ताव को SBI और SBICAPS के बीच बांट दिया गया, जबकि कुल इश्यू साइज में कोई बदलाव नहीं किया गया.

कितने शेयर बेचेगा SBICAPS?

संशोधित ढांचे के तहत, SBICAPS NSE के 8.78 मिलियन तक शेयर बेचेगा, जबकि SBI के प्रस्तावित बिक्री वाले शेयरों की संख्या घटाकर 15.97 मिलियन कर दी गई है. SBICAPS इस IPO के बुक-रनिंग लीड मैनेजरों में से एक भी है.

614 पेज का DRHP

NSE ने 17 जून को अपना 614 पेज का DRHP दाखिल किया था, जिसमें 148.9 मिलियन शेयरों तक की पूरी तरह से ‘ऑफर-फॉर-सेल’ (OFS) की पेशकश की गई थी, जो एक्सचेंज की इक्विटी का लगभग 6 फीसदी है. उस समय NSE के अनलिस्टेड-मार्केट वैल्यूएशन के आधार पर इस इश्यू की अनुमानित कीमत लगभग 30,000 करोड़ रुपये थी. चूंकि यह इश्यू OFS है, इसलिए NSE को शेयर बिक्री से कोई पैसा नहीं मिलेगा.

शेयर बेचने वाले शेयरधारक

शुरुआती दौर में शेयर बेचने वाले शेयरधारकों में SBI, MS स्ट्रैटेजिक (मॉरिशस), कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरिशस), बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शामिल थे. SBI शुरू में सबसे बड़ा विक्रेता था, जिसने 24.75 मिलियन शेयर बेचने का प्रस्ताव रखा था.

दूर हुई रेगुलेटरी बाधा

जनवरी 2026 में SEBI द्वारा NSE को ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) दिए जाने के बाद IPO की योजना ने गति पकड़ी. इससे NSE की लंबे समय से रुकी हुई लिस्टिंग में आ रही एक बड़ी रेगुलेटरी बाधा दूर हो गई. इसके बाद, 6 फरवरी को NSE के बोर्ड ने IPO को मंजूरी दे दी. रेगुलेटरी चिंताओं, खासकर ‘को-लोकेशन’ विवाद से जुड़ी चिंताओं के कारण 2016 से ही NSE की लिस्टिंग की योजनाएं रुकी हुई थीं.

सेटलमेंट पेमेंट पूरा

पिछले महीने एक और बाधा तब दूर हुई जब NSE ने 31 जुलाई को SEBI को अपना सेटलमेंट पेमेंट पूरा कर दिया. कुल सेटलमेंट राशि 1,491.21 करोड़ रुपये थी, जिसमें को-लोकेशन मामले से जुड़ी 1,223.56 करोड़ रुपये की राशि और डार्क-फाइबर मामले से जुड़ी 267.65 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी. सेटलमेंट के बाद NSE और SEBI सुप्रीम कोर्ट से संबंधित मामले को वापस लेने की प्रक्रिया में भी हैं.

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