AI और डेटा सेंटर बूम से चमकेगा पानी का कारोबार! 2.9 लाख करोड़ रुपये के मौके पर इन 2 शेयरों की नजर

AI, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन के बढ़ते विस्तार से पानी की मांग तेजी से बढ़ रही है. 2031 तक ग्लोबल डिसेलिनेशन बाजार करीब 2.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. इस बढ़ते अवसर के बीच Va Tech Wabag और Ion Exchange जैसी कंपनियां वाटर ट्रीटमेंट, डिसेलिनेशन और अल्ट्रा-प्योर वाटर कारोबार में अपनी स्थिति मजबूत कर रही हैं.

डेटा सेंटर Image Credit: FREE PIK

Highlights

  • 2031 तक ग्लोबल डिसेलिनेशन बाजार 30 अरब डॉलर यानी करीब 2.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.
  • Va Tech Wabag की ऑर्डर बुक 30 जून 2026 तक 19,394.2 करोड़ रुपये रही.
  • Ion Exchange की ऑपरेटिंग इनकम 20 फीसदी बढ़ी है.

Data Center: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टरों के लिए बिजली और तकनीक के साथ-साथ पानी भी बेहद जरूरी होता जा रहा है. खास तौर पर सेमीकंडक्टर निर्माण और डेटा सेंटर जैसे उद्योगों में अल्ट्रा-प्योर पानी की बड़ी मात्रा में जरूरत पड़ती है. ऐसे में भारत में इन क्षेत्रों के विस्तार के साथ वाटर ट्रीटमेंट, डिसेलिनेशन, पानी की रीसाइक्लिंग और इंडस्ट्रियल वेस्टवाटर ट्रीटमेंट से जुड़ी कंपनियों के लिए बड़ा कारोबारी अवसर बन रहा है.

2031 तक 2.9 लाख करोड़ रुपये का डिसेलिनेशन बाजार

पानी से जुड़ा यह अवसर केवल भारत तक सीमित नहीं है. Va Tech Wabag की FY26 वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल डिसेलिनेशन बाजार 2031 तक 18 अरब डॉलर से बढ़कर 30 अरब डॉलर यानी करीब 2.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. वहीं, 2020 के बाद से पानी पर केंद्रित निवेश फंड में करीब 60 फीसदी की वृद्धि हुई है और यह लगभग 94 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है.

इस बदलते परिदृश्य में दो कंपनियां खास तौर पर नजर में आती हैं- Va Tech Wabag और Ion Exchange. दोनों कंपनियां पानी के ट्रीटमेंट और रीयूज से जुड़े कारोबार में सक्रिय हैं और सेमीकंडक्टर, सोलर, डेटा सेंटर तथा अन्य हाई-टेक सेक्टरों में बढ़ती पानी की जरूरत को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.

Va Tech Wabag: मजबूत ऑर्डर बुक के दम पर ग्रोथ

Va Tech Wabag प्योर-प्ले वाटर टेक्नोलॉजी कंपनी है. कंपनी ड्रिंकिंग वाटर ट्रीटमेंट, वेस्टवाटर ट्रीटमेंट, रिसाइकिल-रीयूज, डिसेलिनेशन और इंडस्ट्रियल वाटर ट्रीटमेंट जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों में काम करती है. कंपनी EPC के साथ ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस यानी O&M सर्विस भी देती है. O&M कारोबार अपेक्षाकृत ज्यादा मार्जिन और कम जोखिम वाला माना जाता है.

Q1 FY27 में कंपनी के रेवेन्यू में O&M की हिस्सेदारी 18 फीसदी रही. मैनेजमेंट ने इसे मध्यम अवधि में 20 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. फिलहाल कंपनी के 75 फीसदी प्रोजेक्ट म्युनिसिपल और 25 फीसदी इंडस्ट्रियल क्लाइंट्स से आते हैं. भारत और विदेशों से मिलने वाला कारोबार लगभग 48-52 फीसदी के अनुपात में है.

मजबूत है ऑर्डर बुक

30 जून 2026 तक कंपनी की ऑर्डर बुक 19,394.2 करोड़ रुपये थी. इसमें 66 फीसदी यानी 12,728 करोड़ रुपये EPC और 34 फीसदी O&M से जुड़ा था. कंपनी के मुताबिक, EPC ऑर्डर बुक करीब तीन साल की रेवेन्यू विजिबिलिटी देती है. कंपनी अगले तीन से पांच साल में 15-20 फीसदी CAGR से रेवेन्यू बढ़ाने और 13-15 फीसदी EBITDA मार्जिन हासिल करने का लक्ष्य रखती है.

Q1 FY27 में Va Tech Wabag का रेवेन्यू सालाना आधार पर 20.8 फीसदी बढ़कर 886.8 करोड़ रुपये रहा. EBITDA 21.7 फीसदी बढ़कर 116.3 करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट 36.9 फीसदी बढ़कर 90.1 करोड़ रुपये हो गया.

Ion Exchange: अल्ट्रा-प्योर वाटर कारोबार में बड़ी मौजूदगी

Ion Exchange वाटर और एनवायरनमेंट मैनेजमेंट सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है. कंपनी का कारोबार सोर्स वाटर प्री-ट्रीटमेंट, इंडस्ट्रियल वेस्टवाटर ट्रीटमेंट, रिसाइक्लिंग, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज, सीवेज ट्रीटमेंट और ड्रिंकिंग वाटर प्यूरीफिकेशन तक फैला है. कंपनी ने अपने कारोबार को पांच सेगमेंट में पुनर्गठित किया है.

कंपनी सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए स्पेशलाइज्ड अल्ट्रा-प्योर वाटर सिस्टम भी उपलब्ध कराती है. स्रोत के मुताबिक, Ion Exchange करीब 30 साल पहले SCL Mohali के सेमीकंडक्टर कॉम्प्लेक्स के लिए अल्ट्रा-प्योर वाटर प्रोजेक्ट पूरा कर चुकी है. कंपनी पिछले एक साल से भारत में आने वाले सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स के लिए सक्रिय रूप से बोली लगा रही है.

मार्जिन की है चुनौती

हालांकि, Ion Exchange के सामने फिलहाल मार्जिन से जुड़ी चुनौती है. Q1 FY27 में कंपनी की ऑपरेटिंग इनकम 20 फीसदी बढ़कर 701 करोड़ रुपये रही, लेकिन EBITDA 49 फीसदी गिरकर 32 करोड़ रुपये रह गया. EBITDA मार्जिन 4.5 फीसदी तक आ गया और नेट प्रॉफिट 93.6 फीसदी गिरकर सिर्फ 3.1 करोड़ रुपये रह गया.

जून 2026 तक Ion Exchange की ऑर्डर बुक 2,473 करोड़ रुपये थी, जो Hyundai Engineering से मिले करीब 506 करोड़ रुपये के ऑर्डर सहित लगभग 2,980 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

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