₹12.5 लाख करोड़ हो सकती है टाटा संस की वैल्यूएशन, IPO से बचने के रास्ते खत्म; नोएल टाटा के सामने 3 चुनौतियां

Tata Sons IPO: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी की स्टॉक-मार्केट में अनिवार्य लिस्टिंग से बचने की कोशिश खत्म हो गई है. इसके बाद अब माना जा रहा है कि टाटा संस दलाल स्ट्रीट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी. टाटा संस की कुल वैल्यू 15-16 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है.

टाटा समूह Image Credit: Getty images

Tata Sons IPO: टाटा संस के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग की सुगबुगाहट तेज हो गई है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस की ‘कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी’ के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी को खारिज कर दिया है. इससे टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी की स्टॉक-मार्केट में अनिवार्य लिस्टिंग से बचने की कोशिश खत्म हो गई है. इसके बाद अब माना जा रहा है कि टाटा संस दलाल स्ट्रीट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी. इन सब के बीच अब टाटा संस की वैल्यूएशन पर चर्चा चल निकली है.

12.5 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन

ईटी ने जानकारों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया कि टाटा संस की संभावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में वैल्यूएशन 9-12.5 लाख करोड़ रुपये हो सकती है, जिससे 15-16 लाख करोड़ रुपये के अंडरलाइंग पोर्टफोलियो पर भारी डिस्काउंट आ सकता है.

वैल्यूएशन इस बात पर निर्भर करेगा कि इन्वेस्टर्स इसके लिस्टेड स्टेक्स और अनलिस्टेड बिजनेस की कीमत कैसे तय करते हैं, जबकि ट्रेडिशनल डिस्काउंट एक टिपिकल होल्डिंग कंपनी स्ट्रक्चर को दिया जाता है.

टाटा संस की कुल वैल्यू

ईटी के मुताबिक, एक बड़े घरेलू बैंक के इक्विटी कैपिटल मार्केट हेड के एनालिसिस के अनुसार, टाटा संस की कुल वैल्यू 15-16 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है. इसमें लिस्टेड होल्डिंग्स से लगभग 12 लाख करोड़ रुपये और अनलिस्टेड एसेट्स से 4 लाख करोड़ रुपये शामिल हैं.

इसमें लिस्टेड पोर्टफोलियो पर 41-45 फीसदी और अनलिस्टेड एसेट्स पर लगभग 15 फीसदी का होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट लगाया गया है, साथ ही IPO के लिए फेयर वैल्यू पर 10-15% का अतिरिक्त डिस्काउंट भी दिया गया है.

अनलिस्टेड पोर्टफोलियो में हुए लगभग 40,000 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई डिविडेंड से होने वाली कमाई से की जा रही है.

टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी

टाटा संस में 65.9% हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स ने पिछले साल टाटा संस के बोर्ड को निर्देश दिया था कि वे इसे प्राइवेट बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश करें और अपने सबसे बड़े माइनॉरिटी शेयरहोल्डर, शापूरजी पलोनजी ग्रुप को बाहर निकलने (एक्जिट) का रास्ता देने के तरीकों पर विचार करें.

टाटा संस को पब्लिक होने का आदेश रिजर्व बैंक ने तब दिया है, जब होल्डिंग कंपनी में उथल-पुथल मचा हुआ है. टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है, जिससे लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता देखी जा रही है. हालांकि, 17 सितंबर को टाटा संस की बोर्ड मीटिंग होनी है.

नोएल टाटा के सामने चुनौतियां

नोएल टाटा, जिन्होंने अपने सौतेले भाई रतन टाटा के निधन के दो दिन बाद 11 अक्टूबर, 2024 को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन का पद संभाला था, के सामने तीन तत्काल चुनौतियां हैं. पहली, टाटा ग्रुप का नेतृत्व करने के लिए चंद्रशेखरन का उत्तराधिकारी खोजना. इस ग्रुप में सभी पब्लिक और प्राइवेट कंपनियां शामिल हैं और FY26 में इसका रेवेन्यू 16,24,030 करोड़ रुपये और मुनाफा 1,70,525 करोड़ रुपये रहा.

टाटा संस का सबसे बड़ा माइनॉरिटी शेयरहोल्डर

शापूरजी पलोनजी ग्रुप, जिसके पास टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है, को संभावित लिस्टिंग से फायदा हो सकता है, क्योंकि तब वह अपने अनुमानित 55,000-60,000 रुये करोड़ के कर्ज को चुकाने के लिए शेयर बेच सकता है.

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