8th Pay Commission: पेंशन रिविजन से OPS तक, पेंशनर्स ने रखीं ये 12 बड़ी मांगें
8th Pay Commission यानी 8th CPC की कंसल्टेशन प्रोसेस के बीच पेंशनर्स संगठनों ने पेंशन रिविजन, मिनिमम पेंशन, फिटमेंट फैक्टर, डियरनेस रिलीफ और पेंशन कम्यूटेशन को लेकर कई मांगें रखी हैं. पेंशनर्स ने मिनिमम पेंशन को LPD या अंतिम 10 महीनों के एवरेज एमोल्यूमेंट्स का 67 प्रतिशत करने और उम्र के आधार पर पेंशन एनहांसमेंट की मांग की है.
Highlights
- पेंशनर्स ने मिनिमम पेंशन को LPD या अंतिम 10 महीनों के एवरेज एमोल्यूमेंट्स का कम से कम 67 प्रतिशत करने की मांग की है.
- पेंशन कम्यूटेशन की मौजूदा 15 साल की रिस्टोरेशन पीरियड को घटाकर 10 से 12 साल करने की मांग उठी है.
- 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए सेंट्रल गवर्मेंट एम्प्लॉइज के पेंशन रिविजन को लेकर भी पेंशनर्स संगठनों ने मुद्दा उठाया है.
8th Pay Commission की कंसल्टेशन प्रोसेस जारी है. कमीशन अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है और मीटिंग्स के जरिए सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज, पेंशनर्स, यूनियंस और अन्य स्टेकहोल्डर्स से सजेशंस लिए जा रहे हैं. इसी कंसल्टेशन प्रोसेस के दौरान पेंशनर्स संगठनों ने पेंशन रिविजन से लेकर मिनिमम पेंशन, डियरनेस रिलीफ यानी DR, पेंशन कम्यूटेशन और पेंशन सिस्टम में बदलाव तक कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं.
पेंशन रिविजन की मांग
पेंशनर्स संगठनों की सबसे प्रमुख मांग पेंशन रिविजन को लेकर है. National Council-Joint Consultative Machinery यानी NC-JCM, Maharashtra Old Pension Organisation और All India Defence Employees Federation यानी AIDEF ने पेंशन स्ट्रक्चर में व्यापक बदलाव और रिवाइज्ड पे स्ट्रक्चर के साथ पेंशन में पैरिटी की मांग की है. कुछ संगठनों ने ओल्ड पेंशन स्कीम यानी OPS की बहाली और UPS तथा DR लिंकेज में सुधार की मांग भी उठाई है.
मिनिमम पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी की मांग
पेंशनर्स के एक वर्ग ने मिनिमम पेंशन को लास्ट पे ड्रॉन यानी LPD या सर्विस के अंतिम 10 महीनों के एवरेज एमोल्यूमेंट्स का कम से कम 67 प्रतिशत करने की मांग की है. इसके अलावा एज-बेस्ड पेंशन एनहांसमेंट का भी प्रस्ताव रखा गया है. इसके तहत 65 वर्ष की उम्र पर LPD का 70 प्रतिशत, 70 वर्ष पर 75 प्रतिशत, 75 वर्ष पर 80 प्रतिशत, 80 वर्ष पर 85 प्रतिशत, 85 वर्ष पर 90 प्रतिशत और 90 वर्ष या उससे अधिक उम्र में 100 प्रतिशत तक पेंशन करने की मांग रखी गई है.
फिटमेंट फैक्टर में बदलाव की मांग
पेंशनर्स ने पेंशन कैलकुलेशन में इस्तेमाल होने वाले फिटमेंट फैक्टर को रिवाइज करने की भी मांग की है. उनका कहना है कि रिवाइज्ड पे स्ट्रक्चर के अनुरूप पेंशन कैलकुलेशन में उचित बदलाव किया जाना चाहिए. इसके अलावा डियरनेस रिलीफ यानी DR के स्ट्रक्चर की समीक्षा और इसे पेंशन बेनिफिट्स के साथ बेहतर तरीके से इंटीग्रेट करने की मांग भी कंसल्टेशन के दौरान उठी है.
फैमिली पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी जोर
पेंशनर्स संगठनों ने फैमिली पेंशन के दायरे को बढ़ाने की मांग की है. इसके साथ ग्रेच्युटी सीलिंग में बढ़ोतरी और पेंशन कम्यूटेशन रूल्स में बदलाव की मांग भी सामने आई है. इन मांगों का उद्देश्य रिटायर्ड एम्प्लॉइज और उनके परिवारों को ज्यादा फाइनेंशियल सिक्योरिटी उपलब्ध कराना है.
OPS, NPS या UPS चुनने का ऑप्शन
कुछ संगठनों ने पेंशनर्स और एम्प्लॉइज को अलग-अलग पेंशन सिस्टम्स में से अपनी जरूरत के अनुसार ऑप्शन चुनने की सुविधा देने की मांग की है. इसमें ओल्ड पेंशन स्कीम यानी OPS, नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS और यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS शामिल हैं.
पेंशन कम्यूटेशन पीरियड घटाने की मांग
पेंशन कम्यूटेशन को लेकर भी बड़ी मांग सामने आई है. कई सेंट्रल गवर्नमेंट पेंशनर्स और एम्प्लॉई ऑर्गनाइजेशंस मौजूदा 15 साल की रिस्टोरेशन पीरियड को घटाकर 10 से 12 साल करने की मांग कर रहे हैं. NC-JCM, AIDEF, Federation of National Postal Organisations और Bharat Pensioners Samaj सहित कई संगठनों ने 11 साल की रिस्टोरेशन पीरियड का प्रस्ताव दिया है. वहीं Indian Railways Technical Supervisors’ Association ने 12 साल और All India New Pension Scheme Employees Federation ने 10 साल की मांग रखी है.
प्री-2026 रिटायरीज के पेंशन रिविजन का मुद्दा
एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा उन सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज के पेंशन रिविजन से जुड़ा है, जो 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए हैं. Department of Personnel and Training यानी DoPT ने ऐसे एम्प्लॉइज के पेंशन रिविजन से जुड़ी रिप्रेजेंटेशंस को Department of Expenditure को भेजा है. पेंशनर्स संगठनों की चिंता है कि टर्म्स ऑफ रेफरेंस यानी ToR में 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों के पेंशन रिविजन का स्पष्ट उल्लेख नहीं है.
फाइनल डिसीजन अभी बाकी
8th CPC को लेकर कंसल्टेशन और डिस्कशंस अभी जारी हैं और इन मांगों पर कोई फाइनल डिसीजन नहीं हुआ है. कमीशन रेकमेंडेशंस तैयार करने के बाद सेंटर को उन्हें अप्रूव करना होगा. कमीशन के गठन के 18 महीने के भीतर रेकमेंडेशंस आने की संभावना है, जबकि रिपोर्ट जमा करने की अंतिम डेडलाइन May 2027 बताई गई है. इसलिए पेंशनर्स की इन मांगों पर अंतिम तस्वीर कमीशन की रेकमेंडेशंस और उसके बाद गवर्नमेंट के अप्रूवल के बाद ही साफ होगी.
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