Strait of Hormuz: ईरान और ओमान के बीच नए रास्तों पर सहमति, नहीं खुलेगा होर्मुज; 11.3 KM का होगा अस्थायी कॉरिडोर

ईरान के अधिकारियों ने 13 सितंबर को बताया कि ईरान और ओमान, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए आने-जाने के रास्तों की डिटेल्स पर सहमत हो गए हैं. यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि इस समझौते का मतलब जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) का तुरंत फिर से खुलना नहीं है.

होर्मुज स्ट्रेट Image Credit: tv9 bharatvarsh

Highlights

  • फारस की खाड़ी में आने-जाने वाले जहाजों के लिए नए रास्ते बनेंगे.
  • प्रस्तावित कॉरिडोर से ट्रैफिक मैनेजमेंट के केंद्र में ईरान को रखा गया है.
  • दुनिया की तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज से होकर गुजरता था.

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अभी भी पूरी तरह से खुला नहीं है, लेकिन ईरान और ओमान ने दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग (Oil Chokepoint) से कमर्शियल जहाजों के लिए एक कंट्रोल्ड रास्ता बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है. ईरान के अधिकारियों ने 13 सितंबर को बताया कि ईरान और ओमान, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए आने-जाने के रास्तों की डिटेल्स पर सहमत हो गए हैं. उम्मीद है कि इन डिटेल्स को 14 सितंबर को मस्कट में होने वाली एक रीजनल मीटिंग में खाड़ी के अन्य देशों के सामने पेश किया जाएगा.

क्या नहीं खुलेगा होर्मुज?

यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि इस समझौते का मतलब जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) का तुरंत फिर से खुलना नहीं है. ईरान के एक सूत्र ने अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी को बताया कि इस व्यवस्था से फारस की खाड़ी में आने-जाने वाले जहाजों के लिए नए रास्ते बनेंगे, लेकिन होर्मुज तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका से जुड़ी तेहरान की शर्तें पूरी नहीं हो जातीं.

होर्मुज के नए रास्ते क्या हैं?

प्रस्तावित व्यवस्था ईरान-ओमान के उस ढांचे पर आधारित है जिस पर अगस्त में अस्थायी नेविगेशन कॉरिडोर के लिए चर्चा हुई थी. इस योजना के तहत, आने वाला रास्ता ईरान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जबकि बाहर जाने वाले रास्ते का कुछ हिस्सा भी ईरान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरेगा. ईरानी अधिकारियों ने पहले कहा था कि अस्थायी कॉरिडोर लगभग 7 मील (11.3 किलोमीटर) चौड़ा होगा.

ट्रैफिक मैनेजमेंट के केंद्र में ईरान

ओमान और ईरान पहले एक संयुक्त अस्थायी नेविगेशन कॉरिडोर बनाने और माइन (समुद्री सुरंग) हटाने के काम में साथ मिलकर काम करने पर सहमत हुए थे. स्थायी कॉरिडोर, जानकारी साझा करने, ट्रैफिक मैनेजमेंट और नेविगेशन व सुरक्षा सेवाओं पर भी तकनीकी चर्चा की योजना थी.

मुख्य अंतर यह है कि हालिया समझौते में प्रस्तावित कॉरिडोर से ट्रैफिक मैनेजमेंट के केंद्र में ईरान को रखा गया है. तेहरान ने वाशिंगटन और ओमान समर्थित दक्षिणी रास्ते का भी विरोध किया था, यह तर्क देते हुए कि इससे ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन होता है.

कितने जहाज होर्मुज से गुजर रहे हैं?

ग्लोबल शिपिंग के लिए, यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब जलडमरूमध्य से ट्रैफिक सामान्य स्तर से काफी नीचे है. मौजूदा संघर्ष से पहले, दुनिया की तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज से होकर गुजरता था. लेकिन संघर्ष शुरू होने के बाद से शिपिंग गतिविधियां बहुत कम हो गई हैं. शिप-ट्रैकिंग डेटा पर आधारित एक विश्लेषण के अनुसार, अगस्त के आखिर में ट्रैफिक प्रतिदिन 100 से अधिक जहाजों से घटकर लगभग पांच रह गया था.

ईरानी रास्ते का इस्तेमाल

जोखिम के बावजूद और जहाज भी वहां से गुजरते रहे हैं. केप्लर (Kpler) के डेटा से पता चला है कि 1 अगस्त से 19 अगस्त के बीच कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी ले जाने वाले 112 तेल और गैस टैंकर जलडमरूमध्य से गुजरे. इनमें से 21 ने खुले तौर पर ईरानी रास्ते का इस्तेमाल किया और केवल दो ने औपचारिक रूप से ओमान के रास्ते का इस्तेमाल किया, जबकि कई अन्य ने ऐसे रास्तों का इस्तेमाल किया जिनकी सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं हुई थी.

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव से दुनिया भर में ऊर्जा संकट का डर फिर से पैदा हो गया है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत $100 के पार चली गई है.

जहाज मालिकों के लिए क्या है खतरा?

रॉयटर्स के हालिया डेटा से पता चलता है कि रिकवरी अभी भी बहुत सीमित है. सितंबर की शुरुआत में 10 दिनों की अवधि के दौरान होर्मुज से हर दिन औसतन केवल 10 कमोडिटी जहाज गुजरे, जो मई के बाद से सबसे कम संख्या है. इसलिए, जहाज मालिकों के लिए मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि कोई कानूनी रास्ता मौजूद है या नहीं. बीमा, नौसैनिक खतरे, बारूदी सुरंगों का जोखिम, हमले और इस बात को लेकर अनिश्चितता कि किस प्राधिकरण का रास्ते पर नियंत्रण है, ये सभी बड़ी चिंताएं हैं.

होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

इस रुकावट के कारण तेल की कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं. 11 सितंबर तक ब्रेंट क्रूड में साप्ताहिक आधार पर 8% से अधिक की बढ़त देखी गई, जबकि खाड़ी से आपूर्ति में रुकावट की चिंताओं के बीच कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं. गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि अगर मध्य पूर्व में जहाजों पर हमले तेज होते हैं, तो तेल की कीमत $120 प्रति बैरल तक पहुंच सकती है.

खतरा केवल कच्चे तेल तक ही सीमित नहीं है. होर्मुज LNG और अन्य ऊर्जा कार्गो के लिए भी एक प्रमुख गलियारा है, जिसका अर्थ है कि लंबे समय तक रुकावट खाड़ी से परे बिजली बाजारों, माल ढुलाई दरों, पेट्रोकेमिकल्स और मुद्रास्फीति को प्रभावित कर सकती है.

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने भी चेतावनी दी है कि अगर खाड़ी से सामान्य प्रवाह बहाल होने में अधिक समय लगता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति में अंतर बढ़ सकता है.

होर्मुज के क्या विकल्प हैं?

खाड़ी देशों के उत्पादकों के पास कुछ विकल्प हैं, लेकिन कोई भी इस जलडमरूमध्य की पूरी तरह से जगह नहीं ले सकता. सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, जिसे पेट्रोलाइन के नाम से भी जाना जाता है, प्रतिदिन लगभग 7 मिलियन बैरल तक तेल पहुंचा सकती है और सऊदी क्रूड को होर्मुज से गुजरे बिना लाल सागर के टर्मिनलों तक पहुंचने की सुविधा देती है.

UAE की अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन, या ADCOP, एक और बाईपास प्रदान करती है, जो अबू धाबी के हबशान क्षेत्र से ओमान की खाड़ी में फुजैराह तक प्रतिदिन लगभग 1.5 मिलियन बैरल तेल पहुंचाती है. ये रास्ते मिलकर झटके को कम कर सकते हैं, लेकिन वैश्विक तेल आपूर्ति के उस लगभग 20% हिस्से की जगह नहीं ले सकते जो आमतौर पर होर्मुज से होकर गुजरता है.

अब एक अतिरिक्त समस्या भी है. सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जिससे सबसे महत्वपूर्ण विकल्पों में से एक खत्म हो गया है, जबकि होर्मुज का रास्ता पहले से ही बाधित है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह पाइपलाइन वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 4-5% हिस्सा संभालती है.

हूती विद्रोहियों ने एक और मोर्चा खोला

शिपिंग संकट और पेचीदा होता जा रहा है, क्योंकि यमन में हूती विद्रोही समुद्री रास्ते के एक और अहम ‘चोकपॉइंट’ बाब अल-मंदेब के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन सरकार के सूत्रों ने बताया कि ईरान का समर्थन करने वाली हूती सेना 11 सितंबर को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में स्थित पेरिम द्वीप पर पहुंच गई और धूबब नाम के तटीय शहर पर कब्जा कर लिया या वहां आगे बढ़ गई. यह इसलिए अहम है क्योंकि बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और हिंद महासागर और स्वेज नहर के बीच आने-जाने वाले जहाजों के लिए एक मुख्य रास्ता है.

अगर होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों पर एक साथ खतरा मंडराता है, तो शिपिंग कंपनियों के पास बहुत कम विकल्प बचेंगे. ईरान और ओमान के बीच बनी सहमति से सीमित कमर्शियल ट्रैफिक को फिर से शुरू करने का एक संभावित तरीका तो मिलता है, लेकिन यह अभी सामान्य नेविगेशन की स्थिति में वापसी नहीं है.

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