टाटा ट्रस्ट्स की अंदरूनी कलह पहुंची चैरिटी कमिश्नर तक, शिकायतों पर SDTT ने रखा अपना पक्ष

टाटा ट्रस्ट्स विवाद में नया अपडेट सामने आया है. वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की शिकायतों पर सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर को अपना जवाब सौंप दिया है. शिकायतों में ट्रस्ट के कामकाज, प्रशासन और नोएल टाटा की स्थायी ट्रस्टीशिप पर सवाल उठाए गए थे. अब चैरिटी कमिश्नर के अगले कदम पर नजर रहेगी.

नोएल टाटा Image Credit: TV9 Bharatvarsh

टाटा ट्रस्ट से जुड़े विवाद में एक और नया मोड़ आ गया है. सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने ट्रस्ट के कामकाज और प्रशासन में कथित गड़बड़ियों को लेकर दो ट्रस्टियों वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की शिकायतों पर महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर को अपना जवाब सौंप दिया है. Business Standard की एक रिपोर्ट के मुताबिक, SDTT को पहले 12 अक्टूबर तक जवाब देने को कहा गया था, लेकिन बाद में उसने समय बढ़ाने की मांग की और उसे 19 अक्टूबर तक की मोहलत मिल गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, SDTT ने अपने जवाब में क्या कहा है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. हालांकि, इस जवाब से चैरिटी कमिश्नर के लिए SDTT और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के मामले में आगे की कार्रवाई तय करने में मदद मिल सकती है.

Tata Sons की बोर्ड मीटिंग के बाद बढ़ा विवाद

SDTT की भूमिका पर सवाल 17 सितंबर को टाटा सन्स की बोर्ड मीटिंग के दौरान हुए टकराव के बाद उठे थे. इससे पहले इस साल चैरिटी कमिश्नर ने नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) को फ्रीज कर दिया था. टाटा ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन और SDTT के ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने ट्रस्ट के कामकाज में कथित गड़बड़ियों को लेकर शिकायत की थी. उनका आरोप था कि SDTT अपने परोपकारी उद्देश्यों पर ध्यान देने के बजाय टाटा सन्स के कारोबारी मामलों में दखल दे रहा है.

दोनों ने Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा की स्थायी ट्रस्टीशिप पर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने SDTT के प्रशासन और कामकाज की जांच कराने की मांग की थी.

एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर भी टकराव

17 सितंबर की Tata Sons बोर्ड मीटिंग में विवाद और बढ़ गया था. वेणु श्रीनिवासन ने चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के प्रस्ताव का समर्थन किया था. चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना है. श्रीनिवासन ने Tata Sons की लिस्टिंग के प्रस्ताव का भी समर्थन किया था. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत Tata Sons की लिस्टिंग का मुद्दा अहम है. हालांकि, नोएल टाटा ने दोनों प्रस्तावों का विरोध किया और अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल करते हुए चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव को रोक दिया. लिस्टिंग के प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं हुई थी.

श्रीनिवासन के वोट पर क्यों उठे सवाल?

चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के पक्ष में श्रीनिवासन के वोट के बाद यह सवाल उठा कि क्या नामित निदेशकों के बीच बराबरी की स्थिति में गतिरोध दूर करने के लिए कास्टिंग वोट का इस्तेमाल वैध था. इस मुद्दे पर कानूनी राय बंटी हुई है. Tata Sons के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के मुताबिक, अहम फैसलों के लिए नामित निदेशकों के बीच बहुमत से समर्थन जरूरी है.

इससे पहले SDTT में एक प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें श्रीनिवासन से बोर्ड की चर्चा से अलग रहने को कहा गया था. इसकी वजह टाटा सन्स की लिस्टिंग के प्रति उनका समर्थन था, जो टाटा ट्रस्ट के रुख से अलग था. श्रीनिवासन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और चंद्रशेखन के कार्यकाल से जुड़े मतदान में हिस्सा लिया.

Tata Sons में दोनों ट्रस्टों की कितनी हिस्सेदारी?

Tata Sons में SDTT और SRTT की हिस्सेदारी इस विवाद को और अहम बनाती है. SDTT के पास Tata Sons की 27.98% हिस्सेदारी है, जबकि SRTT की हिस्सेदारी 23.56% है. ऐसे में दोनों ट्रस्टों के प्रशासन और शासन से जुड़े विवाद का असर समूह के मालिकाना ढांचे और उससे जुड़े अहम फैसलों पर पड़ सकता है. फिलहाल SDTT के जवाब का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है. अब चैरिटी कमिश्नर इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं, इस पर नजर रहेगी.

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