Waaree Energies को अमेरिका से बड़ी राहत! चाइनीज सोलर सेल्स का नहीं मिला सबूत; कंपनी ने दी जानकारी
भारत की प्रमुख सोलर मॉड्यूल निर्माता कंपनी Waaree Energies को अमेरिकी जांच में बड़ी राहत मिली है. कंपनी ने बताया कि जांच एजेंसी को उसके सोलर पैनलों में चाइनीज सोलर सेल्स के इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला.

Waaree Energies: भारत की सबसे बड़ी सोलर मॉड्यूल निर्माता कंपनी Waaree Energies को अमेरिका से बड़ी राहत मिली है. कंपनी ने जानकारी दी है कि अमेरिकी जांच एजेंसी को उसकी ओर से निर्यात किए गए सोलर पैनलों में चाइनीज सोलर सेल्स के इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला है. कंपनी का कहना है कि इस जांच का उसके मौजूदा अमेरिकी कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है और वहां उसकी सभी मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई गतिविधियां सामान्य रूप से जारी हैं.
क्या था पूरा मामला
अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीबीपी) ने सितंबर 2025 में Waaree Energies और उसकी अमेरिकी सहयोगी कंपनी Waaree सोलर अमेरिकाज इंक. के खिलाफ औपचारिक जांच शुरू की थी. जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि कहीं कंपनी ने चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों से आने वाले सोलर सेल्स पर लागू एंटी-डंपिंग ड्यूटी और काउंटरवेलिंग ड्यूटी से बचने के लिए नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया.
अमेरिका लंबे समय से चीन, वियतनाम और मलेशिया से आने वाले सोलर सेल्स और मॉड्यूल्स पर अतिरिक्त शुल्क लगाता रहा है. ऐसे में जांच एजेंसी यह पता लगा रही थी कि कहीं इन देशों के सोलर सेल्स का इस्तेमाल कर उन्हें किसी दूसरे देश के उत्पाद के रूप में तो निर्यात नहीं किया गया.
चाइनीज सोलर सेल्स नहीं मिलने का दावा
कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि अमेरिकी जांच में उसके सोलर पैनलों में चाइनीज सोलर सेल्स के इस्तेमाल का कोई प्रमाण नहीं मिला. कंपनी के अनुसार, जांच केवल कुछ सीमित पुराने आयात मामलों तक ही सीमित रही और इसका उसके मौजूदा अमेरिकी कारोबार पर कोई असर नहीं है.
फिर भी क्यों लग सकता है भारी शुल्क
हालांकि चाइनीज सोलर सेल्स के इस्तेमाल के आरोप साबित नहीं हुए, लेकिन सीबीपी ने 23 जून 2026 को जारी अपने अंतिम फैसले में कहा कि वर्ष 2021 से 23 जून 2026 के बीच कंपनी ने वियतनाम और मलेशिया से जुड़े कुछ आयात मामलों में लागू टैरिफ नियमों से बचने की कोशिश की थी.
इसी आधार पर एजेंसी ने उन सोलर मॉड्यूल्स पर, जो इन नियमों के दायरे में आते हैं, अधिकतम 271.28 फीसदी एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का फैसला किया था. यानी कंपनी को एक तरफ चाइनीज सोलर सेल्स के आरोप से राहत मिली है, लेकिन कुछ पुराने आयात मामलों को लेकर उसे अब भी टैरिफ संबंधी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.
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