7 रुपये ज्यादा दाम पर बेच रहे थे पानी की बोतल, अब 7 लाख भरना होगा जुर्माना; कंज्यूमर कोर्ट ने दिया फैसला

MRP से 7 रुपये ज्यादा कीमत पर पानी की बोतल बेचने के मामले में कंज्यूमर कमीशन ने दुकानदार पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. आंध्र प्रदेश के अन्नावरम स्थित मंदिर परिसर की दुकान में 18 रुपये एमआरपी वाली एक लीटर पानी की बोतल श्रद्धालु को 25 रुपये में बेची गई थी. कमीशन ने अतिरिक्त 7 रुपये वापस करने, 10,000 रुपये कंपनसेशन और 5,000 रुपये लिटिगेशन कॉस्ट देने का आदेश भी दिया है.

अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस Image Credit: ai/canva

MRP Overcharging: आंध्र प्रदेश के एक मंदिर में श्रद्धालु को एमआरपी से 7 रुपये महंगी पानी की बोतल बेचना दुकानदार को भारी पड़ गया. काकीनाडा डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन ने अन्नावरम स्थित श्री वीरा वेंकट सत्यनारायण स्वामी टेंपल परिसर में दुकान चलाने वाले लाइसेंसी पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. दुकानदार ने एक लीटर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की बोतल, जिस पर 18 रुपये का एमआरपी दर्ज था, उसे 25 रुपये में बेचा था. कमीशन ने दुकानदार को श्रद्धालु से वसूले गए अतिरिक्त 7 रुपये वापस करने के साथ 10,000 रुपये कंपनसेशन और 5,000 रुपये लिटिगेशन कॉस्ट देने का आदेश दिया. इसके अलावा 7 लाख रुपये कंज्यूमर वेलफेयर फंड में जमा कराने का निर्देश दिया गया है.

कैसे शुरू हुआ मामला

कमीशन के आदेश के मुताबिक डी. वेंकटेश्वर राव 22 फरवरी 2026 को मंदिर गए थे. उन्होंने मंदिर परिसर में लाइसेंसी दुकान से एक लीटर पानी की बोतल खरीदी. बोतल पर एमआरपी 18 रुपये छपा था, लेकिन दुकानदार ने यूपीआई के जरिए उनसे 25 रुपये वसूले.

जब राव ने ज्यादा रकम लेने की वजह पूछी तो दुकानदार ने कथित तौर पर कहा कि उसे एमआरपी से अधिक कीमत पर बोतल बेचने की अनुमति है. इसके बाद राव ने मंदिर प्रशासन से व्हाट्सऐप के जरिए शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने कंज्यूमर कमीशन में शिकायत दर्ज कराई.

दुकानदार की दलील नहीं मानी

दुकानदार ने 25 रुपये सिर्फ पानी की बोतल के लिए लेने से इनकार किया. उसका दावा था कि राव ने 20 रुपये का कोल्ड ड्रिंक और 5 रुपये का बिस्किट पैकेट भी खरीदा था. हालांकि कमीशन ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. बेंच ने यूपीआई पेमेंट के सबूत और पानी की बोतल की फोटो की जांच की और इन्हें शिकायतकर्ता के पक्ष में पाया. दुकानदार अपने दावे के समर्थन में कोई भरोसेमंद दस्तावेज भी पेश नहीं कर सका.

मंदिर प्रशासन को भी दिए निर्देश

मंदिर प्रशासन ने बताया कि दुकान एक स्वतंत्र लाइसेंसी चला रहा था और पहले भी ओवरचार्जिंग की शिकायतों पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई थी. कमीशन को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि मंदिर प्रशासन ने एमआरपी से अधिक कीमत लेने की अनुमति दी थी. इसलिए मंदिर प्रशासन के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी गई.

हालांकि कमीशन ने मंदिर प्रशासन को सभी लाइसेंसी दुकानों पर पैकेज्ड प्रोडक्ट्स का एमआरपी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कराने और श्रद्धालुओं को हर घंटे केवल एमआरपी का भुगतान करने की अनाउंसमेंट कराने का निर्देश दिया.

सिर्फ 7 रुपये लौटाना पर्याप्त नहीं

कमीशन ने कहा कि एमआरपी से अधिक कीमत वसूलना कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 की सेक्शन 2(47) के तहत अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस है. तीर्थस्थल पर पानी जैसी जरूरी चीज के लिए श्रद्धालुओं के पास सीमित विकल्प होने के कारण मामला और गंभीर हो जाता है.

कमीशन के मुताबिक केवल 7 रुपये वापस करने से दुकानदार को दूसरे उपभोक्ताओं से इसी तरह ज्यादा रकम वसूलने का फायदा मिलता रहता. इसलिए 7 लाख रुपये का पनिटिव पेमेंट कंज्यूमर वेलफेयर फंड में जमा कराने का आदेश दिया गया. सभी निर्देशों का पालन 45 दिनों में करना होगा. देरी होने पर बकाया रकम पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज लगेगा.

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