क्या F&O रिस्क NSE IPO के इन्वेस्टर्स के लिए है बड़ा खतरा, सेबी के साये में 70% रेवेन्यू; समझें कमाई का आंकड़ा

एक्सचेंज अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्ज से कमाता है, और इसमें भी ऑप्शंस ट्रेडिंग का सबसे बड़ा योगदान है. अगर ऑप्शंस का वॉल्यूम कम होता है, तो NSE की ट्रांजैक्शन से होने वाली कमाई पर उन बिजनेस की तुलना में तेजी से दबाव आ सकता है.

NSE IPO Image Credit: Money9 Live

Highlights

  • ऑप्शंस में मार्केट शेयर के ट्रेंड पर बारीकी से नजर रखी जा रही है.
  • NSE की वीकली ऑप्शंस पर निर्भरता बहुत कम हो गई है.
  • इस सख्ती की वजह रिटेल निवेशकों को होने वाला नुकसान है.

NSE का IPO बाजार में एक खास कहानी के साथ आ रहा है. इसका मार्केट शेयर बहुत अधिक है, लेकिन साथ ही इसके सबसे मजबूत बिजनेस सेगमेंट- फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग (F&O) पर रेगुलेटरी निगरानी बढ़ने का दबाव भी है. एक्सचेंज अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्ज से कमाता है, और इसमें भी ऑप्शंस ट्रेडिंग का सबसे बड़ा योगदान है.

कमाई में ट्रांजैक्शन चार्ज का हिस्सा

ईटी के अनुसार, FY26 में NSE के ऑपरेशन से होने वाली कुल कमाई में ट्रांजैक्शन चार्ज का हिस्सा 78.6% था. अकेले ऑप्शंस का योगदान 9,997 करोड़ रुपये या ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 60% था, जबकि फ्यूचर्स से 1,480 करोड़ रुपये या 9% की कमाई हुई. कुल मिलाकर, फ्यूचर्स और ऑप्शंस सेगमेंट का ऑपरेटिंग रेवेन्यू में लगभग 69% योगदान रहा.

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम

इस वजह से डेरिवेटिव्स से जुड़े नियम-कानून इस इश्यू का मूल्यांकन करने वाले निवेशकों के लिए सबसे बड़े जोखिमों में से एक हैं. अगर ऑप्शंस का वॉल्यूम कम होता है, तो NSE की ट्रांजैक्शन से होने वाली कमाई पर उन बिजनेस की तुलना में तेजी से दबाव आ सकता है जिनकी कमाई के सोर्स अधिक डायवर्सिफाइड हैं.

क्या कहते हैं तिमाही के आंकड़े?

हालांकि, हालिया तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि NSE की कमाई में अभी तक कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है. जून तिमाही में एक्सचेंज ने 4,560 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 3,594 करोड़ रुपये का EBITDA दर्ज किया. ट्रांजैक्शन चार्ज से होने वाली कमाई 3,623 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले 3,154 करोड़ रुपये थी.

लेकिन ऑप्शंस में मार्केट शेयर के ट्रेंड पर बारीकी से नजर रखी जा रही है. NSE का ऑप्शंस प्रीमियम-टर्नओवर मार्केट शेयर Q1 में गिरकर 68.48% हो गया, जो FY26 में 75% और FY24 में 97% था.

वीकली ऑप्शंस पर निर्भरता

NSE के MD और CEO आशीष चौहान ने इस चिंता को दूर करने की कोशिश की है. एक्सचेंज के IPO की तैयारी के बीच उन्होंने कहा कि NSE की वीकली ऑप्शंस पर निर्भरता बहुत कम हो गई है. उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे बिजनेस में ग्रोथ से एक्सचेंज की कुल कमाई में वीकली ऑप्शंस का हिस्सा कम हो जाएगा.

एक्सचेंज का मानना ​​है कि डेरिवेटिव्स भले ही महत्वपूर्ण बने रहें, लेकिन वह दूसरे बिजनेस के जरिए अपनी कमाई के आधार को जोखिम-मुक्त (DE-Risk) करने की कोशिश कर रहा है.

सेबी की निगरानी बढ़ना

ईटी के अनुसार, रेगुलेटरी दबाव कुछ समय से बढ़ रहा है. अक्टूबर 2024 से सेबी ने इक्विटी डेरिवेटिव्स में सट्टेबाजी वाली ट्रेडिंग को कम करने के लिए कई उपाय किए हैं. इनमें साप्ताहिक इंडेक्स एक्सपायरी को सीमित करना, कॉन्ट्रैक्ट का साइज बढ़ाना, ऑप्शन प्रीमियम पहले ही जमा करना, एक्सपायरी के दिन रिस्क मार्जिन बढ़ाना और पोजीशन लिमिट की इंट्राडे मॉनिटरिंग को मजबूत करना शामिल है.

रिटेल निवेशकों को होगा नुकसान?

इस सख्ती की वजह रिटेल निवेशकों को होने वाला नुकसान है. सेबी की FY26 की हालिया स्टडी में पाया गया कि इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेड करने वाले 87.7% व्यक्तिगत ट्रेडर्स को कुल मिलाकर लगभग 91,685 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इस नुकसान का ज्यादातर हिस्सा ऑप्शंस ट्रेडिंग से हुआ.

एक्सपायरी-डे सेटलमेंट पर फोकस

रेगुलेटर का हालिया फोकस एक्सपायरी-डे सेटलमेंट पर है. क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शुरू होने के बाद, सेबी ने इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स में सेटलमेंट की कीमतें तय करने के लिए दो विकल्प पेश किए हैं. एक विकल्प यह है कि नॉर्मल ट्रेडिंग के आखिरी 30 मिनट के ट्रेड्स को 10 मिनट के क्लोजिंग ऑक्शन के साथ मिला दिया जाए.

दूसरा विकल्प यह है कि सिर्फ नॉर्मल ट्रेडिंग के आखिरी 30 मिनट का इस्तेमाल किया जाए और क्लोजिंग ऑक्शन को शामिल न किया जाए, कम से कम एक साल के लिए.

कमाई पर असर

NSE के लिए, इन बदलावों से डेरिवेटिव्स का कारोबार सीधे तौर पर खत्म नहीं होगा. लेकिन इनसे ट्रेडर्स का व्यवहार बदल सकता है. सट्टेबाजी वाला वॉल्यूम कम हो सकता है और शॉर्ट टर्म में ट्रांजैक्शन से होने वाली कमाई पर असर पड़ सकता है.

NSE का बड़ा स्केल अभी भी उसकी सबसे बड़ी ताकत है. एक्सचेंज भारत के कैश और डेरिवेटिव्स मार्केट में अपना दबदबा बनाए हुए है, और उसके हालिया तिमाही नतीजे दिखाते हैं कि कुछ रेगुलेटरी बदलाव लागू होने के बाद भी मुनाफा मजबूत बना हुआ है.

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डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.