क्या गोल्ड में निवेश हर साल महंगाई को देता है मात? 40 साल का आंकड़ा देगा जवाब
सोने की कीमत एक बार फिर 1.64 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गई है. लेकिन निवेशकों के लिए बड़ा सवाल यह है कि क्या सोना वास्तव में महंगाई से बचाता है. FundsIndia के 1995 से 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, छोटी अवधि में सोने का प्रदर्शन काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा, लेकिन लंबी अवधि में इसने महंगाई को लगातार बेहतर तरीके से पीछे छोड़ा.

Gold vs Inflation: सोने की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है. 24 कैरेट सोना अब करीब 1.64 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया है. कुछ दिन पहले इसकी कीमत करीब 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम थी. यानी बहुत कम समय में सोने ने फिर तेज उछाल दिखाया है.
सोने की कीमत बढ़ने के साथ निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ना स्वाभाविक है. लेकिन लोग सिर्फ कीमत बढ़ने की उम्मीद में ही सोना नहीं खरीदते. लंबे समय से सोने को महंगाई से बचाने वाले निवेश यानी Inflation Hedge के तौर पर भी देखा जाता है. लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या सोना वास्तव में लंबे समय में महंगाई को पीछे छोड़ पाता है? और अगर छोड़ता है तो कितने अंतर से?
FundsIndia की Wealth Conversations August 2026 रिपोर्ट में 1995 से 2025 के बीच अलग-अलग अवधि में सोने के रिटर्न और महंगाई की तुलना की गई है. आंकड़े बताते हैं कि छोटी अवधि में सोना महंगाई को हमेशा मात नहीं देता. लेकिन निवेश की अवधि बढ़ने के साथ इसकी महंगाई से आगे रहने की क्षमता ज्यादा मजबूत और लगातार दिखाई देती है.
रिपोर्ट में कैसे की गई तुलना?
FundsIndia ने 1995 से 2025 के बीच अलग-अलग निवेश अवधि के दौरान सोने के रिटर्न की तुलना महंगाई से की. यहां यह देखा गया कि सोने का रिटर्न महंगाई से कितना ज्यादा या कम रहा. अगर आंकड़ा पॉजिटिव है तो इसका मतलब है कि सोने का रिटर्न महंगाई से ज्यादा रहा. वहीं, निगेटिव आंकड़ा यह बताता है कि उस अवधि में महंगाई की रफ्तार सोने के रिटर्न से ज्यादा रही. इस तुलना में 1 साल से लेकर 5, 10, 15 और 20 साल तक की अवधि को देखा गया.
1980 से 2026 तक सोने का सफर क्या कहता है?
FundsIndia के एक चार्ट से यह भी पता चलता है कि सोने की कीमतों ने लंबे समय में कई ऐसे दौर देखे हैं, जब वर्षों तक रिटर्न बेहद कम या लगभग शून्य रहा. हालांकि, इसके बाद तेजी के ऐसे दौर भी आए, जिन्होंने लंबी अवधि के रिटर्न को मजबूत बनाया. ग्राफ के मुताबिक 1980 से 1989 के बीच सोने से लगभग कोई रिटर्न नहीं मिला. इसके बाद 1989 से 1996 के दौरान सोने ने करीब 12 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर यानी CAGR से रिटर्न दिया.
1996 से 2002 के बीच एक बार फिर सोने का रिटर्न लगभग शून्य रहा. इसके बाद तस्वीर तेजी से बदली. 2002 से 2012 के दौरान सोने ने करीब 19 फीसदी CAGR से रिटर्न दिया.
2012 से 2019 के बीच भी सोने का प्रदर्शन लगभग सपाट रहा और इस अवधि में रिटर्न करीब शून्य दर्ज किया गया. लेकिन 2019 से 2026 के बीच सोने में एक बार फिर जोरदार तेजी आई और इस दौरान करीब 21 फीसदी CAGR का रिटर्न देखने को मिला.
लंबे समय में कितना रहा सोने का रिटर्न?
टेबल से समझें-
| निवेश की अवधि | सोने का औसत सालाना रिटर्न |
|---|---|
| 10 साल | 15.7% |
| 20 साल | 13.7% |
| 30 साल | 11.8% |
| 40 साल | 11.8% |
इससे साफ है कि छोटी अवधि में सोने का प्रदर्शन काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है. कुछ दौर में कई वर्षों तक कोई खास रिटर्न नहीं मिला, जबकि कुछ वर्षों में सोने ने बहुत तेज बढ़त दिखाई.
यही वजह है कि सोने को सिर्फ कुछ महीनों या एक-दो साल के रिटर्न के आधार पर नहीं आंकना चाहिए. लंबे समय में सोने का रिकॉर्ड ज्यादा मजबूत दिखता है, लेकिन निवेशकों को यह भी समझना चाहिए कि इसके रिटर्न हमेशा एक जैसी रफ्तार से नहीं बढ़ते.
1 साल में सोना हमेशा नहीं देता महंगाई से सुरक्षा
अगर कोई निवेशक सिर्फ 1 साल के लिए सोने में निवेश करता है तो उसका अनुभव निवेश के समय पर काफी निर्भर कर सकता है. आंकड़ों के मुताबिक अलग-अलग एक साल की अवधि में औसतन सोने ने महंगाई को सालाना करीब 4 फीसदी अंक से पीछे छोड़ा. लेकिन यह औसत पूरी तस्वीर नहीं बताता.
कुछ एक साल की अवधि ऐसी भी रही जब सोने ने महंगाई को सालाना 24 प्रतिशत अंक तक पीछे छोड़ा. वहीं, कुछ अवधि में सोने का प्रदर्शन इतना कमजोर रहा कि यह महंगाई से सालाना 28 प्रतिशत अंक तक पीछे रह गया. यानी छोटी अवधि में सोना काफी उतार-चढ़ाव वाला निवेश साबित हो सकता है. सिर्फ यह मान लेना कि महंगाई बढ़ेगी तो सोने की कीमत भी उसी अनुपात में बढ़ेगी, सही नहीं है.
5 साल की अवधि में तस्वीर बदल जाती है
निवेश की अवधि 5 साल होने पर सोने का प्रदर्शन महंगाई के मुकाबले ज्यादा स्थिर दिखाई देता है. FundsIndia के आंकड़ों के अनुसार, 5 साल की अवधि में सोने ने औसतन महंगाई से सालाना करीब 5 प्रतिशत अंक बेहतर प्रदर्शन किया. यह अंतर 10, 15 और 20 साल की अवधि में भी करीब 5 प्रतिशत अंक के आसपास बना रहा. इसका मतलब है कि सोना हर छोटे समय में महंगाई को मात नहीं देता, लेकिन लंबी अवधि में इसका रिकॉर्ड ज्यादा मजबूत रहा है.
10 से 20 साल में सोने की महंगाई से आगे रहने की क्षमता ज्यादा मजबूत
अगर निवेशक लंबे समय तक सोने में बने रहते हैं तो महंगाई से बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना ऐतिहासिक आंकड़ों में ज्यादा स्थिर दिखाई देती है. FundsIndia के मुताबिक 10 साल, 15 साल और 20 साल की अलग-अलग अवधि में भी सोने ने औसतन महंगाई से सालाना करीब 5 प्रतिशत अंक बेहतर प्रदर्शन किया.
यही वजह है कि सोने को सिर्फ तेजी से रिटर्न देने वाले निवेश के तौर पर नहीं देखा जाता. इसकी भूमिका लंबे समय में खरीदने की ताकत यानी Purchasing Power को बचाने की भी हो सकती है.
महंगाई बढ़ी तो हर बार सोना बढ़े, जरूरी नहीं
सोने को Inflation Hedge कहने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि महंगाई बढ़ते ही सोने की कीमत हर बार बढ़ जाएगी. न ही इसका मतलब यह है कि सोना हर साल महंगाई को पीछे छोड़ देगा. सोने की कीमतों में भी तेज तेजी और सुस्त रिटर्न के दौर आते रहे हैं. इसलिए एक निवेशक अगर गलत समय पर छोटी अवधि के लिए सोना खरीदता है तो उसे महंगाई से बेहतर रिटर्न न भी मिले. यहां निवेश की अवधि काफी अहम हो जाती है.
निवेश की अवधि जितनी लंबी, सोने का रिकॉर्ड उतना मजबूत
FundsIndia के 1995 से 2025 तक के आंकड़ों से एक बात साफ होती है कि सोना हर छोटी अवधि में महंगाई को मात देने की गारंटी नहीं देता. लेकिन लंबी अवधि में इसकी तस्वीर बदल जाती है. 5 साल से लेकर 20 साल तक की अवधि में सोने ने औसतन महंगाई से करीब 5 प्रतिशत अंक बेहतर प्रदर्शन किया. यानी सोने की मौजूदा तेजी को सिर्फ कीमत बढ़ने के नजरिए से देखने के बजाय निवेशकों को यह भी समझना चाहिए कि पोर्टफोलियो में इसकी भूमिका लंबी अवधि में महंगाई से बचाव और डायवर्सिफिकेशन की हो सकती है.
सोना हर साल महंगाई को मात दे, यह जरूरी नहीं है. लेकिन लंबे समय के ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि खरीदने की क्षमता बचाने के मामले में इसका रिकॉर्ड छोटी अवधि की तुलना में लंबी अवधि में ज्यादा मजबूत रहा है.
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