OYO के IPO से पहले बढ़ी मुश्किलें! Zostel ने SEBI से की शिकायत; ड्राफ्ट पेपर में अधूरी जानकारी देने का लगाया आरोप
OYO के IPO से पहले Zostel ने SEBI से शिकायत कर कंपनी के UDRHP में कानूनी विवाद से जुड़ी अधूरी और भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगाया है. Zostel का दावा है कि Oravel में 7 फीसदी आर्थिक हिस्सेदारी और लंबे समय से चल रहे विवाद से जुड़े अहम तथ्यों का पर्याप्त खुलासा नहीं किया गया.

OYO IPO: OYO की प्रस्तावित IPO से पहले कंपनी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. हॉस्पिटैलिटी कंपनी Zostel ने SEBI से OYO की मूल कंपनी प्रिज्म के UDRHP की समीक्षा करने की मांग की है. Zostel का आरोप है कि OYO ने अपने IPO दस्तावेज में दोनों कंपनियों के बीच लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद की जानकारी पूरी और संतुलित तरीके से नहीं दी है. कंपनी का कहना है कि अगर निवेशकों को सही और पूरी जानकारी नहीं मिलेगी, तो इससे उनके निवेश संबंधी फैसले प्रभावित हो सकते हैं.
SEBI को सौंपा 56 पन्नों का निवेदन
एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, Zostel ने 3 जुलाई को SEBI को 56 पन्नों का निवेदन सौंपा था और 7 जुलाई को इस संबंध में एक रिमाइंडर भी भेजा. कंपनी ने SEBI से आग्रह किया है कि OYO के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल करने से पहले उसमें जरूरी सुधार और अतिरिक्त खुलासे करवाए जाएं.
हालांकि, Zostel ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह SEBI से कानूनी विवाद पर फैसला देने या अदालत की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने की मांग नहीं कर रही है. उसका कहना है कि नियामक केवल यह सुनिश्चित करे कि IPO दस्तावेज निवेशकों को “पूर्ण, निष्पक्ष, सटीक और संतुलित” जानकारी उपलब्ध कराता है.
7 फीसदी हिस्सेदारी के दावे का मुद्दा
Zostel का सबसे बड़ा दावा OYO की मूल कंपनी ओरावेल में लगभग 7 फीसदी आर्थिक हिस्सेदारी से जुड़ा है. कंपनी का कहना है कि IPO दस्तावेज में इस दावे को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है, जबकि यह निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण तथ्य हो सकता है.
Zostel का आरोप है कि OYO ने 2015 के टर्म शीट को केवल नॉन-बाइंडिंग टर्म शीट बताकर पेश किया है, जबकि पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए. एम. अहमदी की अध्यक्षता वाले एकल मध्यस्थ ने वर्ष 2021 के आर्बिट्रेशन अवॉर्ड में इसे बाध्यकारी माना था. हालांकि, बाद में यह आर्बिट्रेशन अवॉर्ड रद्द कर दिया गया था और मामला फिलहाल आगे की कानूनी प्रक्रिया में है.
दस्तावेज में अहम जानकारियां छूटने का आरोप
Zostel ने आरोप लगाया है कि OYO के UDRHP में कई महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया है. कंपनी के अनुसार, आर्बिट्रेशन के दौरान कर्मचारियों के स्थानांतरण, ग्राहक बुकिंग, कस्टमर डेटा, होटल मालिकों के डेटाबेस, टेक्नोलॉजी एसेट्स और अन्य कारोबारी सूचनाओं से जुड़े कई दस्तावेज सामने आए थे, लेकिन उनका पर्याप्त उल्लेख IPO दस्तावेज में नहीं किया गया.
Zostel का कहना है कि यह विवाद केवल एक सामान्य कॉन्ट्रैक्ट विवाद नहीं है, बल्कि इसका असर कंपनी की हिस्सेदारी, कारोबारी स्ट्रक्चर और भविष्य के वित्तीय जोखिमों पर भी पड़ सकता है. ऐसे में निवेशकों को इन सभी पहलुओं की जानकारी मिलनी चाहिए.
OYO ने पहले ही कुछ जोखिमों का किया है खुलासा
दूसरी ओर, OYO ने अपने अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में इस कानूनी विवाद का जिक्र किया है. कंपनी ने कहा है कि यदि अदालत का अंतिम फैसला उसके खिलाफ आता है, तो उसे ओरावेल की करीब 7 फीसदी हिस्सेदारी जारी या ट्रांसफर करनी पड़ सकती है या फिर उसके बराबर की राशि का भुगतान करना पड़ सकता है.
ड्राफ्ट दस्तावेज में वर्ष 2015 के टर्म शीट, 2018 में शुरू हुई आर्बिट्रेशन, मार्च 2021 के आर्बिट्रेशन अवॉर्ड, मई 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा अवॉर्ड रद्द किए जाने और वर्तमान में दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित सेक्शन 37 अपील का भी उल्लेख किया गया है. OYO ने यह भी स्वीकार किया है कि इस कानूनी विवाद का असर उसके कारोबार, वित्तीय स्थिति, प्रतिष्ठा और शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर पर पड़ सकता है.
यह भी पढ़ें: SBI का 15 पैसे का दांव कराएगा 7366.39 करोड़ रुपये की कमाई, जानें- कैसे एक छोटा निवेश बंपर मुनाफे में बदलेगा